UP Flood: मंदाकिनी ने तोड़ा 23 साल का रिकॉर्ड, गंगा-यमुना भी उफान पर; 31 जिलों में बाढ़ जैसे हालात
चित्रकूट के 36 गांवों में करीब 14 हजार लोग प्रभावित, प्रयागराज में घरों तक पहुंचा पानी; वाराणसी में गंगा चेतावनी स्तर के पार, नाव संचालन बंद
उत्तर प्रदेश में मंदाकिनी, गंगा और यमुना के बढ़ते जलस्तर ने बाढ़ का खतरा बढ़ा दिया है। चित्रकूट में रामघाट सहित कई इलाके जलमग्न हैं, जबकि प्रयागराज, वाराणसी, बलिया और गाजीपुर में नदी किनारे बसे गांवों एवं मोहल्लों में पानी घुस गया है। प्रदेश के 31 जिलों में बाढ़ जैसे हालात बताए गए हैं।
उत्तर प्रदेश के 31 जिलों में बाढ़ का असर
लखनऊ: लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने उत्तर प्रदेश के बड़े हिस्से में बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। मंदाकिनी, गंगा और यमुना का पानी चित्रकूट, प्रयागराज और वाराणसी सहित कई जिलों के निचले इलाकों में प्रवेश कर गया है।
प्रदेश के कम से कम 31 जिलों में बाढ़ जैसी स्थिति बताई गई है, जबकि 22 जिले सीधे जलभराव और बाढ़ से जूझ रहे हैं। हजारों लोगों को प्रभावित क्षेत्रों से निकालकर सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में पहुंचाया जा रहा है।
सबसे गंभीर स्थिति चित्रकूट में दिखाई दे रही है, जहां मंदाकिनी नदी के अचानक उफान ने रामघाट, दुकानों, मंदिरों से जुड़े रास्तों और नदी किनारे की बस्तियों को अपनी चपेट में ले लिया।
मंदाकिनी ने 23 साल बाद दिखाया विकराल रूप
चित्रकूट की जीवनरेखा कही जाने वाली मंदाकिनी नदी ने करीब 23 वर्ष बाद इतना विकराल रूप दिखाया है। नदी का खतरे का निशान 126.5 मीटर बताया गया है। 29 अगस्त को इसका जलस्तर बढ़कर 135.20 मीटर तक पहुंच गया था, जो खतरे के निशान से लगभग 8.5 मीटर ऊपर था।
2 सितंबर को जलस्तर घटकर करीब 127.1 मीटर रिकॉर्ड किया गया, लेकिन कई निचले इलाकों में पानी भरा रहा और नुकसान बड़े पैमाने पर सामने आया।
स्थानीय लोगों के मुताबिक वर्ष 2003 में भी मंदाकिनी का ऐसा ही उफान देखने को मिला था। इसके बाद अब 2026 में नदी ने आसपास के क्षेत्रों में भारी तबाही मचाई है।
चित्रकूट के 36 गांव और 14 हजार लोग प्रभावित
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक चित्रकूट के कम से कम 36 गांवों के लगभग 14 हजार लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।
इनमें:
- कर्वी तहसील के 19 गांव
- मानिकपुर तहसील के 10 गांव
- राजापुर तहसील के सात गांव शामिल हैं।
कई गांवों में पानी घरों और दुकानों तक पहुंच गया है। सड़कों के जलमग्न होने के कारण वाहनों का आवागमन बाधित है। राहत सामग्री पहुंचाने और फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए नावों एवं मोटरबोट का इस्तेमाल किया जा रहा है।
रामघाट और कामदगिरि मार्ग तक पहुंचा पानी
चित्रकूट के प्रमुख धार्मिक स्थल रामघाट पर बाढ़ का गंभीर असर पड़ा है। मंदाकिनी का पानी रामघाट की दुकानों, टेंपो स्टैंड, पुरानी लंका, कामदगिरि मार्ग और नदी किनारे की बस्तियों में घुस गया।
मठों, मंदिरों, होटलों और गेस्ट हाउसों की ओर जाने वाले रास्तों पर मिट्टी एवं गाद जमा है। बाढ़ के कारण चित्रकूट आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी प्रभावित हुई है।
रामघाट और तरौंहा क्षेत्र से 60 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। रामघाट और निर्मोही अखाड़ा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में ड्रोन के माध्यम से निगरानी की जा रही है।
400 कच्चे मकान क्षतिग्रस्त, 30 से ज्यादा धराशायी
बाढ़ से चित्रकूट में सैकड़ों कच्चे मकानों को नुकसान पहुंचा है। रिपोर्टों के अनुसार लगभग 400 कच्चे मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं और 30 से अधिक मकान गिर गए।
प्रशासन के अलग-अलग अपडेट में मकानों की क्षति के आंकड़ों में थोड़ा अंतर है, क्योंकि सर्वेक्षण और ऑनलाइन फीडिंग का काम लगातार जारी है। जिन परिवारों के मकान पूरी तरह नष्ट हुए हैं, उन्हें मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवास उपलब्ध कराने की बात कही गई है।
आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों का सर्वेक्षण कर पात्र लोगों के बैंक खातों में सहायता राशि भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
प्रयागराज में गंगा-यमुना का पानी घरों तक पहुंचा
प्रयागराज में गंगा और यमुना के बढ़ते जलस्तर ने नदी किनारे के मोहल्लों में रहने वाले लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। दारागंज, गंगा नगर, ओम नगर, शांतिपुरम और उचवा गढ़ी सहित कई निचले क्षेत्रों में पानी प्रवेश कर गया है।
3 सितंबर की शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार दोनों नदियां खतरे के निशान 84.73 मीटर से करीब दो मीटर नीचे थीं, लेकिन अलग-अलग निगरानी केंद्रों पर जलस्तर में उतार-चढ़ाव जारी था।
सुबह आठ बजे दर्ज आंकड़ों के अनुसार:
- फाफामऊ में गंगा का जलस्तर 82.86 मीटर
- छतनाग में गंगा का जलस्तर 81.87 मीटर
- नैनी में यमुना का जलस्तर 82.20 मीटर था।
दोपहर तक नैनी में यमुना करीब 14 सेंटीमीटर बढ़कर 82.34 मीटर पर पहुंच गई। ये आंकड़े लगातार बदल सकते हैं, इसलिए नदी किनारे रहने वाले लोगों को प्रशासन के ताजा निर्देशों का पालन करना चाहिए।
बांधों से छोड़े गए पानी ने बढ़ाई चिंता
मध्य प्रदेश के बांधों से यमुना में छोड़े गए पानी के कारण प्रयागराज में जलस्तर और बढ़ने की आशंका जताई गई। इसके अलावा ऊपरी क्षेत्रों में लगातार बारिश होने से गंगा और मंदाकिनी में भी पानी की आवक बढ़ी।
प्रशासन ने प्रयागराज में 88 बाढ़ राहत चौकियां सक्रिय कर दी हैं। संवेदनशील क्षेत्रों और घाटों के आसपास NDRF, PAC एवं जल पुलिस के जवान तैनात किए गए हैं।
वाराणसी में चेतावनी स्तर पार कर गई गंगा
वाराणसी में गंगा चेतावनी स्तर के ऊपर बह रही है। 2 सितंबर को केंद्रीय जल आयोग ने गंगा का जलस्तर 70.29 मीटर रिकॉर्ड किया था, जबकि चेतावनी स्तर 70.26 मीटर और खतरे का निशान 71.26 मीटर है।
सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने गंगा में नावों का संचालन बंद कर दिया है और श्रद्धालुओं एवं स्थानीय लोगों को तेज बहाव वाले क्षेत्रों तथा घाटों से दूर रहने की सलाह दी है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक गंगा और वरुणा नदी से करीब 11 इलाके एवं वार्ड आंशिक रूप से प्रभावित हुए हैं।
वरुणा की बाढ़ से 328 परिवारों के 1,388 लोग प्रभावित बताए गए। राहत शिविरों में 219 परिवारों के 935 लोगों को ठहराया गया है।
बलिया और गाजीपुर में खतरे के निशान से ऊपर गंगा
पूर्वी उत्तर प्रदेश के बलिया और गाजीपुर में गंगा खतरे के निशान को पार कर गई। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार:
- बलिया में गंगा 59.41 मीटर पर थी, जबकि खतरे का निशान 57.61 मीटर है।
- गाजीपुर में जलस्तर 63.35 मीटर था, जबकि खतरे का निशान 63.10 मीटर है।
- वाराणसी में गंगा 70.38 मीटर तक पहुंचने की रिपोर्ट है, जो चेतावनी स्तर से ऊपर है।
जलस्तर समय के साथ बदलता रहता है। इसलिए इन आंकड़ों को 2–3 सितंबर की स्थिति के रूप में ही पढ़ा जाना चाहिए।
1,528 लोगों को सुरक्षित निकाला गया
प्रदेशभर के प्रभावित इलाकों से कम से कम 1,528 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। राहत और बचाव के लिए बड़े स्तर पर संसाधन तैनात किए गए हैं।
प्रशासन के मुताबिक:
- 742 बाढ़ राहत चौकियां स्थापित की गई हैं।
- 452 नावें और मोटरबोट लगाई गई हैं।
- 225 मेडिकल टीमें काम कर रही हैं।
- 105 राहत शिविर सक्रिय किए गए हैं।
- शिविरों में करीब 2,460 लोगों के रहने की व्यवस्था है।
- प्रभावित पशुओं के लिए लगभग 310 क्विंटल चारा भेजा गया है।
NDRF, SDRF, PAC, पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीमें लोगों को सुरक्षित निकालने तथा भोजन, पानी एवं दवाएं पहुंचाने में जुटी हैं।
इन जिलों में बाढ़ जैसे हालात
प्रभावित जिलों में अयोध्या, आजमगढ़, बलिया, बाराबंकी, बदायूं, चंदौली, चित्रकूट, फर्रुखाबाद, गाजीपुर, गोरखपुर, हापुड़, हरदोई, कासगंज, लखीमपुर खीरी, मिर्जापुर, मुरादाबाद, प्रयागराज, संत कबीर नगर, शाहजहांपुर, सीतापुर, उन्नाव और वाराणसी सहित कई जिले शामिल हैं।
निचले इलाकों, नदी किनारे की बस्तियों और ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
अभी टला नहीं है खतरा
चित्रकूट में मंदाकिनी का जलस्तर अपने उच्चतम स्तर से नीचे आया है, लेकिन बाढ़ से हुए नुकसान और जलभराव का असर अभी बना हुआ है। दूसरी तरफ गंगा और यमुना के जलस्तर में अलग-अलग स्थानों पर बढ़ने और घटने का सिलसिला जारी है।
दक्षिणी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड के कुछ हिस्सों में भारी बारिश की आशंका के कारण स्थिति फिर बदल सकती है। प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक चेतावनियों का पालन करने की अपील की है।
बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए सावधानियां
- नदी, नाले, घाट और क्षतिग्रस्त पुलों के पास न जाएं।
- प्रशासन खाली करने को कहे तो तुरंत सुरक्षित स्थान पर जाएं।
- पानी से ढकी सड़क पर वाहन चलाने का जोखिम न लें।
- बिजली के तार, खंभे और जलमग्न ट्रांसफॉर्मर से दूर रहें।
- पीने के लिए उबला या सुरक्षित पैकेज्ड पानी इस्तेमाल करें।
- बच्चों और बुजुर्गों को अकेला न छोड़ें।
- आपात स्थिति में 112 या स्थानीय जिला प्रशासन से संपर्क करें।
