दिल्ली की रैली में राहुल गांधी की PM मोदी-अमित शाह को चेतावनी! बोले—ज्ञानेश कुमार के बाद आप पर भी होगी कार्रवाई; अखिलेश-ममता ने भी उठाए सवाल

1 नवंबर को रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन के नेताओं ने चुनाव आयोग और SIR पर सवाल उठाए। राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग की, अखिलेश ने यूपी चुनाव 2027 का मुद्दा उठाया; भाजपा ने आरोप खारिज किए।

INDIA Bloc Rally: दिल्ली में 1 नवंबर की रैली में राहुल गांधी ने CEC ज्ञानेश कुमार, मोदी और अमित शाह पर गंभीर आरोप लगाए। अखिलेश यादव, ममता बनर्जी और खरगे ने भी चुनाव आयोग पर सवाल उठाए। जानिए पूरी खबर और भाजपा का जवाब।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली/लखनऊ | 2 नवंबर 2026
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1 नवंबर 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में राहुल गांधी, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी और अन्य विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग तथा SIR के मुद्दे पर आयोजित रैली में भाग लिया।

खबर में खास

  • 1 नवंबर को रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की 'वोट बचाओ, देश बचाओ' महारैली हुई।
  • राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और कानूनी कार्रवाई करने की मांग उठाई।

  • अखिलेश यादव ने रामलीला मैदान को लोकतंत्र की 'हल्दीघाटी' बताते हुए भाजपा के 'अंगद का पैर' वाले बयान का जवाब दिया।

  • ममता बनर्जी, तेजस्वी यादव, खरगे, फारूक अब्दुल्ला सहित कई नेताओं ने मंच साझा किया।

  • भाजपा नेताओं ने विपक्ष के आरोपों और रैली में भीड़ के दावों पर सवाल उठाए।
दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार, 1 नवंबर 2026 को INDIA गठबंधन ने 'वोट बचाओ, देश बचाओ' महारैली आयोजित की। इसमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस नेता ममता बनर्जी, राष्ट्रीय जनता दल के तेजस्वी यादव और कई अन्य विपक्षी नेता एक मंच पर दिखाई दिए।
रैली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), कथित चुनावी अनियमितताओं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को लेकर भी कानूनी कार्रवाई संबंधी बयान दिया।

राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार, मोदी और शाह को लेकर क्या कहा?

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाना देश की व्यवस्था को सही दिशा में लाने का पहला कदम होगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में गड़बड़ियों के जरिए नागरिकों के मतदान अधिकार प्रभावित किए गए हैं।
राहुल गांधी ने दावा किया कि भविष्य में ज्ञानेश कुमार को जेल जाना पड़ेगा और प्रधानमंत्री मोदी तथा गृह मंत्री शाह के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई होगी।
हालांकि, यह राहुल गांधी का राजनीतिक आरोप और भविष्य को लेकर उनका दावा है। किसी संबंधित अदालत ने इन नेताओं को दोषी नहीं ठहराया है।

अखिलेश यादव बोले—रामलीला मैदान लोकतंत्र की हल्दीघाटी बना

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी मंच से भाजपा और चुनाव आयोग पर सवाल उठाए।
उन्होंने रामलीला मैदान को लोकतंत्र की 'हल्दीघाटी' बताया और उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची में नाम हटाए जाने का मुद्दा उठाया।
अखिलेश ने अमित शाह के पहले दिए गए 'अंगद का पैर' वाले बयान पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जब जमीन ही नहीं बचेगी, तो अंगद का पैर कहाँ रखा जाएगा।
उनके भाषण में उत्तर प्रदेश की राजनीतिक स्थिति और आगामी विधानसभा चुनाव 2027 का भी उल्लेख रहा।

ममता बनर्जी, खरगे और तेजस्वी ने क्या कहा?

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने चुनाव आयोग की जवाबदेही और लोकतांत्रिक संस्थाओं के कामकाज पर सवाल उठाए। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की आलोचना की।
ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में SIR और चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियाँ दोहराईं। उन्होंने विपक्षी दलों से संयुक्त रूप से विरोध जारी रखने की अपील की।
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्थाएँ निष्पक्ष तरीके से काम नहीं कर रही हैं। उन्होंने चुनावी प्रक्रियाओं की पारदर्शिता का मुद्दा उठाया।
फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती तथा वाम दलों के नेता भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

क्या सचमुच 13 करोड़ से ज्यादा वोटरों के नाम काटे गए?

रैली में राहुल गांधी ने दावा किया कि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद लगभग 13.5 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूचियों से हटाए गए। उन्होंने इन आंकड़ों को चुनावी अनियमितता के आरोपों से जोड़ा।
दूसरी ओर, भाजपा ने कहा है कि पुनरीक्षण के दौरान चिह्नित नामों में मृत मतदाता, दूसरी जगह स्थानांतरित लोग और दोहरी प्रविष्टियाँ भी शामिल हैं।
चुनाव आयोग का कहना है कि पुनरीक्षण का उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना है। आयोग ने किसी राजनीतिक दल का पक्ष लेने के आरोपों से इनकार किया है।
इसलिए सूची से नाम हटने के आंकड़े और अवैध रूप से वोट हटाए जाने के आरोप को एक ही प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।

भाजपा ने रैली के बाद क्या जवाब दिया?

विपक्ष के आरोपों पर भाजपा ने भी प्रतिक्रिया दी।
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने रैली को लोकतंत्र के नाम पर अराजकता फैलाने का प्रयास बताया। भाजपा सांसद संबित पात्रा ने विपक्ष की ओर से किए गए भीड़ के दावों पर सवाल उठाए।
भाजपा नेताओं का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया पर बिना ठोस प्रमाण गंभीर आरोप लगाकर संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा नहीं किया जाना चाहिए।
रैली में मौजूद लोगों की संख्या को लेकर आयोजकों, पुलिस और स्वतंत्र रिपोर्टों के अनुमान अलग-अलग हैं। इसलिए किसी एक पक्ष का दावा अंतिम संख्या के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।

क्या रैली के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाया जा सकता है?

केवल राजनीतिक रैली या सार्वजनिक मांग के आधार पर मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से नहीं हटाया जा सकता।
इसके लिए संविधान में निर्धारित संसदीय प्रक्रिया लागू होती है। आरोपों की कानूनी जाँच और किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने की प्रक्रिया भी अलग है।
रविवार की रैली में विपक्ष ने अपनी मांगों को दोहराया, लेकिन इससे ज्ञानेश कुमार को हटाने का कोई संवैधानिक आदेश जारी नहीं हुआ।

रैली के बाद अब क्या होगा?

1 नवंबर की रैली के बाद 2 नवंबर को भी चुनाव आयोग, SIR और विपक्ष के आंदोलन को लेकर राजनीतिक चर्चा जारी है।
आगे यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विपक्ष अपने आरोपों के समर्थन में कौन-से दस्तावेज सार्वजनिक करता है, चुनाव आयोग क्या जवाब देता है और न्यायालयों या संसद में इन मुद्दों पर क्या कार्यवाही होती है।
मुख्य सवाल यही है कि मतदाता सूची में गलत तरीके से नाम हटाए जाने की शिकायतों की स्वतंत्र जाँच कैसे होगी और पात्र मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे?

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