मायावती का बड़ा संगठनात्मक दांव, अतर सिंह राव को 9 राज्यों की कमान; जानिए BSP के नए पावर स्ट्रक्चर में किसे क्या मिला
पूर्व एमएलसी अतर सिंह राव बनाए गए सेक्टर-2 के मुख्य प्रभारी, पश्चिम बंगाल से केरल तक पार्टी संगठन मजबूत करने की मिली जिम्मेदारी
बसपा सुप्रीमो मायावती ने पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में बदलाव करते हुए वरिष्ठ नेता अतर सिंह राव को नौ राज्यों का मुख्य सेक्टर प्रभारी बनाया है। उन्हें पश्चिम बंगाल, ओडिशा, महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत के पांच राज्यों में पार्टी को मजबूत करने की जिम्मेदारी मिली है।
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने पार्टी संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए वरिष्ठ नेता और पूर्व एमएलसी अतर सिंह राव का कद बढ़ा दिया है। उन्हें देश के नौ राज्यों में बसपा संगठन की कमान सौंपी गई है। नई व्यवस्था के तहत राव को सेक्टर-2 का मुख्य सेक्टर प्रभारी नियुक्त किया गया है।
अतर सिंह राव के अधिकार क्षेत्र में पश्चिम बंगाल, ओडिशा, महाराष्ट्र, गुजरात के साथ दक्षिण भारत के आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल शामिल होंगे। इन राज्यों में संगठन विस्तार, पार्टी पदाधिकारियों के बीच तालमेल और बसपा का जनाधार बढ़ाने की जिम्मेदारी उनके पास रहेगी।
इन नौ राज्यों की मिली जिम्मेदारी
अतर सिंह राव को जिन राज्यों की जिम्मेदारी दी गई है, उनमें शामिल हैं:
- पश्चिम बंगाल
- ओडिशा
- महाराष्ट्र
- गुजरात
- आंध्र प्रदेश
- तेलंगाना
- कर्नाटक
- तमिलनाडु
- केरल
बसपा ने अपने राष्ट्रीय संगठन को तीन बड़े सेक्टरों में विभाजित किया है। इसका उद्देश्य अलग-अलग राज्यों में पार्टी की गतिविधियों की बेहतर निगरानी करना और केंद्रीय नेतृत्व तक संगठन की वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट पहुंचाना बताया जा रहा है।
कौन हैं अतर सिंह राव?
अतर सिंह राव की गिनती बसपा के पुराने और संगठन के प्रति वफादार नेताओं में होती है। वह उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य रह चुके हैं और विधान परिषद में पार्टी के सचेतक की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उन्हें बसपा के महत्वपूर्ण दलित चेहरों में गिना जाता है। इससे पहले वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रभारी और बसपा के प्रदेश उपाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी काम कर चुके हैं।
पार्टी के भीतर उन्हें कैडर आधारित राजनीति और संगठनात्मक कार्यों का लंबा अनुभव रखने वाला नेता माना जाता है। नौ राज्यों की जिम्मेदारी मिलना राष्ट्रीय स्तर पर उनके बढ़ते कद का संकेत माना जा रहा है।
मायावती ने क्यों बढ़ाया राव का कद?
बसपा पिछले कुछ समय से उत्तर प्रदेश के साथ दूसरे राज्यों में भी अपने संगठन को दोबारा मजबूत करने का प्रयास कर रही है। इसी रणनीति के तहत समर्पित और अनुभवी नेताओं को अलग-अलग राज्यों की जिम्मेदारियां दी जा रही हैं।
अतर सिंह राव पहले भी कई राज्यों में संगठन का काम देख चुके हैं। वर्ष 2022 में भी उन्हें बिहार, ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल, गुजरात तथा दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव की जिम्मेदारी दी गई थी। अब उनका दायरा बढ़ाकर नौ राज्यों तक कर दिया गया है।
माना जा रहा है कि बसपा नेतृत्व इन राज्यों में संगठनात्मक समितियों के गठन, सदस्यता अभियान और स्थानीय नेतृत्व तैयार करने पर विशेष ध्यान देना चाहता है।
आकाश आनंद को हटाने के बाद हुआ फेरबदल
यह संगठनात्मक बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब मायावती ने अपने बड़े भतीजे आकाश आनंद को राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर के पद से हटा दिया है। तीन सितंबर को लखनऊ में आयोजित राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक में आकाश आनंद को कथित तौर पर नहीं बुलाया गया था।
इसके बाद पार्टी में जिम्मेदारियों का नए सिरे से बंटवारा शुरू हुआ। अतर सिंह राव को नौ राज्यों की कमान देना भी इसी व्यापक संगठनात्मक बदलाव का हिस्सा माना जा रहा है।
आकाश आनंद को पद से हटाए जाने के बाद बसपा के नए नेतृत्व ढांचे और पार्टी में युवा नेताओं की भूमिका को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं।
ईशान आनंद की भी हुई बड़ी एंट्री
मायावती ने अपने छोटे भतीजे ईशान आनंद को भी पार्टी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें उत्तर भारत से जुड़े सेक्टरों में मुख्य सेक्टर प्रभारी बनाया गया है। वह अपने काम की रिपोर्ट सीधे मायावती और बसपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आनंद कुमार को देंगे।
ईशान आनंद की औपचारिक जिम्मेदारी को पार्टी की दूसरी पंक्ति के नेतृत्व में उनकी बढ़ती भूमिका के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि बसपा की ओर से पूरी संगठनात्मक संरचना और अलग-अलग पदों के अधिकार क्षेत्र का विस्तृत आधिकारिक विवरण अभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।
यूपी चुनाव से पहले क्या है मायावती की रणनीति?
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 का विधानसभा चुनाव बसपा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं करने के बाद पार्टी बूथ से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक संगठन को दोबारा सक्रिय करने में जुटी है।
मायावती पहले ही कह चुकी हैं कि बसपा आने वाले चुनाव अपने बल पर लड़ेगी। ऐसे में पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने पुराने दलित वोट बैंक को मजबूत करने के साथ पिछड़े वर्ग, अल्पसंख्यक और युवा मतदाताओं तक पहुंच बनाने की होगी।
हालांकि अतर सिंह राव को उत्तर प्रदेश के बजाय पश्चिमी, पूर्वी और दक्षिणी राज्यों की जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन इस नियुक्ति से यह संकेत जरूर मिलता है कि मायावती बसपा को केवल यूपी तक सीमित रखने के बजाय राष्ट्रीय स्तर पर संगठन को फिर सक्रिय करना चाहती हैं।
पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह
अतर सिंह राव को बड़ी जिम्मेदारी मिलने के बाद उनके समर्थकों और पार्टी पदाधिकारियों ने उन्हें बधाई दी है। समर्थकों का कहना है कि इस फैसले से पार्टी के पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं को सकारात्मक संदेश मिला है।
अब अतर सिंह राव के सामने नौ अलग-अलग राज्यों में बसपा के संगठन को सक्रिय करने, स्थानीय नेतृत्व तैयार करने और पार्टी की चुनावी उपस्थिति बढ़ाने की चुनौती होगी। उनकी नियुक्ति का वास्तविक असर आने वाले चुनावों और इन राज्यों में बसपा के प्रदर्शन से ही स्पष्ट होगा।
