SIR विवाद के बीच कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने सपा और कांग्रेस पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि किसी पात्र मतदाता का नाम सूची से नहीं हटना चाहिए, लेकिन चुनाव प्रक्रिया पर आरोप लगाने वालों को प्रमाण भी देना होगा।
वोटर लिस्ट पर विपक्ष के आरोपों से गरमाई UP की राजनीति, राजभर ने पूछा—जीतने पर चुनाव प्रक्रिया सही और हारने पर गलत कैसे?
SIR विवाद पर ओम प्रकाश राजभर ने सपा-कांग्रेस से आरोपों के प्रमाण देने को कहा
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | उत्तर प्रदेश डेस्क | 28 सितंबर 2026
खबर में खास
SIR विवाद में ओम प्रकाश राजभर की एंट्री
बोले—किसी पात्र मतदाता का नाम नहीं हटना चाहिए
सपा-कांग्रेस से आरोपों के प्रमाण देने की मांग
EVM और चुनाव आयोग के विरोध पर भी उठाए सवाल
अखिलेश यादव, मायावती और चंद्रशेखर पर भी बोला हमला
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर जारी राजनीतिक विवाद में अब सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर भी उतर आए हैं। उन्होंने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष को आरोप लगाने के साथ प्रमाण भी सामने रखने चाहिए।
राजभर ने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना और विरोध करना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन विरोध लोकतांत्रिक तरीके से होना चाहिए। यदि किसी पात्र मतदाता का नाम मतदाता सूची से हटाया गया है तो उसकी पूरी जानकारी निर्वाचन आयोग को दी जानी चाहिए।
‘एक भी पात्र मतदाता का नाम नहीं कटना चाहिए’
ओम प्रकाश राजभर ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मतदाता सूची से किसी भी पात्र मतदाता का नाम नहीं हटना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति का नाम गलत तरीके से हटा दिया गया है तो राजनीतिक दलों और संबंधित मतदाता को इसकी शिकायत निर्वाचन आयोग से करनी चाहिए।
उन्होंने विपक्ष से कहा, “विरोध करना है तो कीजिए, लेकिन लोकतांत्रिक तरीके से कीजिए। आरोप लगा रहे हैं तो प्रमाण भी दीजिए।”
राजभर ने दावा किया कि केवल बयान देने से किसी आरोप को सही नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि विपक्ष जिन स्थानों पर मतदाता सूची में गड़बड़ी की बात कर रहा है, वहां के नाम और दस्तावेज चुनाव आयोग के सामने रखे जाने चाहिए।
सपा-कांग्रेस से पूछा चुनावी जीत का सवाल
राजभर ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस से पूछा कि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में दोनों पार्टियों को उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में सीटें मिली थीं। उस समय उन्होंने चुनाव प्रक्रिया पर इतने गंभीर सवाल क्यों नहीं उठाए?
उन्होंने कहा कि जब विपक्षी पार्टियां चुनाव जीतती हैं तो चुनाव प्रक्रिया पर भरोसा जताती हैं, लेकिन हार मिलने पर EVM और निर्वाचन आयोग को जिम्मेदार बताने लगती हैं। राजभर के अनुसार, राजनीतिक दलों को चुनाव परिणाम अपने पक्ष में आने या नहीं आने के आधार पर चुनाव प्रक्रिया पर सवाल नहीं उठाना चाहिए।
हालांकि, विपक्ष का कहना है कि किसी चुनाव में जीत मिलने से दूसरे क्षेत्र में सामने आई कथित गड़बड़ी पर सवाल उठाने का अधिकार खत्म नहीं हो जाता। विपक्ष लगातार मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहा है।
मृत और स्थान बदल चुके मतदाताओं पर क्या बोले?
ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि जिन मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है या जो स्थायी रूप से किसी दूसरे विधानसभा क्षेत्र में चले गए हैं, उनके नाम मतदाता सूची से हटाने की प्रक्रिया होनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे नामों का इस्तेमाल कथित रूप से फर्जी मतदान के लिए किया जाता रहा है। हालांकि, राजभर ने अपने इस आरोप के समर्थन में कोई विस्तृत आंकड़ा या प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया।
राजभर ने कहा कि मतदाता सूची को सही और साफ रखना निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी है, लेकिन इस प्रक्रिया का विरोध केवल राजनीतिक लाभ के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
मायावती की बैलेट पेपर वाली मांग पर जवाब
बसपा अध्यक्ष मायावती ने EVM के स्थान पर बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की है। इस पर राजभर ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाले विपक्षी सांसदों और विधायकों को पहले अपने पदों से इस्तीफा देना चाहिए।
राजभर का कहना है कि जो नेता इसी चुनाव प्रक्रिया से जीतकर संसद और विधानसभा पहुंचे हैं, उन्हें अपनी जीत स्वीकार करने के बाद पूरी व्यवस्था को गलत नहीं बताना चाहिए।
हालांकि, किसी निर्वाचित सांसद या विधायक के लिए चुनाव सुधार की मांग करने से पहले इस्तीफा देना कानूनी रूप से जरूरी नहीं है। राजभर का बयान विपक्ष पर किया गया एक राजनीतिक हमला है।
चंद्रशेखर आजाद पर भी साधा निशाना
ओम प्रकाश राजभर ने नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद की चुनावी जीत को लेकर भी दावा किया। उन्होंने उनकी जीत को विपक्षी उम्मीदवारों के चुनावी समीकरण से जोड़ा। राजभर ने इस दावे के समर्थन में कोई विस्तृत प्रमाण नहीं दिया।
इससे पहले मायावती भी चंद्रशेखर आजाद की जीत और उनकी राजनीति को लेकर गंभीर आरोप लगा चुकी हैं। चंद्रशेखर आजाद और उनकी पार्टी ने ऐसे आरोपों को राजनीतिक हमला बताते हुए खारिज किया है।
‘अखिलेश जी, आपका नुकसान हो रहा है’
वक्फ संपत्तियों के मुद्दे पर राजभर ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड की संपत्तियों की जांच होने के बाद वास्तविक स्थिति सामने आ जाएगी।
नागरिकता संशोधन कानून पर भी उन्होंने सपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। राजभर ने कहा कि विपक्षी दल पहले नागरिकता जाने का दावा कर रहे थे, लेकिन कानून लागू होने के बाद उन्हें ऐसे व्यक्ति का नाम बताना चाहिए जिसकी नागरिकता छीनी गई हो।
अखिलेश यादव को निशाने पर लेते हुए राजभर ने कहा, “अखिलेश जी, आपका नुकसान हो रहा है।” उन्होंने समाजवादी पार्टी की PDA रणनीति पर भी परिवारवाद का आरोप लगाया। सपा पहले भी इस तरह के आरोपों को खारिज करती रही है।
SIR पर जारी है बड़ा राजनीतिक विवाद
SIR को लेकर विपक्ष का आरोप है कि इसके माध्यम से पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा सकते हैं। विपक्षी दलों ने पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और मतदाता सूची में किए गए बदलावों की स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है।
दूसरी तरफ भाजपा और उसके सहयोगी दलों का कहना है कि मतदाता सूची को सही बनाने के लिए मृत, स्थान बदल चुके और अपात्र मतदाताओं के नाम हटाना आवश्यक है। उनका आरोप है कि विपक्ष बिना प्रमाण चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहा है।
SIR विवाद अब केवल मतदाता सूची तक सीमित नहीं रहा, बल्कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता और विपक्ष के आरोपों की विश्वसनीयता की लड़ाई बन गया है। राजभर ने सपा-कांग्रेस से प्रमाण मांगे हैं, लेकिन निष्पक्ष प्रक्रिया साबित करने की जिम्मेदारी निर्वाचन आयोग की भी है। अब सवाल यही है—क्या दोनों पक्ष अपने दावों के समर्थन में ठोस सबूत जनता के सामने रखेंगे?