UP Politics: 'BJP सुभासपा को खा रही है'—अपनी ही पार्टी के मुखिया ओपी राजभर पर बरसे विधायक अब्बास अंसारी!
मऊ से सुभासपा विधायक अब्बास अंसारी ने ओम प्रकाश राजभर को आरक्षण के मुद्दे पर घेरा। भाजपा पर पार्टी को कमजोर करने का आरोप लगाया और संजय निषाद, अनुप्रिया पटेल व जयंत चौधरी का भी जिक्र किया।
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UP Politics: सुभासपा विधायक अब्बास अंसारी ने अपनी ही पार्टी के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर को भाजपा से सावधान रहने की सलाह दी। जानिए आरक्षण, NDA सहयोगियों और सपा को लेकर क्या कहा।
UP Politics: अपनी ही पार्टी के अध्यक्ष ओपी राजभर पर अब्बास अंसारी का पलटवार, BJP और आरक्षण पर उठाए सवाल
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | मऊ/लखनऊ | 24 अक्टूबर 2026
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भाजपा के सहयोगी दल सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के भीतर राजनीतिक मतभेद फिर चर्चा में आ गए हैं। मऊ सदर से विधायक अब्बास अंसारी ने अपनी ही पार्टी के अध्यक्ष और योगी सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर को सलाह देते हुए आरोप लगाया है कि भारतीय जनता पार्टी सुभासपा को कमजोर कर रही है।
मऊ स्थित समाजवादी पार्टी कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अब्बास अंसारी ने आरक्षण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व का सवाल उठाया। उन्होंने संजय निषाद, अनुप्रिया पटेल और जयंत चौधरी का उल्लेख करते हुए भाजपा के सहयोगी दलों की स्थिति पर भी टिप्पणी की।
खबर में खास
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अब्बास अंसारी ने अपनी ही पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर पर सवाल उठाए।
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भाजपा पर सुभासपा को कमजोर करने का आरोप लगाया।
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राजभर समाज के आरक्षण और प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाया।
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संजय निषाद, अनुप्रिया पटेल और जयंत चौधरी को लेकर भी दावा किया।
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किसी NDA सहयोगी दल ने इस बयान के आधार पर गठबंधन छोड़ने की घोषणा नहीं की है।
ओपी राजभर को लेकर अब्बास अंसारी ने क्या कहा?
दरअसल, ओम प्रकाश राजभर ने हाल में सपा और कांग्रेस के राजनीतिक संबंधों पर टिप्पणी की थी। इसी को लेकर सवाल पूछे जाने पर अब्बास अंसारी ने पलटवार किया।
उन्होंने कहा, "भाजपा भारतीय समाज पार्टी को खा रही है।"
अब्बास ने तर्क दिया कि जिस सामाजिक न्याय और आरक्षण के उद्देश्य से सुभासपा का गठन हुआ था, उस मुद्दे पर आज भी उसके समर्थकों की मांगें पूरी नहीं हुई हैं।
उन्होंने पार्टी नेतृत्व से यह भी पूछा कि सरकार में भागीदारी के बावजूद संबंधित समाज को उसके अधिकार दिलाने की दिशा में क्या उपलब्धियाँ हासिल हुई हैं।
यह अब्बास अंसारी का राजनीतिक आरोप है। पार्टी की वास्तविक संगठनात्मक स्थिति पर कोई स्वतंत्र आकलन उन्होंने प्रस्तुत नहीं किया।
संजय निषाद और अनुप्रिया पटेल का नाम क्यों लिया?
अब्बास अंसारी ने दावा किया कि आरक्षण और राजनीतिक अधिकारों को लेकर केवल सुभासपा ही नहीं, भाजपा के दूसरे सहयोगी दलों के नेताओं के मन में भी असंतोष है।
उन्होंने संजय निषाद, अनुप्रिया पटेल और जयंत चौधरी का नाम लिया। उनके अनुसार, ये नेता भी अपने-अपने राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर सही समय का इंतजार कर रहे हैं।
हालांकि, इन तीनों नेताओं ने अब्बास अंसारी के इस दावे की पुष्टि नहीं की है। इसलिए उनके बयान को संबंधित नेताओं के औपचारिक रुख के रूप में नहीं माना जा सकता।
आरक्षण के मुद्दे पर पहले क्या हुआ?
उत्तर प्रदेश में भाजपा की सहयोगी निषाद पार्टी भी आरक्षण के सवाल को उठा रही है।
21 अक्टूबर को दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में निषाद पार्टी के अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद ने मछुआ समुदाय के लिए अनुसूचित जाति का दर्जा दिए जाने की मांग पर सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा था।
उन्होंने कहा था कि मांग पर संतोषजनक निर्णय नहीं होने की स्थिति में उनकी पार्टी दूसरे राजनीतिक विकल्पों पर विचार कर सकती है।
हालांकि, निषाद पार्टी ने भाजपा से गठबंधन तोड़ने की घोषणा नहीं की है।
सुभासपा विधायक सपा कार्यालय में क्यों पहुंचे?
अब्बास अंसारी वर्ष 2022 में मऊ सदर सीट से सुभासपा के टिकट पर विधायक चुने गए थे। पार्टी का चुनावी गठबंधन उस समय समाजवादी पार्टी के साथ था।
बाद में ओम प्रकाश राजभर भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल हो गए, लेकिन अब्बास अंसारी की राजनीतिक नजदीकियाँ सपा नेतृत्व के साथ बनी रहीं।
अक्टूबर की शुरुआत में राज्यसभा चुनाव से पहले ओम प्रकाश राजभर ने भी सार्वजनिक तौर पर कहा था कि अब्बास अंसारी और एक अन्य सुभासपा विधायक समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार का समर्थन कर सकते हैं।
इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में अब्बास अंसारी का सपा कार्यालय से दिया गया बयान महत्वपूर्ण है।
क्या अब्बास अंसारी ने सुभासपा छोड़ दी?
