'सत्ता परिवर्तन जरूर होगा'... प्रशांत भूषण के बयान पर BJP का पलटवार, जानिए क्या कहा

दिल्ली में CJP की प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रशांत भूषण ने सत्ता परिवर्तन की मांग को लोकतांत्रिक अधिकार बताया। भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने पलटवार करते हुए विपक्षी नेताओं पर लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाया।

Prashant Bhushan News: SIR विवाद के बीच प्रशांत भूषण ने सत्ता परिवर्तन को लेकर बड़ा बयान दिया। जानिए उनके आरोप, भाजपा का जवाब और CJP प्रदर्शन का मामला।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली | 15 अक्टूबर 2026

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दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रशांत भूषण ने सत्ता परिवर्तन की बात कही, जिस पर भाजपा ने पलटवार किया।

खबर में खास

  • वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि वे सत्ता परिवर्तन चाहते हैं और इसमें कुछ गलत नहीं है।
  • उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए।

  • भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने विपक्षी नेताओं पर लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाया।

  • SIR विवाद के बीच CJP ने 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस में तिरंगा प्रदर्शन का आह्वान किया।

'सत्ता परिवर्तन जरूर होगा'—प्रशांत भूषण ने क्या कहा?

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण के एक बयान से राजनीतिक बहस शुरू हो गई है।
गुरुवार, 15 अक्टूबर को दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रशांत भूषण ने कहा कि वे सत्ता परिवर्तन चाहते हैं और लोकतंत्र में इसकी मांग करना नागरिकों का अधिकार है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब भाजपा खुद सत्ता परिवर्तन के लिए आंदोलन कर चुकी है तो दूसरे लोग ऐसी मांग क्यों नहीं कर सकते?
भूषण ने कहा, "जरूर रिजीम चेंज होगी। हां, हम सब चाहते हैं कि रिजीम चेंज हो।"
उन्होंने सरकार पर विरोध प्रदर्शनों को दबाने का आरोप भी लगाया।
सरकार पर प्रदर्शनकारियों को पीटने का आरोप
प्रशांत भूषण ने दिल्ली में CJP और अन्य संगठनों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई की आलोचना की।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर आंदोलन करना चाहते थे, लेकिन उन्हें उपयुक्त स्थान देने के बजाय मध्य दिल्ली में बड़े पैमाने पर पाबंदियां लगाई गईं।
भूषण का दावा था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों और पत्रकारों के साथ मारपीट हुई।
उन्होंने कहा कि सरकार ने आंदोलन को दबाने की कोशिश की, लेकिन इससे लोगों का विरोध और बढ़ा है।
ये प्रशांत भूषण के आरोप हैं। संबंधित घटनाओं में पुलिस कार्रवाई की वैधता और दुर्व्यवहार के आरोपों से जुड़े मामले न्यायिक विचाराधीन हैं।

भाजपा ने किया पलटवार, गौरव भाटिया ने क्या कहा?

प्रशांत भूषण के बयान पर भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।
भाटिया ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, अभिजीत दीपके, नेहा बोरा, प्रकाश राज और प्रशांत भूषण एक साथ काम कर रहे हैं।
उनका दावा था कि इन नेताओं और कार्यकर्ताओं का उद्देश्य संविधान की मूल भावना को कमजोर करना और लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाना है।
हालांकि, यह भाजपा का राजनीतिक आरोप है। संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस या सरकार के विरोध में दिए गए बयान से अपने आप किसी गैरकानूनी साजिश की पुष्टि नहीं होती।
CJP नेताओं की हिरासत पर भी उठाए सवाल
प्रशांत भूषण ने CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका के खिलाफ हुई कार्रवाई का भी मुद्दा उठाया।
उन्होंने आरोप लगाया कि 12 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने पहुंचे दोनों नेताओं को गिरफ्तार करके न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
भूषण ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि अलग-अलग प्रदर्शनकारियों के मामलों में एक जैसे मानदंड लागू होने चाहिए।
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में CJP संस्थापक अभिजीत दीपके, छात्र नेता नेहा बोरा, वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिनेता प्रकाश राज भी मौजूद थे।

क्या सत्ता परिवर्तन की मांग करना अपराध है?

प्रशांत भूषण के बयान के बाद यह कानूनी सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है कि क्या किसी सरकार को बदलने की सार्वजनिक मांग करना अपराध माना जा सकता है।
भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण सभा के अधिकार को संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत संरक्षण प्राप्त है। हालांकि, इन अधिकारों पर कानून के अनुसार उचित प्रतिबंध भी लागू हो सकते हैं।
लोकतांत्रिक तरीकों से सरकार बदलने की मांग करना और हिंसा या गैरकानूनी गतिविधि की साजिश रचना अलग-अलग बातें हैं।
किसी व्यक्ति पर अपराध का आरोप लगाने के लिए उसके कथित आचरण और उपलब्ध सबूतों का कानूनी परीक्षण आवश्यक है।

16 अक्टूबर के तिरंगा प्रदर्शन पर भी नजर

इसी बीच अभिजीत दीपके ने 16 अक्टूबर की शाम 5 बजे दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में तिरंगा प्रदर्शन का आह्वान किया है।
इस प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हो चुकी है। दिल्ली पुलिस ने अदालत को भरोसा दिया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
अब प्रदर्शन का आयोजन और पुलिस की आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल प्रशांत भूषण के सत्ता परिवर्तन वाले बयान और भाजपा के पलटवार ने SIR तथा CJP आंदोलन से जुड़े राजनीतिक विवाद को एक नया मुद्दा दे दिया है।

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