महाराष्ट्र में BJP-शिवसेना गठबंधन में खींचतान! शिंदे के नेता ने शरद पवार के उम्मीदवार को दिया था समर्थन, बावनकुले बोले—पता करेंगे किसने साथ नहीं दिया
महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में महायुति को पांच में केवल दो सीटें मिलने के बाद सहयोगी दलों के बीच तालमेल पर सवाल उठे हैं। भाजपा नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने हार की जिम्मेदारी ली और गठबंधन सहयोगियों की भूमिका की समीक्षा की बात कही।
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Maharashtra Politics: नागपुर MLC सीट पर कांग्रेस की जीत के बाद भाजपा ने महायुति सहयोगियों के चुनाव प्रचार की समीक्षा करने का फैसला किया। शिवसेना नेता अब्दुल सत्तार ने शरद पवार गुट के उम्मीदवार को समर्थन देने की बात स्वीकार की। जानिए पूरा विवाद।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | मुंबई/नागपुर | 30 अक्टूबर 2026
खबर में खास
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महाराष्ट्र विधान परिषद की पांच सीटों में सत्तारूढ़ महायुति को दो और विपक्षी महाविकास आघाड़ी को तीन सीटें मिलीं।
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नागपुर में कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने भाजपा उम्मीदवार सुधाकर कोहाले को 3,271 वोटों से हराया।
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भाजपा नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने नागपुर की हार की जिम्मेदारी ली।
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भाजपा जाँच करेगी कि महायुति के किन सहयोगियों ने गठबंधन उम्मीदवारों के लिए प्रचार नहीं किया।
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शिवसेना के अब्दुल सत्तार ने छत्रपति संभाजीनगर में शरद पवार गुट के उम्मीदवार के समर्थन की बात स्वीकार की।
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गठबंधन टूटने या किसी सहयोगी दल को बाहर करने की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
मुंबई/नागपुर। महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव के नतीजों के बाद सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन में राजनीतिक मतभेद सामने आए हैं। भारतीय जनता पार्टी, एकनाथ शिंदे की शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के बीच चुनाव प्रचार में सहयोग को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
भाजपा के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने नागपुर स्नातक सीट पर पार्टी की हार की जिम्मेदारी स्वीकार की है। उन्होंने कहा कि पार्टी इसकी समीक्षा करेगी कि गठबंधन के किन सहयोगियों ने उम्मीदवारों के समर्थन में अपेक्षित काम किया और किन स्थानों पर तालमेल की कमी रही।
दूसरी ओर, शिवसेना नेता अब्दुल सत्तार ने स्वीकार किया कि उन्होंने छत्रपति संभाजीनगर में सत्तारूढ़ गठबंधन के बजाय शरद पवार गुट के उम्मीदवार का समर्थन किया था। यह घटनाक्रम महायुति के भीतर चुनावी सहयोग को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है।
नागपुर में भाजपा की हार, बावनकुले ने ली जिम्मेदारी
नागपुर स्नातक विधान परिषद सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत वंजारी ने भाजपा प्रत्याशी सुधाकर कोहाले को 3,271 मतों से हराया।
यह सीट राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि नागपुर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का गृह क्षेत्र है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मुख्यालय भी नागपुर में स्थित है।
इस चुनाव में भाजपा ने व्यापक प्रचार अभियान चलाया था। इसके बावजूद पार्टी उम्मीदवार को जीत नहीं मिली।
चुनाव प्रभारी रहे बावनकुले ने स्वीकार किया कि चुनावी तैयारियों में कुछ कमियाँ रह गई होंगी और पार्टी उन कारणों की समीक्षा करेगी।
महायुति में किसने नहीं दिया साथ? BJP करेगी समीक्षा
बावनकुले से जब पूछा गया कि क्या एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने भाजपा उम्मीदवारों का पर्याप्त समर्थन नहीं किया, तो उन्होंने सीधे आरोप लगाने के बजाय समीक्षा की बात कही।
उन्होंने कहा कि भाजपा यह पता लगाएगी कि गठबंधन के किस सहयोगी ने उम्मीदवारों के लिए काम नहीं किया।
इसके साथ ही यह भी जाँचा जाएगा कि राजनीतिक दलों के शीर्ष नेतृत्व की ओर से दिए गए निर्देशों का जमीनी स्तर पर पालन हुआ या नहीं।
बावनकुले के अनुसार, जिन नेताओं या कार्यकर्ताओं ने गठबंधन की सहमति के विरुद्ध काम किया होगा, उनकी पहचान कर उचित संगठनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
शिंदे के नेता ने शरद पवार गुट को क्यों दिया समर्थन?
महायुति के भीतर मतभेद का एक प्रमुख उदाहरण छत्रपति संभाजीनगर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र है।
इस सीट पर सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने सतीश चव्हाण को उम्मीदवार बनाया था। दूसरी ओर, शरद पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार डॉ. प्रतापसिंह पाटिल चुनाव मैदान में थे।
एकनाथ शिंदे की शिवसेना से जुड़े नेता अब्दुल सत्तार ने प्रतापसिंह पाटिल का समर्थन किया।
सत्तार ने उम्मीदवार चयन को लेकर असहमति जताई और कहा कि इस बार उन्होंने महायुति उम्मीदवार के लिए प्रचार नहीं किया।
इस सीट पर प्रतापसिंह पाटिल की जीत हुई। हालांकि, चुनाव परिणाम को केवल एक नेता के समर्थन या विरोध का परिणाम नहीं माना जा सकता।
पुणे में भी सहयोगी दल अलग-अलग खड़े दिखे
महायुति के भीतर चुनावी तालमेल को लेकर पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भी अलग स्थिति देखने को मिली।
यहाँ भाजपा ने अपना उम्मीदवार उतारा, जबकि शिंदे की शिवसेना ने एक निर्दलीय उम्मीदवार का समर्थन किया।
बावनकुले के अनुसार, इस सीट पर सहयोगी दलों के बीच दोस्ताना मुकाबले की स्थिति पहले से स्वीकार की गई थी।
भाजपा ने पुणे शिक्षक सीट पर जीत दर्ज की, लेकिन अन्य निर्वाचन क्षेत्रों में सहयोगियों के बीच तालमेल को लेकर उठे सवालों की समीक्षा करने का फैसला किया गया है।
पांच सीटों पर किसे कितनी जीत मिली?
महाराष्ट्र विधान परिषद की पाँच सीटों के परिणाम इस प्रकार रहे:
निर्वाचन क्षेत्र | विजेता दल |
|---|---|
नागपुर स्नातक | कांग्रेस |
पुणे स्नातक | NCP (शरद पवार गुट) |
छत्रपति संभाजीनगर स्नातक | NCP (शरद पवार गुट) |
पुणे शिक्षक | BJP |
अमरावती शिक्षक | शिवसेना (शिंदे गुट) |
इस प्रकार विपक्षी महाविकास आघाड़ी ने तीन सीटें और सत्तारूढ़ महायुति ने दो सीटें जीतीं।
क्या महायुति गठबंधन में कोई बड़ा फैसला होने वाला है?
चुनाव परिणामों के बाद भाजपा और उसके सहयोगियों के बीच संगठनात्मक समन्वय पर चर्चा शुरू हुई है।
भाजपा नेतृत्व ने यह स्पष्ट किया है कि समीक्षा का उद्देश्य हार के कारणों को समझना है। पार्टी यह भी देखेगी कि किसी नेता ने राजनीतिक सहमति के विरुद्ध काम किया या नहीं।
हालांकि, अब तक उपलब्ध रिपोर्टों में महायुति के टूटने, किसी सहयोगी दल को बाहर करने या सरकार में बदलाव की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
फिलहाल महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ गठबंधन की समीक्षा प्रक्रिया और उसके निष्कर्षों पर राजनीतिक नजर रहेगी।
प्रत्यक्षदर्शी का सवाल: जब एक ही सरकार में शामिल दल चुनाव में एक-दूसरे के विरोधी उम्मीदवारों का समर्थन करें, तो क्या गठबंधन नेतृत्व को सीटों के बंटवारे और चुनाव प्रचार के स्पष्ट नियम निर्धारित करने चाहिए?
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