CJP प्रदर्शन पर Supriya Sule का बड़ा बयान, बोलीं- सरकार गिराना या सत्ता बदलना हमारा मकसद नहीं
NCP (SP) नेता सुप्रिया सुले ने CJP और Election Commission विरोधी प्रदर्शनों को लेकर कहा कि विपक्ष का उद्देश्य सरकार गिराना नहीं, बल्कि जवाबदेही और चुनावी पारदर्शिता की मांग करना है। Navbharat Times
CJP प्रदर्शन और ‘regime change’ को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच सुप्रिया सुले ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार गिराना या सत्ता परिवर्तन करना विपक्ष का मकसद नहीं है। उनकी प्राथमिक मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की जवाबदेही और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता से जुड़ी है।
CJP प्रदर्शन पर Supriya Sule का बड़ा बयान, बोलीं- सरकार गिराना या सत्ता बदलना हमारा मकसद नहीं
CJP प्रदर्शन और ‘regime change’ विवाद के बीच NCP (SP) नेता सुप्रिया सुले ने कहा कि सरकार गिराना या सत्ता बदलना विपक्ष का उद्देश्य नहीं है।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली | 19 अक्टूबर 2026
CJP के विरोध प्रदर्शनों और विपक्ष पर लगाए जा रहे “regime change” के आरोपों के बीच NCP (Sharad Pawar) की वरिष्ठ नेता Supriya Sule ने नया राजनीतिक बयान दिया है।
सुप्रिया सुले ने साफ किया कि इन प्रदर्शनों का उद्देश्य सरकार गिराना या सत्ता परिवर्तन कराना नहीं है। उनका कहना है कि विपक्ष चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और संवैधानिक संस्थाओं से जवाबदेही की मांग कर रहा है। Navbharat Times
यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब BJP के कई नेता विपक्ष और CJP समर्थित प्रदर्शनों को “regime change” की राजनीति से जोड़ रहे हैं। आपकी वेबसाइट पर इस विवाद को लेकर राजनाथ सिंह, प्रशांत भूषण और धर्मेंद्र प्रधान से जुड़े अलग-अलग बयान पहले ही प्रकाशित हो चुके हैं। Pratyakshdarshi Samachar
खबर में खास
Supriya Sule ने CJP प्रदर्शनों पर दिया बड़ा बयान।
कहा—सरकार गिराना विपक्ष का उद्देश्य नहीं।
Election Commission से जवाबदेही की मांग दोहराई।
CEC Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग को बताया प्रमुख मुद्दा।
BJP विपक्ष के प्रदर्शनों को “regime change” की कोशिश बताती रही है।
विपक्षी नेताओं के भीतर भी प्रदर्शन के उद्देश्य को लेकर अलग-अलग शब्दों का इस्तेमाल सामने आया है।
Supriya Sule ने क्या कहा?
सुप्रिया सुले ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार बदलने का रास्ता चुनाव है और मौजूदा प्रदर्शनों को सरकार गिराने की कोशिश के रूप में पेश करना सही नहीं है।
उनके मुताबिक आंदोलन का मुख्य मुद्दा चुनावी प्रक्रिया और Election Commission की जवाबदेही है। उन्होंने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग का भी समर्थन किया।
‘Regime Change’ पर क्यों मचा है विवाद?
पिछले कुछ दिनों से CJP आंदोलन को लेकर “regime change” शब्द राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है।
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने सत्ता परिवर्तन को लोकतांत्रिक अधिकार बताते हुए कहा था कि वे बदलाव चाहते हैं। इसके बाद BJP नेताओं ने विपक्ष पर सरकार को अस्थिर करने की कोशिश के आरोप लगाए। आपकी वेबसाइट पर यह विवाद पहले भी विस्तार से प्रकाशित किया जा चुका है। Pratyakshdarshi Samachar
Rajnath Singh भी लगा चुके हैं आरोप
रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने लखनऊ में विपक्ष पर आरोप लगाया था कि कुछ नेता बांग्लादेश जैसे घटनाक्रम से प्रेरित होकर भारत में सत्ता परिवर्तन की राजनीति करना चाहते हैं।
उन्होंने Rahul Gandhi और Congress को भी निशाने पर लिया था। विपक्ष ने इन आरोपों को खारिज करते हुए अपने आंदोलन को लोकतांत्रिक और संवैधानिक बताया है। Pratyakshdarshi Samachar
Supriya Sule का बयान क्यों अहम?
Supriya Sule का बयान इस वजह से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह विपक्षी खेमे के भीतर CJP आंदोलन की राजनीतिक व्याख्या को स्पष्ट करने की कोशिश करता है।
जहां कुछ वक्तव्यों में “सत्ता परिवर्तन” शब्द का इस्तेमाल हुआ, वहीं Sule ने स्पष्ट रूप से कहा कि मौजूदा आंदोलन का लक्ष्य सरकार गिराना नहीं है।
इससे BJP और विपक्ष के बीच चल रही बहस अब इस सवाल पर भी केंद्रित हो गई है कि विरोध प्रदर्शन का वास्तविक उद्देश्य क्या है।
CEC के इस्तीफे की मांग जारी
CJP से जुड़े प्रदर्शनकारी लंबे समय से मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
SIR और voter-list revision को लेकर भी विपक्ष तथा कई सामाजिक संगठनों ने सवाल उठाए हैं। Election Commission और BJP इन आरोपों के कई हिस्सों का विरोध करते रहे हैं और आयोग चुनावी सूची की समीक्षा को नियमित एवं आवश्यक प्रक्रिया बताता रहा है।
आगे और तेज हो सकती है बयानबाजी
Supriya Sule के बयान के बाद “regime change” बनाम “democratic protest” की बहस और तेज हो सकती है।
BJP जहां विपक्ष पर राजनीतिक अस्थिरता फैलाने का आरोप लगा रही है, वहीं विपक्षी नेता इसे चुनावी पारदर्शिता और जवाबदेही की लड़ाई बता रहे हैं। दोनों पक्षों के इन दावों को राजनीतिक बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।