संभल में 53 साल बाद पलटा जमीन का रिकॉर्ड, आर्य समाज मंदिर के नाम दर्ज होंगे करोड़ों के भूखंड; जानिए मकानों और मजार का क्या होगा
SDM कोर्ट ने पुराने राजस्व और चकबंदी अभिलेखों के आधार पर 11 लोगों के नाम निरस्त करने का दिया आदेश; जमीन पर बने 10 पक्के मकानों और एक मजार पर कार्रवाई की तैयारी
संभल के शेर खां सराय में करीब 53 वर्षों से चले आ रहे जमीन विवाद में SDM कोर्ट ने गाटा संख्या 103, 106 और 107 के रिकॉर्ड में ‘मंदिर आर्य समाज एवं ग्राम समाज’ का नाम दर्ज करने का आदेश दिया है। जमीन पर बने मकानों और मजार को लेकर अब बेदखली की कानूनी प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
संभल। उत्तर प्रदेश के संभल में करीब 53 वर्षों से चले आ रहे जमीन विवाद में SDM कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। सदर एसडीएम विकास चंद्र की अदालत ने शेर खां सराय क्षेत्र में स्थित तीन भूखंडों के राजस्व रिकॉर्ड को पुराने अभिलेखों के अनुसार दुरुस्त करने और उनमें ‘मंदिर आर्य समाज एवं ग्राम समाज’ का नाम दर्ज करने का आदेश दिया है।
आदेश के बाद जमीन पर बने करीब 10 पक्के मकानों और एक मजार को लेकर भी कार्रवाई की चर्चा तेज हो गई है। प्रशासन का कहना है कि पहले नियमानुसार नोटिस और बेदखली की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। संबंधित लोगों द्वारा जमीन खाली नहीं करने पर आगे ध्वस्तीकरण की कार्रवाई हो सकती है।
किन भूखंडों को लेकर चल रहा था विवाद?
यह मामला संभल तहसील के शेर खां सराय, बाहर चुंगी इलाके में स्थित गाटा संख्या 103, 106 और 107 से जुड़ा है। तीनों भूखंडों का कुल क्षेत्रफल लगभग 0.334 हेक्टेयर यानी करीब 3,340 से 3,350 वर्ग मीटर बताया गया है।
आर्य समाज मंदिर की ओर से लगभग एक साल पहले प्रशासन को शिकायत दी गई थी। शिकायत में दावा किया गया कि चकबंदी के पुराने रिकॉर्ड में यह जमीन ‘मंदिर आर्य समाज एवं ग्राम समाज’ के नाम दर्ज थी, लेकिन बाद के वर्षों में राजस्व अभिलेखों में बदलाव करके निजी लोगों के नाम शामिल कर दिए गए।
इसके बाद मामला एसडीएम सदर विकास चंद्र की अदालत में पहुंचा, जहां दोनों पक्षों ने अपने दस्तावेज और दलीलें प्रस्तुत कीं।
पुराने रिकॉर्ड में क्या मिला?
लाइव हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने खतौनी, तहसीलदार की जांच रिपोर्ट और चकबंदी के आकार पत्र-41 तथा आकार पत्र-45 सहित पुराने राजस्व अभिलेखों की जांच की।
इन अभिलेखों में गाटा संख्या 103, 106 और 107 पर ‘मंदिर आर्य समाज एवं ग्राम समाज’ की प्रविष्टि दर्ज पाई गई। कोर्ट के मुताबिक, मौजूदा अभिलेखों में दर्ज निजी नाम पुराने राजस्व और चकबंदी रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहे थे।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन लोगों के नाम वर्तमान रिकॉर्ड में दर्ज थे, उनकी ओर से उन प्रविष्टियों के समर्थन में पर्याप्त और ठोस दस्तावेज पेश नहीं किए जा सके। इसके बाद एसडीएम कोर्ट ने रिकॉर्ड को पुराने अभिलेखों के अनुसार दुरुस्त करने का आदेश दिया।
11 लोगों के नाम निरस्त करने का आदेश
SDM कोर्ट ने विवादित जमीन के रिकॉर्ड में दर्ज 11 लोगों के नाम निरस्त करने का आदेश दिया है। इनमें अकीला बेगम, अहमद हसन, गुलाम वारिस, मोहम्मद अली, मोहम्मद आलम, मोहम्मद हसन, माहिर हुसैन, तकिरुल्लाह, नूरुल्ला, शब्बीरन और सुल्तान के नाम बताए गए हैं।
आदेश की प्रति तहसीलदार संभल को भेजकर राजस्व रिकॉर्ड में आवश्यक सुधार करने और कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
यह राजस्व न्यायालय का आदेश है। प्रभावित पक्ष के पास कानून के अनुसार इसे उच्च अदालत या सक्षम प्राधिकारी के सामने चुनौती देने का अधिकार बना रहेगा।
जमीन पर मिले 10 मकान और एक मजार
आदेश के बाद तहसील प्रशासन की टीम पुलिस बल के साथ जमीन की पैमाइश करने पहुंची। मौके पर लगभग 10 पक्के मकान और एक मजार बने होने की जानकारी सामने आई।
प्रशासन का दावा है कि जमीन पर पहले प्लॉटिंग की गई और बाद में अलग-अलग लोगों को भूखंड बेच दिए गए। अब राजस्व रिकॉर्ड दुरुस्त होने के बाद कब्जे हटाने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, तहसील प्रशासन ने संबंधित लोगों से स्वयं जमीन खाली करने की अपील की है। ऐसा नहीं होने पर उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत बेदखली की कार्रवाई आगे बढ़ाई जा सकती है।
क्या तुरंत चलेगा बुलडोजर?
SDM कोर्ट के आदेश के बाद सोशल मीडिया पर मजार और मकानों पर तुरंत बुलडोजर चलने के दावे किए जा रहे हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार अभी सीधे ध्वस्तीकरण का अंतिम आदेश सामने नहीं आया है।
पहले जमीन पर मौजूद कब्जों की स्थिति की जांच, संबंधित लोगों को नोटिस और बेदखली की कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। नोटिस की अवधि समाप्त होने और सक्षम अदालत का आदेश मिलने के बाद ही अवैध घोषित निर्माणों को हटाने की कार्रवाई की जा सकती है।
इसलिए अभी यह कहना सही होगा कि मकानों और मजार पर कार्रवाई की तैयारी है, लेकिन ध्वस्तीकरण कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संभव होगा।
मुस्लिम पक्ष ने क्या दावा किया?
स्थानीय मुस्लिम पक्ष ने प्रशासन के दावों पर सवाल उठाए हैं। मौलाना मुशर्रफ हुसैन ने दावा किया कि मौके पर मौजूद मजार काफी पुरानी है और यह जमीन खरीदी गई थी।
उनका कहना है कि स्थानीय बुजुर्ग लंबे समय से इस धार्मिक स्थल के अस्तित्व की बात बताते आए हैं। हालांकि, प्रशासन का पक्ष है कि अदालत ने उपलब्ध राजस्व अभिलेखों और जांच रिपोर्ट के आधार पर जमीन को मंदिर आर्य समाज एवं ग्राम समाज के नाम दर्ज करने का आदेश दिया है।
अब प्रभावित पक्ष यदि आदेश से असहमत है तो उसके पास कानूनी अपील का विकल्प मौजूद है।
जमीन की कीमत ₹18 करोड़ या ₹50 करोड़?
सोशल मीडिया पोस्ट और कुछ मीडिया रिपोर्टों में विवादित जमीन की अनुमानित कीमत करीब ₹50 करोड़ बताई जा रही है। वहीं स्थानीय रिपोर्ट में उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसका मूल्य लगभग ₹18 करोड़ बताया गया है।
किसी सार्वजनिक आधिकारिक मूल्यांकन रिपोर्ट के अभाव में जमीन की सटीक बाजार कीमत की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए खबर में इसे करोड़ों रुपये की जमीन लिखना अधिक तथ्यात्मक रहेगा।
वायरल पोस्ट में ‘दादा मियां दरगाह’ वाले दावे पर सावधानी
वायरल पोस्ट में जमीन पर ‘दादा मियां की दरगाह’ बने होने का दावा किया गया है। लेकिन वर्तमान शेर खां सराय मामले की उपलब्ध विस्तृत रिपोर्टों में मौके पर केवल एक मजार होने की जानकारी दी गई है; उसका नाम स्पष्ट रूप से प्रमाणित नहीं किया गया।
संभल में दादा मियां की मजार और उससे सटी मस्जिद से जुड़ा एक अलग मामला जनवरी 2026 में सुल्तानपुर खुर्द क्षेत्र से सामने आया था। इसलिए दोनों मामलों को एक बताने से पहले प्रशासनिक पुष्टि जरूरी है।
आगे क्या होगा?
तहसील प्रशासन अब SDM कोर्ट के आदेश के अनुसार राजस्व रिकॉर्ड में ‘मंदिर आर्य समाज एवं ग्राम समाज’ का नाम दर्ज करेगा। इसके बाद जमीन पर मौजूद निर्माणों और उनमें रहने वाले लोगों को लेकर अलग से कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से, उचित नोटिस और कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए की जाए। वहीं प्रभावित लोगों के पास राजस्व न्यायालय के आदेश को चुनौती देने का अधिकार रहेगा।
