SIR विवाद के बीच CEC ज्ञानेश कुमार पर ₹2 करोड़ की रिश्वत मांगने का आरोप! केरल ने दिए विजिलेंस जांच के आदेश

करीब 20 साल पुराने सड़क निर्माण मामले में पूर्व ठेकेदार ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर आरोप लगाए। ₹17 करोड़ के बिल, मलेशियाई इंजीनियर की मौत और पुरानी जांच पर फिर उठे सवाल।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर ₹2 करोड़ की रिश्वत मांगने के पुराने आरोपों की केरल में विजिलेंस जांच के निर्देश दिए गए हैं। जानिए ₹17 करोड़ के बिल, इंजीनियर की मौत और पहले की जांच से जुड़ा पूरा विवाद।

तिरुवनंतपुरम/नई दिल्ली | 4 नवंबर 2026 | प्रत्यक्षदर्शी समाचार
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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर केरल की एक पुरानी सड़क निर्माण परियोजना में ₹2 करोड़ की रिश्वत मांगने के आरोपों की विजिलेंस जांच के निर्देश दिए गए हैं।
देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्ष के निशाने पर रहे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़ा एक नया घटनाक्रम सामने आया है। केरल सरकार ने करीब 20 साल पुराने सड़क निर्माण प्रोजेक्ट में उन पर ₹2 करोड़ की रिश्वत मांगने के आरोपों की सतर्कता जांच के निर्देश दिए हैं। गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने कानूनी राय मिलने के बाद यह कदम उठाया। हालांकि, आरोप अभी तक साबित नहीं हुए हैं।

खबर में खास

  • मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नए आरोपों की जांच के निर्देश।
  • पूर्व ठेकेदार का आरोप—₹17 करोड़ के बिल जारी करने के बदले ₹2 करोड़ की रिश्वत मांगी गई।
  • मामला 2006 में एक मलेशियाई इंजीनियर की मौत से भी जुड़ा है।
  • पहले की विजिलेंस जांच में आरोप साबित नहीं हुए थे।
  • SIR विवाद के बीच नया जांच आदेश सामने आया है।

₹17 करोड़ के बिल और ₹2 करोड़ की रिश्वत का क्या मामला है?

केरल के कोल्लम जिले के चदयामंगलम निवासी पूर्व ठेकेदार साजन ने सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (VACB) में शिकायत दी है।
उनका आरोप है कि जब ज्ञानेश कुमार केरल के लोक निर्माण विभाग (PWD) में सचिव थे, तब केरल राज्य परिवहन परियोजना (KSTP) के तहत कार्य करने वाली कंपनी PATI-BEL के लगभग ₹17 करोड़ के बिलों का भुगतान रोका गया था।
साजन का दावा है कि कंपनी के मलेशियाई प्रोजेक्ट इंजीनियर ली सी बीन ने उन्हें बताया था कि भुगतान जारी करने के बदले ₹2 करोड़ की रिश्वत मांगी गई है।
यह शिकायतकर्ता द्वारा बताया गया आरोप है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

मलेशियाई इंजीनियर की मौत से क्या संबंध?

ली सी बीन की वर्ष 2006 में मलेशिया में आत्महत्या से मौत हुई थी।
शिकायतकर्ता का दावा है कि भुगतान में देरी और कथित रिश्वत की मांग से इंजीनियर पर वित्तीय दबाव बढ़ा था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पहले की जांच में महत्वपूर्ण गवाहों के बयान नहीं लिए गए।
हालांकि, इंजीनियर की मौत और कथित रिश्वत मांगने के बीच किसी संबंध का स्थापित न्यायिक या जांच निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

पहले की जांच में क्या मिला था?

इस मामले से जुड़े आरोपों पर करीब दो दशक पहले भी विजिलेंस जांच हुई थी।
उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उस जांच में आरोपों की पुष्टि नहीं हुई और बाद में मामला बंद कर दिया गया।
अब नए शिकायतकर्ता ने जांच प्रक्रिया की पूर्णता पर सवाल उठाए हैं। नई जांच में यह भी देखा जा सकता है कि पुराने मामले में जरूरी गवाहों और दस्तावेजों की पर्याप्त पड़ताल हुई थी या नहीं।

केरल सरकार ने अब क्या फैसला लिया?

केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने नए आरोपों की प्रारंभिक सतर्कता जांच के निर्देश दिए हैं।
इससे पहले अक्टूबर में कांग्रेस से जुड़े एक नेता की शिकायत पर भी संबंधित परियोजना की जांच के निर्देश दिए गए थे।
नई शिकायत मिलने के बाद कानूनी राय ली गई। इसके बाद मामले की आगे जांच का रास्ता खुला है।
हालांकि, जांच के आदेश का अर्थ यह नहीं है कि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ रिश्वत का आरोप साबित हो गया है।

SIR विवाद के बीच क्यों बढ़ा राजनीतिक महत्व?

ज्ञानेश कुमार पहले से मतदाता सूची के SIR को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की आलोचना का सामना कर रहे हैं।
विपक्ष ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठाए हैं। चुनाव आयोग का पक्ष रहा है कि पुनरीक्षण का उद्देश्य मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करना है।
ऐसे समय में केरल का नया जांच आदेश सार्वजनिक हुआ है। हालांकि, पुराने सड़क निर्माण मामले और मौजूदा SIR विवाद के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध का प्रमाण सामने नहीं आया है।

क्या बोले ज्ञानेश कुमार?

चार नवंबर की सुबह तक उपलब्ध रिपोर्टों में ज्ञानेश कुमार की ओर से नए आरोपों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं मिली थी।
अब जांच एजेंसी की कार्रवाई, दस्तावेजों और संबंधित पक्षों के बयानों से आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस समय मामला आरोपों और जांच का है, सिद्ध भ्रष्टाचार का नहीं।

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