दिल्ली-NCR में नाबालिगों से यौन हिंसा की हालिया घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। अदालत ने कहा कि इन मामलों ने निर्भया कांड की दर्दनाक यादें ताजा कर दीं और कानून लागू करने वाली एजेंसियों की गंभीर कमियां उजागर हुई हैं।
47 किलोमीटर चलती रही बस, बंद रहा CCTV और रास्ते में नहीं हुई जांच; सुप्रीम कोर्ट ने पूछा—आखिर जवाबदेही किसकी?
दिल्ली-NCR में नाबालिगों से यौन हिंसा की घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया दिल्ली-NCR में नाबालिगों से यौन हिंसा की घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | राष्ट्रीय डेस्क | 28 सितंबर 2026
खबर में खास
दिल्ली-NCR की घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान
अदालत ने कहा—निर्भया मामले की यादें फिर ताजा हुईं
नाबालिग से चलती बस में हुई यौन हिंसा का विशेष रूप से जिक्र
बस में CCTV बंद और पहले से 11 ट्रैफिक चालान होने की जानकारी
सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा और अधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल
दिल्ली-NCR में नाबालिग लड़कियों से यौन हिंसा की हालिया घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने इन घटनाओं का स्वतः संज्ञान लेते हुए अलग मामला दर्ज करने का निर्देश दिया है।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि इन घटनाओं ने वर्ष 2012 के निर्भया कांड की दर्दनाक यादें ताजा कर दी हैं। अदालत ने इसे कानून लागू करने वाली एजेंसियों की गंभीर विफलता बताते हुए सुरक्षा व्यवस्था की कमियों पर जवाबदेही तय करने की जरूरत बताई।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
पीठ की अध्यक्षता कर रहे जस्टिस जेबी पारदीवाला ने कहा कि पार्क, बस और दूसरे सार्वजनिक स्थानों को खराब रोशनी, कमजोर निगरानी और जरूरी प्रशासनिक सुविधाओं की कमी के कारण खतरनाक स्थान नहीं बनने दिया जा सकता।
अदालत ने कहा कि ऐसी घटनाओं के सामने आने के बाद केवल दुख जताना और पीड़ित परिवार के साथ एकजुटता दिखाना पर्याप्त नहीं है। व्यवस्था की कमियों की पहचान करने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की जरूरत है।
सुप्रीम कोर्ट ने इन घटनाओं और उनके बाद सामने आई सुरक्षा व्यवस्था की कमियों की जांच के लिए स्वतः संज्ञान का मामला दर्ज करने का निर्देश दिया है
चलती बस की घटना का विशेष रूप से जिक्र
सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा से दिल्ली की ओर जा रही एक स्लीपर बस में 16 वर्षीय नाबालिग के साथ हुई कथित सामूहिक यौन हिंसा की घटना का विशेष रूप से जिक्र किया।
पुलिस के अनुसार, चार अगस्त को नाबालिग बारिश और अंधेरे के बीच ग्रेटर नोएडा के परी चौक क्षेत्र में उतरी थी। इसके बाद वह एक स्लीपर बस में सवार हो गई। आरोप है कि बस के ड्राइवर और कंडक्टर ने उसके साथ यौन हिंसा की।
रिपोर्ट के मुताबिक, बस करीब 47 किलोमीटर तक चलती रही और बाद में नाबालिग को दिल्ली के कश्मीरी गेट के पास छोड़ दिया गया। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था।
बंद था बस का CCTV
मामले की जांच के दौरान बस की निगरानी और सड़क सुरक्षा व्यवस्था में कई गंभीर कमियां सामने आईं। बताया गया कि बस में लगा CCTV घटना के समय काम नहीं कर रहा था।
बस पर पहले से 11 ट्रैफिक चालान होने की जानकारी भी सामने आई। इसके बावजूद बस दिल्ली-NCR के कई पुलिस चेक-प्वाइंट से गुजरी, लेकिन उसे जांच के लिए नहीं रोका गया।
इन तथ्यों के सामने आने के बाद सवाल उठ रहा है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों की पहचान और जांच के लिए बनाई गई व्यवस्था जमीन पर कितनी प्रभावी है। जांच अधिकारियों ने बाहरी CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग के आधार पर बस और आरोपियों का पता लगाया था।
दिल्ली के पार्क की घटना का भी जिक्र
सुप्रीम कोर्ट के सामने दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के एक पार्क में 17 वर्षीय नाबालिग से कथित सामूहिक यौन हिंसा का मामला भी रखा गया। आरोप है कि तीन लोगों ने खुद को पुलिसकर्मी बताकर घटना को अंजाम दिया।
इस घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने खराब रोशनी वाले क्षेत्रों, बंद पड़े CCTV कैमरों और सुनसान सार्वजनिक स्थानों की पहचान करने के निर्देश दिए थे। पुलिस को इन स्थानों पर निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए कहा गया था।
दोनों घटनाओं ने सार्वजनिक परिवहन, पार्कों और सुनसान क्षेत्रों में महिलाओं तथा नाबालिगों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस चेक-प्वाइंट पर क्यों नहीं रोकी गई बस?
स्लीपर बस का कई पुलिस चेक-प्वाइंट से बिना जांच के गुजर जाना इस मामले का सबसे गंभीर पहलू माना जा रहा है। बस में CCTV का बंद होना और उस पर पहले से कई ट्रैफिक चालान होना भी निगरानी व्यवस्था की कमजोरी दिखाता है।
अब यह जांच का विषय होगा कि बस के दस्तावेज और सुरक्षा उपकरणों की आखिरी बार जांच कब हुई थी। यह भी पता लगाया जाना जरूरी होगा कि चेक-प्वाइंट पर तैनात अधिकारियों ने बस को क्यों नहीं रोका।
सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई से दिल्ली, उत्तर प्रदेश और NCR क्षेत्र की पुलिस तथा परिवहन विभागों की जिम्मेदारी भी जांच के दायरे में आ सकती है।
केवल सख्त कानून काफी क्यों नहीं?
निर्भया मामले के बाद यौन अपराधों के लिए कानूनों और सजा को सख्त किया गया था। इसके बावजूद महिलाओं और नाबालिगों के खिलाफ गंभीर अपराधों का सामने आना सुरक्षा व्यवस्था तथा कानून के पालन पर बड़ा सवाल है।
सुप्रीम कोर्ट पहले भी इस बात पर चिंता जता चुका है कि सख्त सजा का प्रावधान होने के बाद भी यौन हिंसा की घटनाओं में अपेक्षित कमी नहीं आई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कानून बनाने के साथ सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन, चालू CCTV कैमरे, रोशनी की व्यवस्था, नियमित वाहन जांच, पुलिस की सक्रिय निगरानी और मामलों की तेज सुनवाई भी आवश्यक है।
अधिकारियों की जवाबदेही तय करने पर जोर
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा अधिकारियों की जवाबदेही से जुड़ा है। अदालत ने साफ संकेत दिया कि घटना के बाद केवल संवेदना जताना पर्याप्त नहीं होगा।
यदि CCTV खराब था, बस नियमों का उल्लंघन कर रही थी और वह कई चेक-प्वाइंट से बिना जांच के गुजर गई तो हर स्तर पर जिम्मेदारी तय करनी होगी। अदालत के स्वतः संज्ञान लेने के बाद संबंधित सरकारों और विभागों से विस्तृत जवाब मांगा जा सकता है।
निर्भया कांड के बाद कानून बदले और सजा सख्त हुई, लेकिन दिल्ली-NCR की इन घटनाओं ने व्यवस्था की पुरानी कमजोरियां फिर सामने ला दीं। सुप्रीम कोर्ट का स्वतः संज्ञान केवल आरोपियों की सजा तक सीमित नहीं है—अब बंद CCTV, विफल चेक-प्वाइंट और लापरवाह अधिकारियों की जवाबदेही भी तय करनी होगी।