CM योगी पर कथित अभद्र टिप्पणी पड़ी भारी, यूट्यूबर हुदा जरीवाला गिरफ्तार; सर्किट हाउस की कहासुनी से जेल तक जानिए पूरा मामला
सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण पर बयान का वीडियो हुआ था वायरल, पुलिस ने शांतिभंग में चालान कर भेजा जेल
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जिलाधिकारी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में यूट्यूबर एवं सामाजिक कार्यकर्ता हुदा जरीवाला को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने शांतिभंग में चालान कर उन्हें जेल भेज दिया।
सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण को लेकर दिए गए बयान के बाद यूट्यूबर और सामाजिक कार्यकर्ता हुदा जरीवाला को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोप है कि वायरल वीडियो में उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सहारनपुर के जिलाधिकारी के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया था।
सहारनपुर की सदर बाजार पुलिस ने हुदा जरीवाला के खिलाफ शांतिभंग की धाराओं में कार्रवाई की। पुलिस ने उनका चालान कर संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
वायरल वीडियो के बाद पुलिस का एक्शन
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को प्रशासन द्वारा ध्वस्त किए जाने के बाद हुदा जरीवाला का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो में वह कार्रवाई का विरोध करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाती दिखाई दीं।
हुदा ने मुख्यमंत्री के लिए कथित रूप से आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया। इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग उठने लगी। हालांकि वायरल पोस्ट में किए जा रहे सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस कार्रवाई मुख्य रूप से कथित आपत्तिजनक बयान और कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका से जुड़ी बताई गई है।
सर्किट हाउस में पुलिस से हुई थी कहासुनी
रिपोर्ट के मुताबिक, हुदा जरीवाला सोमवार को सहारनपुर के सर्किट हाउस पहुंची थीं। वहां समाजवादी पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल मस्जिद ध्वस्तीकरण से जुड़े पक्षों से मिलने आया था। हुदा कथित तौर पर इसी प्रतिनिधिमंडल के साथ अंदर जाने का प्रयास कर रही थीं।
पुलिसकर्मियों ने सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए उन्हें रोक दिया। इसके बाद हुदा और वहां मौजूद पुलिसकर्मियों के बीच कहासुनी हो गई। महिला पुलिसकर्मियों ने उन्हें सर्किट हाउस परिसर से हटाने का प्रयास किया, लेकिन वह वहां से नहीं हटीं।
इसी दौरान दिया गया उनका बयान रिकॉर्ड होकर सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
अधिवक्ता ने पुलिस को दी शिकायत
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अधिवक्ता दुष्यंत सिंह की ओर से कोतवाली सदर बाजार में हुदा जरीवाला के खिलाफ तहरीर दी गई थी। शिकायत में मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने तथा माहौल खराब करने का आरोप लगाया गया।
इसके बाद पुलिस ने हुदा जरीवाला को हिरासत में लिया और शांतिभंग की आशंका में उनका चालान किया। पुलिस का कहना है कि संवेदनशील मामले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए नियमानुसार कार्रवाई की गई है।
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि शांतिभंग में चालान एक निरोधात्मक कार्रवाई है। इससे आरोप अपने-आप सिद्ध नहीं हो जाते। हुदा जरीवाला की ओर से गिरफ्तारी और शिकायत पर कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने आने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाना चाहिए।
पोस्टर लगाने के आरोप में कई लोग हिरासत में
मस्जिद ध्वस्तीकरण के बाद सहारनपुर पुलिस संवेदनशील इलाकों में सतर्कता बरत रही है। रिपोर्ट के अनुसार, भड़काऊ पोस्टर लगाने और माहौल बिगाड़ने का प्रयास करने के आरोप में अलग-अलग स्थानों से कई संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई है।
पुलिस ने कहा है कि सोशल मीडिया या सार्वजनिक स्थानों पर ऐसी गतिविधियों की निगरानी की जा रही है, जिनसे शांति व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका हो। आपत्तिजनक या भड़काऊ सामग्री फैलाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
क्या है सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण मामला?
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को लेकर लंबे समय से जमीन का विवाद चल रहा था। प्रशासन के अनुसार, सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने राजस्व दस्तावेजों के आधार पर निर्माण को सरकारी जमीन पर अनधिकृत माना था।
मस्जिद करीब 315 वर्ग मीटर जमीन पर बनी थी। सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने परिसर खाली करने का आदेश देने के साथ कथित अनधिकृत कब्जे के लिए लगभग ₹6.41 करोड़ की क्षतिपूर्ति भी निर्धारित की थी।
मस्जिद प्रबंधन समिति ने इस फैसले के खिलाफ जिला अदालत में अपील की, लेकिन अपील खारिज हो गई। इसके बाद पांच सितंबर की सुबह भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच प्रशासन ने मस्जिद को ध्वस्त कर दिया।
मस्जिद पक्ष और प्रशासन के अलग-अलग दावे
प्रशासन का कहना है कि संबंधित जमीन सरकारी थी और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई न्यायिक आदेश तथा निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के बाद की गई। दूसरी ओर, मस्जिद समिति ने दावा किया कि यह धार्मिक स्थल काफी पुराना था और उन्हें हाईकोर्ट जाने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया।
समिति ने कार्रवाई को चुनौती देने की बात कही है। मामले पर समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, बसपा और AIMIM के नेताओं ने भी सवाल उठाए हैं। इसलिए मस्जिद की जमीन और ध्वस्तीकरण से जुड़े दावों को संबंधित पक्षों के बयान के रूप में ही लिखा जाना चाहिए।
गिरफ्तारी के बाद उठे अभिव्यक्ति की सीमा पर सवाल
हुदा जरीवाला की गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर दो तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग कथित आपत्तिजनक भाषा को लेकर पुलिस कार्रवाई का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं।
भारतीय संविधान नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है, लेकिन यह अधिकार पूर्ण नहीं है। सार्वजनिक व्यवस्था, मानहानि और कानून-व्यवस्था सहित कुछ आधारों पर उचित कानूनी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। किसी मामले में बयान अपराध की सीमा में आता है या नहीं, इसका अंतिम निर्धारण तथ्यों और अदालत की प्रक्रिया के आधार पर होता है।
फिलहाल हुदा जरीवाला को शांतिभंग की कार्रवाई के तहत जेल भेजा गया है। मामले में आगे कोई अलग एफआईआर, नई धाराएं या न्यायिक आदेश सामने आता है तो कानूनी स्थिति उसी के अनुसार स्पष्ट होगी।
