PM मोदी से कल तीन बड़े मुद्दों पर सवाल करेंगे खड़गे, SIR और महिला आरक्षण पर बढ़ी सियासत

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि वह 21 अक्टूबर को प्रधानमंत्री मोदी के सामने मतदाता सूची के SIR, परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़ी चिंताएं रखेंगे। सरकार और कांग्रेस के बीच सर्वदलीय बैठक को लेकर भी मतभेद हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने SIR, परिसीमन और महिला आरक्षण का मुद्दा उठाने की बात कही है। खड़गे ने इन विषयों पर सरकार से जवाब मांगा है, जबकि केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू का दावा है कि सरकार विपक्षी दलों से पहले भी बातचीत कर चुकी है।

PM मोदी से कल तीन बड़े मुद्दों पर सवाल करेंगे खड़गे, SIR और महिला आरक्षण पर बढ़ी सियासत

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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने SIR, परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दे 21 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने उठाने की बात कही है। दोनों नेताओं की फाइल तस्वीरों का कोलाज।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली/कलबुर्गी | 20 अक्टूबर 2026
देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), परिसीमन और महिला आरक्षण को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मंगलवार को नया बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वह 21 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने इन तीनों मुद्दों पर अपनी चिंताएं विस्तार से रखेंगे।
कर्नाटक के कलबुर्गी में पत्रकारों से बातचीत करते हुए खड़गे ने बताया कि वह प्रधानमंत्री को व्यक्तिगत रूप से पत्र लिख चुके हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल वह राजनीतिक मुद्दों पर विस्तार से बात नहीं करना चाहते, लेकिन अगले दिन इन विषयों पर अपना पक्ष रखेंगे।
खड़गे की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और कांग्रेस के बीच परिसीमन विधेयक तथा सर्वदलीय बैठक को लेकर पत्राचार चल रहा है।

खबर में खास

  • खड़गे ने 21 अक्टूबर को PM मोदी के सामने तीन मुद्दे उठाने की बात कही।
  • मतदाता सूची के SIR से कथित नुकसान पर सवाल उठाए।
  • परिसीमन की प्रस्तावित प्रक्रिया पर चर्चा की मांग।
  • महिला आरक्षण लागू करने में देरी को लेकर सरकार से जवाब चाहा।
  • रिजिजू ने दावा किया कि सरकार पहले भी विपक्षी दलों से बातचीत का प्रयास कर चुकी है।

खड़गे ने प्रधानमंत्री मोदी को लेकर क्या कहा?

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मंगलवार को पत्रकारों से कहा कि वह प्रधानमंत्री को व्यक्तिगत रूप से पत्र लिख चुके हैं और उनके पास उनके दो पत्र हैं।
खड़गे के मुताबिक, वह 21 अक्टूबर को मतदाता सूची के SIR, परिसीमन की प्रस्तावित प्रक्रिया और महिलाओं के आरक्षण से संबंधित मुद्दों पर अपनी बात विस्तार से रखेंगे।
उन्होंने विशेष रूप से महिला आरक्षण लागू करने में देरी पर सवाल उठाया।
खड़गे का यह बयान उनकी आगामी बातचीत संबंधी घोषणा है। प्रधानमंत्री के साथ चर्चा हो चुकी है या सरकार किसी नई मांग पर सहमत हो गई है, ऐसा दावा फिलहाल नहीं किया जा सकता।

SIR को लेकर कांग्रेस की क्या आपत्ति है?

Special Intensive Revision यानी SIR मतदाता सूची की विशेष गहन समीक्षा की प्रक्रिया है।
चुनाव आयोग के अनुसार, इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना और मृत, स्थानांतरित, दोहराए गए या अन्य अपात्र नामों की पहचान करना है।
हालांकि, कांग्रेस और कई विपक्षी दल इस प्रक्रिया के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका और शिकायतों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं।
खड़गे ने कहा है कि वह प्रधानमंत्री के सामने SIR से होने वाले कथित नुकसान का मुद्दा रखेंगे।
महत्वपूर्ण बात यह है कि मतदाता सूची में अनियमितता के आरोप और किसी राजनीतिक दल को लाभ पहुंचाने की मंशा के आरोप अलग बातें हैं। राजनीतिक पक्षपात का आरोप स्वतंत्र प्रमाण के बिना स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।

परिसीमन को लेकर क्यों बढ़ी राजनीतिक बहस?

परिसीमन का संबंध लोकसभा और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं तथा सीटों के निर्धारण से है।
इसके जरिए चुनावी प्रतिनिधित्व की संरचना में बदलाव हो सकता है। इसलिए किसी नई परिसीमन व्यवस्था का प्रभाव अलग-अलग राज्यों और निर्वाचन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण हो सकता है।
कांग्रेस की मांग है कि सरकार परिसीमन से जुड़े किसी नए प्रस्ताव को संसद में आगे बढ़ाने से पहले सभी राजनीतिक दलों के साथ सामूहिक चर्चा करे।
खड़गे ने 16 अक्टूबर को प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की थी।
कांग्रेस का कहना है कि इतने महत्वपूर्ण संवैधानिक विषय पर सभी पक्षों को प्रस्ताव की जानकारी और चर्चा का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए।

किरेन रिजिजू ने कांग्रेस को क्या जवाब दिया?

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने खड़गे के पत्र का जवाब देते हुए दावा किया कि सरकार पहले भी कांग्रेस से संपर्क कर चुकी है।
रिजिजू के मुताबिक, मार्च और अप्रैल में लिखित संपर्क किए गए और खड़गे तथा राहुल गांधी के साथ बातचीत के प्रयास भी हुए।
उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार अनुरोध के बावजूद कांग्रेस ने आगे की चर्चा के लिए तारीख उपलब्ध नहीं कराई।
रिजिजू के अनुसार, इसके बाद सरकार ने समाजवादी पार्टी, DMK, YSRCP, NCP, शिवसेना (UBT), AIMIM और BJD सहित अन्य राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से संपर्क किया।
यह सरकार का पक्ष है। कांग्रेस ने सामूहिक सर्वदलीय चर्चा की अपनी मांग बरकरार रखी है।

महिला आरक्षण पर खड़गे का सवाल

महिला आरक्षण को लेकर भी कांग्रेस ने केंद्र सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का संवैधानिक प्रावधान पहले ही बनाया जा चुका है, लेकिन उसका चुनावी क्रियान्वयन आवश्यक प्रक्रियाओं से जुड़ा है।
खड़गे ने सवाल उठाया कि सरकार आरक्षण लागू करने की दिशा में आगे क्यों नहीं बढ़ रही है।
इस विषय पर परिसीमन और संबंधित संवैधानिक प्रक्रिया का महत्व है। इसलिए महिला आरक्षण का कानून बन जाने और नई आरक्षित सीटों पर चुनाव होने के बीच अंतर समझना जरूरी है।

जयराम रमेश ने भी सरकार से पूछे सवाल

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी परिसीमन को लेकर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार के पास कोई नया परिसीमन प्रस्ताव है या वह पहले पेश किए गए विधेयक को ही दोबारा संसद में लाना चाहती है।
कांग्रेस की ओर से सर्वदलीय बैठक की मांग दोहराई गई है।
वहीं, सरकार का कहना है कि विपक्ष से संपर्क के प्रयास किए गए हैं और कांग्रेस को विधायी चर्चा में रचनात्मक सहयोग देना चाहिए।

क्या संसद का विशेष सत्र बुलाया जाएगा?

परिसीमन और महिला आरक्षण से संबंधित प्रस्तावों को लेकर संसद की अतिरिक्त बैठक या संक्षिप्त सत्र बुलाए जाने की चर्चा बनी हुई है।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में किसी नए विशेष सत्र की आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है।
ऐसी स्थिति में यह कहना सही नहीं होगा कि सरकार ने संसद की बैठक की तारीख तय कर दी है या प्रस्तावित विधेयक को पारित कराने के लिए पर्याप्त समर्थन मिल चुका है।

आगे किस बात पर रहेगी नजर?

अब ध्यान 21 अक्टूबर के लिए खड़गे द्वारा घोषित चर्चा पर रहेगा।
यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार SIR, परिसीमन और महिला आरक्षण को लेकर क्या स्पष्ट जानकारी देती है तथा सर्वदलीय बैठक की मांग पर आगे कोई सहमति बनती है या नहीं।
फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस की मांगें, खड़गे का ताजा बयान और सरकार का जवाब सामने हैं। किसी नई संवैधानिक व्यवस्था या राजनीतिक समझौते की घोषणा अभी नहीं हुई है।

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