TMC के नाम और चुनाव चिह्न पर छिड़ी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। अदालत ने चुनाव आयोग से पूछा है कि इस विवाद पर अंतिम फैसला लेने में कितना समय लगेगा। ममता बनर्जी ने आयोग के अंतरिम आदेश को चुनौती दी है।
TMC की असली पहचान को लेकर छिड़ी लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। सुप्रीम कोर्ट के सवाल के बाद चुनाव आयोग पर विवाद का जल्द निपटारा करने का दबाव बढ़ गया है। अब आयोग की समयसीमा और अगले अदालती आदेश पर पूरे बंगाल की नजर टिकी है।
TMC के नाम और चुनाव चिह्न विवाद पर ममता बनर्जी की याचिका सुनते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से अंतिम फैसले की समयसीमा मांगी।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | राष्ट्रीय डेस्क | 24 सितंबर 2026
खबर में खास
ममता बनर्जी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
चुनाव आयोग से मांगी गई अंतिम फैसले की समयसीमा
TMC का नाम और ‘फूल-घास’ चुनाव चिह्न फिलहाल फ्रीज
दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को मिले अलग नाम और चुनाव चिह्न
बंगाल के आगामी उपचुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल
नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस के नाम और उसके पारंपरिक चुनाव चिह्न को लेकर जारी विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग से पूछा कि इस मामले में अंतिम फैसला लेने में उसे कितना समय लगेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से विवाद के निपटारे के लिए एक संभावित और उचित समयसीमा बताने को कहा है। हालांकि, अदालत ने अभी TMC का मूल नाम या ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न ममता बनर्जी के गुट को वापस देने का कोई आदेश नहीं दिया है।
ममता बनर्जी ने क्यों दायर की याचिका?
चुनाव आयोग ने TMC के दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच पार्टी पर अधिकार को लेकर विवाद सामने आने के बाद ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और उसके पारंपरिक ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न को अंतरिम रूप से फ्रीज कर दिया था।
आयोग के इसी फैसले के खिलाफ ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने चुनाव आयोग के आदेश को चुनौती देते हुए पार्टी का मूल नाम और चुनाव चिह्न वापस दिए जाने की मांग की है।
कपिल सिब्बल ने उठाए फैसले पर सवाल
ममता बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने चुनाव आयोग के फैसले और उसके समय पर सवाल उठाया। उनका कहना था कि पश्चिम बंगाल में उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू होने के बाद पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न फ्रीज करने का आदेश दिया गया।
सुनवाई के दौरान यह भी कहा गया कि 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसी कारण अदालत ने तत्काल चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने के स्थान पर चुनाव आयोग से मुख्य विवाद पर अंतिम फैसला लेने की समयसीमा मांगी है।
दोनों गुटों को मिले नए नाम और सिंबल
चुनाव आयोग ने अंतरिम व्यवस्था के तहत ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न दिया है।
वहीं, विरोधी गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है। यह केवल अस्थायी व्यवस्था है। मूल पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर किस गुट का अधिकार होगा, इसका अंतिम फैसला चुनाव आयोग करेगा।
बंगाल की राजनीति पर पड़ेगा बड़ा असर
‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न लंबे समय से ममता बनर्जी और TMC की राजनीतिक पहचान रहा है। ऐसे में इस चिह्न का फ्रीज होना केवल कानूनी विवाद नहीं है। इसका सीधा असर पार्टी कार्यकर्ताओं, मतदाताओं और आगामी चुनावों की रणनीति पर पड़ सकता है।
अब चुनाव आयोग को दोनों गुटों के संगठनात्मक समर्थन, दस्तावेजों और पार्टी पर अधिकार से जुड़े दावों की जांच करनी होगी। आयोग की ओर से दी जाने वाली समयसीमा के बाद सुप्रीम कोर्ट इस मामले में आगे की सुनवाई कर सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के सीधे सवाल ने TMC के नाम और चुनाव चिह्न की लड़ाई को निर्णायक मोड़ पर पहुंचा दिया है। अब चुनाव आयोग का जवाब तय करेगा कि यह विवाद जल्द सुलझेगा या कानूनी लड़ाई और लंबी चलेगी। अंतिम फैसले का असर केवल ममता बनर्जी के गुट पर नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल की पूरी राजनीति पर दिखाई दे सकता है।