‘56 इंच वाले सवालों से डर गए?’ Sergio Gor के दावे पर कांग्रेस का तंज, सरकार बोली- यह सामान्य VVIP प्रक्रिया

G7 Summit में मोदी-ट्रंप मुलाकात के दौरान ‘नो क्वेश्चन’ फॉर्मेट के अमेरिकी राजदूत Sergio Gor के दावे पर कांग्रेस ने हमला बोला, जबकि सरकारी सूत्रों ने कहा कि VVIP दौरों से पहले public appearance और media arrangements पर चर्चा सामान्य बात है।

अमेरिकी राजदूत Sergio Gor के उस दावे पर सियासत गरमा गई है, जिसमें उन्होंने कहा कि G7 में मोदी-ट्रंप मुलाकात के दौरान भारतीय पक्ष पूरी press conference नहीं चाहता था। कांग्रेस ने इसे लेकर PM मोदी पर तंज कसा, जबकि सरकारी सूत्रों ने इसे सामान्य VVIP protocol बताया।

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की G7 Summit के दौरान हुई मुलाकात को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिका के भारत में राजदूत Sergio Gor ने दावा किया कि उस मुलाकात के दौरान भारतीय पक्ष मीडिया की मौजूदगी तो चाहता था, लेकिन पूरी press conference या सवाल-जवाब नहीं चाहता था। इस दावे के बाद कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर मोदी सरकार पर तंज कसा, जबकि भारत सरकार के सूत्रों ने कहा कि VVIP दौरों से पहले public appearance और media arrangements पर चर्चा करना एक सामान्य प्रक्रिया है।

Aaj Tak में प्रकाशित सरकारी सूत्रों के हवाले से कहा गया कि किसी भी VVIP दौरे से पहले दोनों देशों के बीच नेताओं के सार्वजनिक कार्यक्रमों की व्यवस्था को लेकर बातचीत होती है और यह “बहुत ही सामान्य प्रक्रिया” है। सूत्रों के अनुसार भारतीय पक्ष ने सिर्फ अपनी standard practice की जानकारी दी थी।

Sergio Gor ने क्या कहा?

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G7 Summit में मोदी-ट्रंप मुलाकात के दौरान ‘नो क्वेश्चन’ फॉर्मेट के Sergio Gor के दावे पर कांग्रेस ने हमला बोला, जबकि सरकारी सूत्रों ने इसे सामान्य VVIP प्रक्रिया बताया।

Aaj Tak की रिपोर्ट के मुताबिक Sergio Gor ने Economic Times World Leaders Forum में कहा कि फ्रांस में G7 Summit के दौरान PM मोदी और Donald Trump की मुलाकात से पहले ट्रंप ने उनसे पूछा था कि क्या भारतीय पक्ष की कोई विशेष मांग है। Gor के अनुसार उन्होंने ट्रंप से कहा कि भारतीय विदेश मंत्रालय चाहता है कि मीडिया को बुलाया जाए, लेकिन पूरी press conference न हो

यही दावा बाद में राजनीतिक मुद्दा बन गया, क्योंकि इसे विपक्ष ने सीधे PM मोदी की media comfort से जोड़ दिया।

कांग्रेस ने कैसे कसा तंज?

यूजर द्वारा साझा किए गए सोशल मीडिया पोस्ट/स्क्रीनशॉट में कांग्रेस ने इस पूरे विवाद को लेकर तीखा तंज कसा। पोस्ट में कहा गया कि “56 इंच वाले पत्रकारों के सवालों से इतना डर रहे हैं कि मीटिंग से पहले ही कह रहे थे, प्लीज कोई सवाल मत पूछ लेना।”

यानी कांग्रेस ने Sergio Gor के दावे को मोदी सरकार पर सीधा राजनीतिक हमला बनाने की कोशिश की है। यह विपक्ष के लिए सिर्फ diplomatic protocol की खबर नहीं, बल्कि “PM सवालों से बचते हैं” वाले बड़े narrative का हिस्सा है।

सरकार ने क्या जवाब दिया?

सरकारी सूत्रों ने कहा कि VVIP visits से पहले नेताओं के public appearances और media arrangements पर पहले से चर्चा होना सामान्य practice है। सूत्रों का कहना है कि भारतीय पक्ष ने केवल अपनी “सामान्य और मानक प्रक्रिया” के बारे में जानकारी दी थी।

सरकार ने यह नहीं कहा कि ऐसी कोई बातचीत हुई ही नहीं।
सरकार की लाइन यह है कि अगर ऐसी बातचीत हुई, तो वह किसी असामान्य रोक के तौर पर नहीं, बल्कि standard VVIP protocol के तहत हुई।

फिर सवाल-जवाब हुए या नहीं?

CNN transcript से साफ है कि 17 जून 2026 को G7 Summit के दौरान Trump और Modi की मुलाकात के बाद Trump ने सवाल भी लिए थे। CNN transcript की heading में ही दर्ज है: “Trump Takes Questions Amid Meeting With Indian Prime Minister.”

यानी जो भी प्रारंभिक preference या बातचीत रही हो, वास्तविक event में पत्रकार मौजूद थे और सवाल-जवाब भी हुए।

यह खबर इतनी बड़ी क्यों बनी?

इस story में तीन बड़े elements हैं:

  1. US Ambassador का दावा
  2. भारत सरकार की सफाई
  3. कांग्रेस का ‘56 इंच’ वाला तंज

इसी mix की वजह से यह खबर सिर्फ foreign policy update नहीं रह गई, बल्कि एक national political attack story बन गई है। एक तरफ विपक्ष transparency और media access का सवाल उठा रहा है, दूसरी तरफ सरकार इसे सामान्य protocol बता रही है।

खबर का balanced takeaway

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इतना कहना सही होगा कि:

  • Sergio Gor ने दावा किया कि भारतीय पक्ष पूरी press conference नहीं चाहता था।
  • भारत सरकार के सूत्रों ने कहा कि ऐसी चर्चा high-level visits में सामान्य होती है।
  • वास्तविक G7 interaction में Trump ने सवाल भी लिए।
  • कांग्रेस ने इसी मुद्दे को PM मोदी पर तंज कसने के लिए इस्तेमाल किया।

इसलिए headline या copy में यह नहीं लिखना चाहिए कि “भारत ने पत्रकारों को रोक दिया” या “सरकार ने दावे को पूरी तरह झूठा बताया”। दोनों बातें उपलब्ध सामग्री से ज्यादा आगे निकल जाएंगी।


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मोदी-ट्रंप मुलाकात को लेकर नया सियासी विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिकी राजदूत Sergio Gor के उस दावे पर, जिसमें उन्होंने कहा कि भारतीय पक्ष G7 में पूरी press conference नहीं चाहता था, कांग्रेस ने PM मोदी पर तीखा तंज कसा है। हालांकि भारत सरकार के सूत्रों ने इसे VVIP दौरों की सामान्य प्रक्रिया बताया है।

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