‘अखिलेश कुत्ते के गले में घंटी बांध दें तो भी उसी को वोट देना’: SP MLC लाल बिहारी यादव का VIDEO वायरल, BJP ने मांगी माफी

आजमगढ़ के नेहरू हॉल में शिक्षक गोष्ठी के दौरान विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव ने पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में एकजुट मतदान की अपील करते हुए दिया बयान; भाजपा नेता जयनाथ सिंह ने इसे लोकतंत्र और मतदाताओं का अपमान बताया

आजमगढ़ में अखिलेश यादव के उम्मीदवार को वोट देने को लेकर विवादित बयान देते सपा MLC लाल बिहारी यादव

आजमगढ़ में सपा MLC लाल बिहारी यादव का एक बयान वायरल है। शिक्षकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव ‘कुत्ते के गले में भी घंटी बांधकर भेज दें’ तो सभी को उसी को वोट देना है। BJP ने बयान पर आपत्ति जताते हुए सार्वजनिक माफी की मांग की है।

आजमगढ़। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सियासी बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। अब समाजवादी पार्टी के MLC और विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव का एक बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। शिक्षकों से पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में एकजुट होकर मतदान करने की अपील करते हुए लाल बिहारी यादव ने ऐसी तुलना कर दी, जिस पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।

वायरल वीडियो में लाल बिहारी यादव कहते सुनाई देते हैं कि अगर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव किसी कुत्ते के गले में भी घंटी बांधकर भेज दें, तो भी सभी को उसी को वोट देना है।

उनके बयान का आशय पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों से अखिलेश यादव द्वारा चुने गए प्रत्याशी के पक्ष में एकजुट रहने की अपील से था, लेकिन इस्तेमाल की गई तुलना अब खुद एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गई है।

कहां दिया गया लाल बिहारी यादव ने यह बयान?

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आजमगढ़ की शिक्षक गोष्ठी में सपा MLC लाल बिहारी यादव ने अखिलेश यादव द्वारा चुने गए प्रत्याशी के पक्ष में एकजुट मतदान की अपील करते हुए विवादित तुलना की।

यह बयान 30 अगस्त 2026 को आजमगढ़ के नेहरू हॉल में आयोजित एक शैक्षिक विचार गोष्ठी के दौरान दिया गया।

कार्यक्रम आगामी गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक MLC चुनाव में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी कमलेश यादव के समर्थन में आयोजित किया गया था। स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार कार्यक्रम में शिक्षकों को पार्टी के पक्ष में एकजुट करने और चुनावी रणनीति पर चर्चा की गई।

कार्यक्रम में आजमगढ़ से सपा सांसद धर्मेंद्र यादव समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता, सांसद और विधायक भी मौजूद थे।

यानी यह कोई सामान्य निजी बातचीत नहीं बल्कि पार्टी के चुनावी कार्यक्रम के मंच से दिया गया बयान था।

लाल बिहारी यादव ने आखिर क्या कहा?

शिक्षकों को संबोधित करते हुए लाल बिहारी यादव ने पार्टी के प्रति एकजुटता पर जोर दिया।

इसी दौरान उन्होंने कहा कि यदि अखिलेश यादव किसी को भी पार्टी की ओर से चुनाव में उतारें तो सभी को उसी के पक्ष में मतदान करना चाहिए।

इसके बाद उन्होंने विवादित उदाहरण देते हुए कहा कि अखिलेश यादव अगर “कुत्ते के गले में भी घंटी बांधकर” भेज दें तो भी वोट उसी को देना है।

वीडियो सामने आते ही यह हिस्सा सोशल मीडिया पर तेजी से फैलने लगा।

क्या लाल बिहारी यादव किसी SP उम्मीदवार को ‘कुत्ता’ कह रहे थे?

सीधे तौर पर ऐसा निष्कर्ष निकालना ठीक नहीं होगा।

वीडियो के संदर्भ में लाल बिहारी यादव किसी विशेष प्रत्याशी को “कुत्ता” कहते नहीं सुनाई देते।

उनका बयान एक अतिशयोक्तिपूर्ण उदाहरण के रूप में दिया गया दिखाई देता है, जिसके जरिए वह यह संदेश देना चाह रहे थे कि अखिलेश यादव जिसे भी उम्मीदवार बनाएं, पार्टी समर्थकों को एकजुट होकर उसी को वोट देना चाहिए।

लेकिन इसी तुलना की भाषा पर अब विवाद हो रहा है।

इसलिए headline में:

“SP MLC ने प्रत्याशी को कुत्ता कहा”

न लिखें।

यह वीडियो में कही गई बात से आगे का निष्कर्ष होगा।

सही framing है:

“अखिलेश जिसे उम्मीदवार बनाएं, उसे वोट देने की अपील करते हुए विवादित ‘कुत्ते के गले में घंटी’ वाली तुलना की।”

BJP ने क्या कहा?

बयान वायरल होने के बाद भाजपा ने समाजवादी पार्टी पर पलटवार किया है।

ABP की रिपोर्ट के मुताबिक BJP नेता जयनाथ सिंह ने लाल बिहारी यादव के बयान को लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनता के सम्मान के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता अपने मताधिकार से जनप्रतिनिधि चुनती है और किसी पार्टी द्वारा प्रत्याशी घोषित करने का अर्थ यह नहीं है कि मतदाता आंख बंद करके उसे वोट करें।

भाजपा नेता ने लाल बिहारी यादव से अपने बयान पर विचार करने और आजमगढ़ की जनता तथा सर्व समाज से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।

उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि अगर पार्टी किसी व्यक्ति को चुनाव में टिकट देती है तो क्या उस प्रत्याशी के बारे में भी इसी तुलना को स्वीकार किया जा सकता है?

यानी BJP इस बयान को अब party loyalty बनाम voter choice की बहस में बदल रही है।

लाल बिहारी यादव कौन हैं?

लाल बिहारी यादव समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और वाराणसी खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद सदस्य हैं।

उत्तर प्रदेश विधान परिषद की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार वह समाजवादी पार्टी से MLC हैं। उनका जन्म 1 जुलाई 1960 को हुआ और उनकी शैक्षणिक योग्यता BA और BEd दर्ज है।

वर्ष 2024 में समाजवादी पार्टी ने उन्हें उत्तर प्रदेश विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी दी थी।

यही वजह है कि उनका बयान किसी सामान्य कार्यकर्ता के बयान की तुलना में ज्यादा राजनीतिक महत्व रखता है।

2020 में शिक्षक MLC चुनाव जीत चुके हैं लाल बिहारी

लाल बिहारी यादव शिक्षक राजनीति से जुड़े नेता हैं।

वर्ष 2020 के उत्तर प्रदेश विधान परिषद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में उन्होंने वाराणसी शिक्षक सीट से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की थी। उस चुनाव में BJP ने वाराणसी शिक्षक सीट पर उम्मीदवार नहीं उतारा था।

अब जिस कार्यक्रम में उनका मौजूदा बयान सामने आया, वह भी शिक्षक MLC चुनाव से ही जुड़ा हुआ था।

इसलिए यह बयान सीधे उस मतदाता वर्ग के सामने आया जो आगामी शिक्षक चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला है।

2027 के चुनाव से क्यों जुड़ रहा मामला?

समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए लगातार संगठनात्मक बैठकों और अलग-अलग वर्गों के सम्मेलन कर रही है।

आजमगढ़ की इस शिक्षक गोष्ठी का तात्कालिक उद्देश्य भले शिक्षक MLC चुनाव रहा हो, लेकिन अलग-अलग रिपोर्टों में इसे 2027 की चुनावी तैयारी और शिक्षकों को पार्टी के पक्ष में लामबंद करने की रणनीति से भी जोड़ा गया है।

ऐसे में लाल बिहारी यादव की यह लाइन अब विपक्षियों को एक नया सवाल देने वाली है:

क्या पार्टी उम्मीदवार के चयन के बाद मतदाता को केवल पार्टी नेतृत्व के फैसले पर वोट देना चाहिए, या प्रत्याशी की योग्यता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है?

यही angle आपकी story में comments भी ला सकता है।

आजमगढ़ सपा के लिए क्यों महत्वपूर्ण?

आजमगढ़ समाजवादी पार्टी का महत्वपूर्ण राजनीतिक क्षेत्र रहा है।

वर्तमान उत्तर प्रदेश विधानसभा की आधिकारिक सदस्य सूची में आजमगढ़ जिले की कई विधानसभा सीटों पर समाजवादी पार्टी के विधायक दर्ज हैं—जिनमें अतरौलिया, गोपालपुर, सगड़ी, मुबारकपुर, आजमगढ़, निजामाबाद, फूलपुर-पवई, दीदारगंज, लालगंज और मेहनगर शामिल हैं।

2025 में अखिलेश यादव ने आजमगढ़ में पार्टी कार्यालय और नए भवन के उद्घाटन के दौरान भी 2027 के चुनाव में PDA के प्रदर्शन को लेकर बड़ा दावा किया था।

इसलिए आजमगढ़ में पार्टी के किसी वरिष्ठ नेता का चुनावी मंच से दिया बयान स्वाभाविक रूप से ज्यादा राजनीतिक attention खींचता है।

बयान में छिपा असली राजनीतिक संदेश क्या था?

अगर वायरल शब्दों से आगे पूरे context को देखें तो लाल बिहारी यादव की बात का केंद्रीय संदेश था:

उम्मीदवार कोई भी हो, अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी के फैसले के पीछे कार्यकर्ताओं को एकजुट रहना चाहिए।

यह party discipline और consolidated voting की appeal थी।

लेकिन राजनीतिक संचार में उदाहरण का चुनाव भी महत्वपूर्ण होता है।

“कुत्ते के गले में घंटी” वाली तुलना इतनी तीखी थी कि party unity का संदेश पीछे चला गया और पूरा विमर्श इसी एक line पर टिक गया।

यही वजह है कि वीडियो के viral होने के बाद चर्चा अब शिक्षक MLC चुनाव से ज्यादा बयान की भाषा पर हो रही है।

क्या Akhilesh Yadav ने प्रतिक्रिया दी?

फिलहाल उपलब्ध ताजा विश्वसनीय रिपोर्टों में अखिलेश यादव की इस specific बयान पर कोई स्पष्ट सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

इसलिए:

“अखिलेश ने लाल बिहारी को फटकार लगाई”

या

“अखिलेश ने बयान का समर्थन किया”

जैसी कोई line अभी न लिखें।

अगर समाजवादी पार्टी या अखिलेश यादव की आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है तो इसी URL को update करें।

यह अगले update का सबसे मजबूत angle हो सकता है।

क्या लाल बिहारी यादव ने माफी मांगी?

फिलहाल उपलब्ध प्रमुख रिपोर्टों में उनके द्वारा इस बयान पर सार्वजनिक माफी मांगने या बयान वापस लेने की पुष्टि नहीं मिली है।

BJP ने जरूर उनसे सार्वजनिक माफी की मांग की है।

इसलिए यह मामला अभी खुला हुआ है।

अब नजर इस पर होगी कि:

लाल बिहारी यादव सफाई देते हैं या नहीं,
समाजवादी पार्टी आधिकारिक प्रतिक्रिया देती है या नहीं,
और BJP इस बयान को 2027 के चुनावी प्रचार में कितना बड़ा मुद्दा बनाती है।

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