UP MLC Election: वोटिंग से पहले BJP ने ही उठाए वोटर लिस्ट पर सवाल! 4,397 नाम डुप्लीकेट होने का दावा
उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव से पहले इलाहाबाद-झांसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची विवादों में है। भाजपा ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी से शिकायत करते हुए 4,397 नाम दोहराए जाने का दावा किया है। सबसे अधिक 3,163 नाम प्रयागराज में बताए गए हैं।
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23 अक्टूबर को होने वाले यूपी MLC चुनाव से पहले भाजपा ने इलाहाबाद-झांसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की वोटर लिस्ट में 4,397 डुप्लीकेट नाम होने का दावा किया है। सबसे ज्यादा 3,163 नाम प्रयागराज में बताए गए हैं।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | प्रयागराज | 21 अक्टूबर 2026
उत्तर प्रदेश में 23 अक्टूबर को होने वाले विधान परिषद चुनाव से पहले मतदाता सूची को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। इस बार सवाल खुद भारतीय जनता पार्टी की ओर से उठाए गए हैं। भाजपा के चुनाव आयोग संपर्क विभाग ने इलाहाबाद-झांसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में 4,397 नाम दोहराए जाने का दावा करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखा है।
पार्टी ने आरोप लगाया है कि कई मतदाताओं के नाम एक से अधिक बार दर्ज हैं। कुछ नामों की पात्रता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि निर्वाचन अधिकारियों की ओर से इन सभी नामों को फर्जी घोषित किए जाने की पुष्टि नहीं हुई है।
खबर में खास
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भाजपा ने 4,397 डुप्लीकेट मतदाता प्रविष्टियाँ होने का दावा किया।
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प्रयागराज में सबसे ज्यादा 3,163 नाम दोहराए जाने की शिकायत।
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कम उम्र और स्नातक योग्यता की अवधि को लेकर भी सवाल।
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23 अक्टूबर को मतदान; चुनाव से पहले जाँच और कार्रवाई की मांग।
आखिर भाजपा को मतदाता सूची में क्या गड़बड़ी मिली?
भाजपा के चुनाव आयोग संपर्क विभाग के प्रदेश संयोजक अखिलेश कुमार अवस्थी ने शिकायत में कहा कि इलाहाबाद-झांसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सूची में कथित तौर पर ऐसे नाम शामिल हैं, जिन्हें दो या तीन बार दर्ज किया गया है।
पार्टी का आरोप है कि कुछ प्रभावशाली लोगों ने मतदाता सूची में नाम दोहरवाए। भाजपा ने ऐसे नामों की जाँच कराने और अपात्र पाए जाने वाले मतदाताओं को मतदान से रोकने की मांग की है।
प्रयागराज में सबसे ज्यादा नाम, बाकी जिलों का क्या हाल?
शिकायत में दिए गए आँकड़ों के अनुसार प्रयागराज में 3,163, कौशांबी में 320, जालौन में 179 और झांसी में 178 डुप्लीकेट प्रविष्टियाँ होने का दावा है।
इसके अलावा बांदा में 140, फतेहपुर में 139, ललितपुर में 109, हमीरपुर में 81, चित्रकूट में 68 और महोबा में 20 नाम दोहराए जाने की बात कही गई है।
ये सभी आँकड़े भाजपा के शिकायती पत्र पर आधारित हैं, स्वतंत्र रूप से सत्यापित अंतिम मतदाता सूची के निष्कर्ष नहीं।
कम उम्र के मतदाताओं पर भी सवाल
भाजपा ने कुछ मतदाताओं की जन्मतिथि पर आपत्ति जताते हुए उनकी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में मतदान करने की पात्रता जाँचने को कहा है।
हालांकि यहाँ एक महत्वपूर्ण कानूनी अंतर है। स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में मतदान की पात्रता सिर्फ उम्र से तय नहीं होती। चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार संबंधित व्यक्ति निर्धारित योग्यता तिथि से कम-से-कम तीन वर्ष पहले स्नातक या समकक्ष योग्यता प्राप्त कर चुका होना चाहिए और निर्वाचन क्षेत्र का सामान्य निवासी होना चाहिए।
इसलिए प्रत्येक आपत्तिजनक नाम के मामले में जन्मतिथि के साथ स्नातक उत्तीर्ण करने की तारीख की जाँच भी जरूरी होगी।
