महाराष्ट्र की राजनीति में फडणवीस और दोनों ठाकरे एक मंच पर! CM बोले—'2019 के बाद उद्धव ने बुलाया ही नहीं', राज ठाकरे ने 2029 को लेकर कसा तंज

मुंबई में देवेंद्र फडणवीस, उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने एक ही मंच पर राजनीतिक कटाक्ष किए। राज ठाकरे ने फडणवीस के 2029 तक मुख्यमंत्री बने रहने पर चुटकी ली, तो मुख्यमंत्री ने 2019 के बाद उद्धव से निमंत्रण नहीं मिलने की बात कही।

Maharashtra Politics: मुंबई में देवेंद्र फडणवीस, उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एक साथ दिखाई दिए। 2019 में भाजपा-शिवसेना गठबंधन टूटने के बाद फडणवीस ने पुरानी राजनीतिक दूरी पर चुटकी ली। जानिए तीनों नेताओं ने क्या कहा।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | मुंबई | 30 अक्टूबर 2026
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मुंबई में 29 अक्टूबर 2026 के पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में देवेंद्र फडणवीस, उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे साथ दिखाई दिए।

खबर में खास

  • मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे 29 अक्टूबर की शाम एक मंच पर आए।
  • फडणवीस ने कहा कि 2019 के बाद उद्धव ठाकरे ने उन्हें किसी कार्यक्रम में नहीं बुलाया।

  • राज ठाकरे ने 2029 तक फडणवीस के मुख्यमंत्री रहने को लेकर मजाकिया टिप्पणी की।

  • मुख्यमंत्री ने राज ठाकरे के कार्टून और उद्धव ठाकरे के फोटोग्राफी कौशल का उल्लेख करते हुए राजनीतिक कटाक्ष किया।

  • यह मुलाकात पुस्तक विमोचन के दौरान हुई थी; किसी नए राजनीतिक गठबंधन की घोषणा नहीं हुई।
मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में लंबे समय से अलग-अलग खेमों में खड़े तीन प्रमुख नेता एक ही मंच पर दिखाई दिए। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) अध्यक्ष राज ठाकरे ने गुरुवार, 29 अक्टूबर की शाम मुंबई के दादर में आयोजित कार्यक्रम में एक-दूसरे से बातचीत की और राजनीतिक कटाक्ष भी किए।
कार्यक्रम कार्टूनिस्ट प्रशांत कुलकर्णी की पुस्तक महाराष्ट्राची हास्यरेषा के विमोचन का था। लेकिन तीनों नेताओं के बीच हुए राजनीतिक संवाद की शुक्रवार को काफी चर्चा हुई।

फडणवीस ने याद दिलाई 2019 की राजनीतिक दूरी

मुख्यमंत्री फडणवीस ने अपने संबोधन में उद्धव ठाकरे से पुराने संबंधों का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 तक उद्धव ठाकरे उन्हें जब भी बुलाते थे, वह कार्यक्रम में जाते थे। लेकिन उसके बाद उद्धव ने उन्हें नहीं बुलाया और वह निमंत्रण का इंतजार करते रहे।
उनकी इस टिप्पणी के पीछे 2019 का महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम भी है।
उस वर्ष महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद और सत्ता-साझेदारी को लेकर भाजपा तथा तत्कालीन अविभाजित शिवसेना के बीच विवाद हुआ था। इसके बाद दोनों दलों का पुराना गठबंधन टूट गया था।

राज ठाकरे ने 2029 को लेकर क्या कहा?

कार्यक्रम में महाराष्ट्र के संस्कृति मंत्री आशीष शेलार ने मुख्यमंत्री द्वारा राज ठाकरे का निमंत्रण स्वीकार किए जाने की तारीफ की।
इस पर राज ठाकरे ने मजाकिया अंदाज में कहा कि वह फडणवीस को आगे भी कार्यक्रमों में बुलाते रहेंगे, लेकिन शेलार यह सुनिश्चित करें कि फडणवीस 2029 तक मुख्यमंत्री बने रहें।
राज ठाकरे की टिप्पणी के बाद कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच हंसी का माहौल बन गया।
यह टिप्पणी राजनीतिक व्यंग्य थी, न कि भविष्य के चुनाव परिणाम या किसी गठबंधन का औपचारिक संकेत।

फडणवीस बोले—राज कार्टून बनाएं, उद्धव फोटोग्राफी करें

मुख्यमंत्री ने राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे की रचनात्मक रुचियों का भी जिक्र किया।
उन्होंने राज ठाकरे को अच्छा कार्टूनिस्ट और उद्धव ठाकरे को कुशल फोटोग्राफर बताते हुए मजाक में कहा कि दोनों अपने-अपने काम पर ध्यान दें और राजनीति उन्हें संभालने दें।
फडणवीस ने मंच की व्यवस्था पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि बाकी नेता बाईं ओर से बोल रहे थे, इसलिए वह दाईं ओर आ गए।
इस हल्के-फुल्के राजनीतिक संवाद के दौरान तीनों नेताओं के बीच किसी औपचारिक राजनीतिक समझौते की घोषणा नहीं हुई।

क्या महाराष्ट्र में नए राजनीतिक समीकरण बन रहे हैं?

तीनों नेताओं का साथ दिखाई देना चर्चा का विषय जरूर बना है, लेकिन कार्यक्रम का उद्देश्य राजनीतिक गठबंधन बनाना नहीं था।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र में अलग-अलग दलों के नेताओं का सार्वजनिक कार्यक्रमों में मिलना और बातचीत करना सामान्य राजनीतिक परंपरा का हिस्सा है।
राज ठाकरे ने भी कहा कि कला और संस्कृति के कुछ मंच ऐसे होते हैं, जहाँ राजनीतिक मतभेदों को अलग रखकर लोग एक साथ आते हैं।
इन बयानों से यह स्पष्ट होता है कि नेताओं ने कार्यक्रम को राजनीतिक बातचीत से अलग सांस्कृतिक अवसर के रूप में भी प्रस्तुत किया।

कार्टूनिस्टों के लिए नई गैलरी का प्रस्ताव

मुख्यमंत्री ने मुंबई में कार्टूनिस्टों के काम को प्रदर्शित करने के लिए एक विशेष गैलरी विकसित करने की इच्छा भी जताई।
उन्होंने इस पहल में उद्धव और राज ठाकरे का सहयोग लेने की बात कही।
हालांकि, गैलरी की स्थापना का अंतिम सरकारी आदेश, बजट या निर्माण समयसीमा इन रिपोर्टों में सामने नहीं आई है।

2019 के बाद रिश्तों की राजनीतिक अहमियत

महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना का लंबे समय तक गठबंधन रहा है। वर्ष 2019 के बाद दोनों दलों के संबंधों में बड़ा बदलाव आया।
शिवसेना में बाद में विभाजन हुआ और उद्धव ठाकरे ने अपने अलग राजनीतिक संगठन का नेतृत्व जारी रखा।
राज ठाकरे की MNS की भी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान है।
ऐसे में तीनों नेताओं का सार्वजनिक रूप से साथ दिखना और 2019 का उल्लेख करना राजनीतिक दृष्टि से उल्लेखनीय है। लेकिन केवल मंच साझा करने से उनके बीच भविष्य के चुनावी समझौते का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
प्रत्यक्षदर्शी का सवाल: क्या राजनीतिक मतभेदों के बावजूद विरोधी दलों के नेताओं के बीच ऐसा सार्वजनिक संवाद लोकतांत्रिक राजनीति के लिए उपयोगी हो सकता है?

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