संसद के मानसून सत्र पर नया विवाद, Kharge के पत्र पर Rijiju का जवाब- कोई तय समयसीमा नहीं
Mallikarjun Kharge ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर मानसून सत्र को औपचारिक रूप से prorogue करने में देरी पर सवाल उठाए थे। अब Kiren Rijiju ने कहा है कि इसके लिए संविधान या नियमों में कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं है।
संसद के मानसून सत्र को औपचारिक रूप से समाप्त यानी prorogue करने में हुई देरी को लेकर नया राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सवाल उठाए, जिस पर संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju ने कहा कि prorogation के लिए कोई निश्चित समयसीमा निर्धारित नहीं है।
संसद के मानसून सत्र पर नया विवाद, Kharge के पत्र पर Rijiju का जवाब- कोई तय समयसीमा नहीं
Mallikarjun Kharge द्वारा मानसून सत्र को औपचारिक रूप से prorogue करने में देरी पर सवाल उठाए जाने के बाद Kiren Rijiju ने कहा कि प्रक्रिया के लिए कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं है।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली | 19 अक्टूबर 2026
संसद के मानसून सत्र को औपचारिक रूप से समाप्त करने यानी prorogue करने में हुई देरी को लेकर कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।
कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष Mallikarjun Kharge ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सवाल उठाया था कि संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त को खत्म हो गया, लेकिन इसे अब तक औपचारिक रूप से prorogue क्यों नहीं किया गया।
अब केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju ने Kharge के सवाल का जवाब देते हुए कहा है कि किसी संसदीय सत्र को prorogue करने के लिए नियमों में कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं की गई है।
खबर में खास
संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त 2026 को खत्म हुआ था।
औपचारिक prorogation को लेकर Kharge ने PM Modi को पत्र लिखा।
Kharge ने देरी को असामान्य बताते हुए सवाल उठाए।
Kiren Rijiju ने कहा- इसके लिए कोई तय समयसीमा नहीं है।
संसद के अगले सत्र और सरकार की संभावित रणनीति को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हुई।
Kharge ने PM Modi से क्या पूछा?
Mallikarjun Kharge ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में मानसून सत्र को formally prorogue करने में हो रही देरी पर चिंता जताई।
उनका सवाल था कि जब संसद की कार्यवाही 13 अगस्त को समाप्त हो चुकी है तो सत्र को औपचारिक रूप से समाप्त करने की प्रक्रिया अभी तक पूरी क्यों नहीं की गई।
Kharge ने इस देरी को असामान्य बताया और सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
Rijiju ने क्या जवाब दिया?
केंद्रीय मंत्री Kiren Rijiju ने Kharge की आपत्ति का जवाब देते हुए कहा कि संसद के किसी सत्र को prorogue करने के लिए कोई specific period prescribed नहीं है।
उनके मुताबिक सत्र की बैठकें खत्म होने और औपचारिक prorogation के बीच कितना समय होना चाहिए, इसे लेकर कोई निश्चित संवैधानिक समयसीमा नहीं है।
इसलिए सरकार की ओर से इसे नियमों का उल्लंघन मानने से इनकार किया गया है।
Adjournment और Prorogation में क्या अंतर है?
संसद की कार्यवाही खत्म होने के बाद दो अलग प्रक्रियाएं होती हैं।
जब लोकसभा या राज्यसभा की बैठक किसी निश्चित समय या तारीख तक रोक दी जाती है, उसे adjournment कहा जाता है।
जब पूरे संसदीय सत्र को राष्ट्रपति की ओर से औपचारिक रूप से समाप्त किया जाता है, उसे prorogation कहा जाता है।
यानी सदन की बैठकों का खत्म होना और पूरे session का formally समाप्त होना एक ही चीज नहीं है।
आपकी वेबसाइट पर पहले भी आया था इसका संकेत
Pratyakshdarshi Samachar ने 16 अक्टूबर को महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़ी खबर में भी यह तथ्य रिपोर्ट किया था कि मानसून सत्र 13 अगस्त को खत्म होने के बावजूद उसे formally prorogue नहीं किया गया था। Pratyakshdarshi Samachar
अब Kharge के पत्र और Rijiju के जवाब के बाद वही procedural issue सीधे राजनीतिक विवाद में बदल गया है।
क्या सरकार फिर संसद बुला सकती है?
जब तक किसी session को prorogue नहीं किया जाता, उसी session के तहत दोबारा बैठक बुलाने की संवैधानिक संभावना बनी रह सकती है।
यही वजह है कि विपक्ष इस देरी को लेकर राजनीतिक सवाल उठा रहा है।
हालांकि सरकार ने अभी इस आधार पर किसी विशेष बैठक या agenda की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। इसलिए किसी संभावित special sitting को अभी confirmed नहीं माना जाना चाहिए।
मामला राजनीतिक रूप से क्यों अहम है?
यह विवाद सिर्फ technical parliamentary procedure तक सीमित नहीं है।
संसद में आने वाले समय में महिला आरक्षण, परिसीमन और दूसरे बड़े legislative issues पर चर्चा की संभावनाएं बनी हुई हैं।
इसी वजह से मानसून सत्र की formal status पर विपक्ष और सरकार के बीच हुई यह बहस आगे भी राजनीतिक महत्व रख सकती है।