पीएम मोदी पर टिप्पणी के मानहानि केस में राहुल गांधी को बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल रोका
सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे आपराधिक मानहानि मामले की सुनवाई पर अस्थायी रोक लगाई है। मामला 2018 में प्रधानमंत्री मोदी पर की गई टिप्पणी से जुड़ा है।
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राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर 2018 में की गई टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में ट्रायल पर रोक लगा दी गई है। अदालत ने चार सप्ताह में जवाब मांगा है।
बॉम्बे हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे राहुल गांधी, अब आपराधिक मानहानि मामले की कार्यवाही पर लगी रोक
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | राष्ट्रीय डेस्क | 13 अक्टूबर 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई पुरानी टिप्पणी से जुड़े आपराधिक मानहानि मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। मंगलवार, 13 अक्टूबर को शीर्ष अदालत ने मुंबई की निचली अदालत में चल रहे इस मामले की आगे की कार्यवाही पर अस्थायी रोक लगा दी।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस अपारेश कुमार सिंह की पीठ ने राहुल गांधी की याचिका पर सुनवाई करते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया। अदालत ने चार सप्ताह में जवाब देने को कहा है।
यह मामला वर्ष 2018 में राहुल गांधी की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए 'चोरों का सरदार' और 'कमांडर-इन-थीफ' जैसे शब्दों से जुड़ा है।
इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ जारी समन और मानहानि की शिकायत को रद्द करने से इनकार कर दिया था। उसी फैसले के खिलाफ राहुल गांधी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे।
खबर में खास
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सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी के आपराधिक मानहानि मामले के ट्रायल पर अस्थायी रोक लगाई।
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जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस अपारेश कुमार सिंह की पीठ ने सुनवाई की।
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मामला 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर की गई कथित टिप्पणियों से जुड़ा है।
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने 8 सितंबर को राहुल गांधी की याचिका खारिज की थी।
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सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित पक्षों को चार सप्ताह में जवाब देने का नोटिस जारी किया।
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मुकदमा अभी खारिज नहीं हुआ है और राहुल गांधी को दोषमुक्त भी घोषित नहीं किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी के मामले में क्या आदेश दिया?
राहुल गांधी की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई की ट्रायल कोर्ट में आगे की कार्यवाही रोकने का आदेश दिया।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस अपारेश कुमार सिंह की पीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट के 8 सितंबर 2026 के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर संबंधित पक्षों से जवाब मांगा।
अब चार सप्ताह के भीतर नोटिस का जवाब देना होगा। इस बीच निचली अदालत में मानहानि मामले की आगे की कार्यवाही रुकी रहेगी।
राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अभी इस मामले को पूरी तरह खत्म करने या शिकायत को रद्द करने का अंतिम आदेश नहीं दिया है।
राहुल गांधी के किस बयान पर दर्ज हुआ था मानहानि का मामला?
इस विवाद की शुरुआत सितंबर 2018 में हुई थी।
उस समय राहुल गांधी राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर राजनीतिक आरोप लगा रहे थे।
20 सितंबर 2018 को राजस्थान की एक जनसभा में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री के खिलाफ चौकीदार और चोरी से जुड़ी टिप्पणी की थी।
इसके कुछ दिन बाद, 24 सितंबर को उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री मोदी को लेकर 'कमांडर-इन-थीफ' शब्दों वाला संदेश साझा किया था।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि राहुल गांधी की इन टिप्पणियों से केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ही नहीं, बल्कि भाजपा और उससे जुड़े कार्यकर्ताओं की प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचा।
हालांकि, इन आरोपों पर अभी अंतिम न्यायिक फैसला नहीं हुआ है।
भाजपा कार्यकर्ता महेश श्रीश्रीमाल ने दर्ज कराई थी शिकायत
राहुल गांधी के खिलाफ महाराष्ट्र के भाजपा कार्यकर्ता महेश श्रीश्रीमाल ने मुंबई की गिरगांव मजिस्ट्रेट अदालत में आपराधिक मानहानि की शिकायत दाखिल की थी।
श्रीश्रीमाल का कहना था कि वह लंबे समय से भाजपा के सदस्य हैं और राहुल गांधी की टिप्पणी से उनकी पार्टी तथा उससे जुड़े लोगों की छवि प्रभावित हुई।
शिकायतकर्ता ने दलील दी कि प्रधानमंत्री को चोरी से जुड़े शब्दों में संबोधित करने का असर पार्टी के दूसरे सदस्यों की प्रतिष्ठा पर भी पड़ सकता है।
इसके बाद 28 अगस्त 2019 को मजिस्ट्रेट अदालत ने राहुल गांधी के खिलाफ समन जारी करने का आदेश दिया।
राहुल गांधी ने इस शिकायत और समन की वैधता को चुनौती दी थी।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने 8 सितंबर को क्या फैसला दिया था?
राहुल गांधी ने वर्ष 2021 में बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया था।
उनकी ओर से दलील दी गई कि विवादित टिप्पणी में भाजपा या पार्टी के किसी विशेष सदस्य का नाम नहीं लिया गया था।
राहुल गांधी के वकीलों का तर्क था कि यदि किसी व्यक्ति या स्पष्ट रूप से पहचाने जा सकने वाले समूह को निशाना नहीं बनाया गया, तो कोई भी पार्टी कार्यकर्ता अपने स्तर पर आपराधिक मानहानि की शिकायत नहीं कर सकता।
दूसरी तरफ शिकायतकर्ता ने कहा कि टिप्पणी से भाजपा और उसके सदस्यों की प्रतिष्ठा प्रभावित हुई है।
बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस एन.आर. बोरकर ने 8 सितंबर 2026 को राहुल गांधी की याचिका खारिज कर दी थी।
हाईकोर्ट ने कहा था कि शुरुआती स्तर पर मजिस्ट्रेट के आदेश में ऐसी स्पष्ट कानूनी खामी नहीं दिखाई देती, जिसके आधार पर कार्यवाही रद्द की जाए।
अदालत ने यह भी कहा कि टिप्पणी का पार्टी और उसके सदस्यों पर क्या प्रभाव पड़ा, इसका परीक्षण सुनवाई के दौरान होना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद क्या बदला?
