वृंदावन के गुरु कृपा कुंज आश्रम में प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण की चौथी मंजिल से गिरने के बाद मौत हो गई। कमरे से मिले सामान, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और CCTV में दर्ज आखिरी 11 मिनट की पुलिस जांच कर रही है।
कमरे से निकले, छत पर पहुंचे और 11 मिनट बाद नीचे गिरे; खून के निशान वाले ग्राइंडर ने उलझाया पूरा मामला
वृंदावन के गुरु कृपा कुंज आश्रम में रसिक दुलारी शरण की संदिग्ध मौत की जांच करती पुलिस
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | उत्तर प्रदेश डेस्क | 28 सितंबर 2026
खबर में खास
गुरु कृपा कुंज आश्रम में युवा साधु की संदिग्ध मौत
CCTV में दर्ज हुए घटना से पहले के आखिरी 11 मिनट
कमरे से मिला खून के निशान वाला ग्राइंडर
मोबाइल फोन पर लगातार बजता मिला भजन
परिवार ने CBI जांच की मांग उठाई
पुलिस ने सभी संभावनाएं खुली रखकर शुरू की जांच
वृंदावन के गुरु कृपा कुंज आश्रम में प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला लगातार उलझता जा रहा है। 25 सितंबर की सुबह वह आश्रम की चार मंजिला इमारत से नीचे गिर गए थे।
गंभीर हालत में उन्हें सर्वोदय अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस शुरुआती CCTV फुटेज के आधार पर आत्महत्या की आशंका की जांच कर रही है। हालांकि, उनके कमरे से मिले सामान, शरीर पर पाई गई चोटों और परिवार के आरोपों के कारण दूसरी संभावनाओं को भी खुला रखा गया है।
आखिरी 11 मिनट में क्या हुआ?
रिपोर्ट के मुताबिक, आश्रम में लगे CCTV कैमरे में रसिक दुलारी शरण के आखिरी 11 मिनट रिकॉर्ड हुए हैं। सुबह करीब 10:25 बजे वह अपने कमरे से बाहर निकले और चौथी मंजिल की छत की तरफ गए।
फुटेज में वह कुछ समय तक छत पर बैठे दिखाई देते हैं। करीब 10:36 बजे उनके इमारत से नीचे गिरने की घटना हुई। बताया गया है कि इमारत की ऊंचाई लगभग 40 फीट है।
पुलिस अब इन 11 मिनटों के फुटेज की बारीकी से जांच कर रही है। यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि छत पर पहुंचने के बाद उनका व्यवहार कैसा था, क्या उस दौरान कोई दूसरा व्यक्ति वहां मौजूद था और घटना से ठीक पहले क्या हुआ था।
कमरे में मिला खून के निशान वाला ग्राइंडर
जांच के दौरान रसिक दुलारी शरण के कमरे से एक ग्राइंडर बरामद हुआ। पुलिस के अनुसार, ग्राइंडर पर खून जैसे निशान मिले हैं। उसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।
फॉरेंसिक जांच से पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि निशान वास्तव में खून के हैं या नहीं। यदि खून की पुष्टि होती है तो DNA जांच से यह पता लगाया जाएगा कि वह किसका था।
पुलिस यह भी जांच रही है कि ग्राइंडर का इस्तेमाल किस काम के लिए किया गया था और उसका पूरी घटना से कोई संबंध है या नहीं। जांच रिपोर्ट आने से पहले इसे मौत का कारण या किसी अपराध का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
मोबाइल फोन पर बज रहा था भजन
घटना के बाद पुलिस जब रसिक दुलारी के कमरे में पहुंची तो उनका मोबाइल फोन वहीं मिला। रिपोर्ट के अनुसार, फोन पर उस समय भी भजन चल रहा था।
पुलिस ने मोबाइल फोन को जांच के लिए अपने कब्जे में ले लिया है। फोन की कॉल डिटेल, संदेश, इंटरनेट गतिविधि और घटना से पहले संपर्क में रहे लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है।
यह भी जांचा जा रहा है कि भजन कब चलाया गया था और घटना के समय मोबाइल फोन कमरे में ही था या किसी दूसरे स्थान पर रखा गया था।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कई चोटों का जिक्र
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में शरीर पर कई गंभीर चोटें पाए जाने की बात सामने आई है। शुरुआती रिपोर्ट में अधिक रक्तस्राव को मौत का प्रमुख कारण बताया गया है।
अब पुलिस पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में दर्ज चोटों का क्रम समझने का प्रयास कर रही है। जांच का महत्वपूर्ण सवाल यह है कि कौन-सी चोटें इमारत से गिरने के कारण लगीं और क्या कुछ चोटें घटना से पहले की थीं।
पुलिस फॉरेंसिक रिपोर्ट, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और CCTV फुटेज को एक साथ जोड़कर घटना का पूरा क्रम तैयार कर रही है।
कौन थे रसिक दुलारी शरण?
पुलिस के अनुसार, रसिक दुलारी शरण का मूल नाम दीपक लोधी था। वह मध्य प्रदेश के जबलपुर के रहने वाले थे। करीब दो वर्ष पहले वह वृंदावन आए थे।
उन्होंने संत प्रेमानंद महाराज से दीक्षा ली थी, जिसके बाद उन्हें रसिक दुलारी शरण नाम मिला। वह गुरु कृपा कुंज आश्रम में रहकर धार्मिक जीवन का पालन कर रहे थे।
घटना के बाद उनका परिवार भी वृंदावन पहुंचा और मौत के हालात पर कई सवाल उठाए।
परिवार ने आत्महत्या की आशंका को नकारा
रसिक दुलारी शरण के परिवार ने आत्महत्या की आशंका को स्वीकार करने से इनकार किया है। परिजनों का कहना है कि घटना की परिस्थितियां संदिग्ध हैं और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
परिवार का आरोप है कि उनके आश्रम में रहने के दौरान मुलाकात और संपर्क आसान नहीं था। परिजनों के अनुसार, जब वे वृंदावन आकर उनसे मिलने का प्रयास करते थे तो कई बार इंतजार करना पड़ता था।
परिवार ने पूरे मामले की CBI जांच कराने की मांग की है। हालांकि, परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
चार बातों पर केंद्रित पुलिस की जांच
पुलिस की जांच फिलहाल चार महत्वपूर्ण बिंदुओं पर केंद्रित बताई जा रही है। पहला, आश्रम और आसपास लगे CCTV कैमरों की पूरी रिकॉर्डिंग। दूसरा, कमरे से मिले ग्राइंडर और अन्य सामान की फॉरेंसिक जांच।
तीसरा, मोबाइल फोन का डेटा और घटना से पहले हुई बातचीत। चौथा, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में दर्ज चोटों का क्रम और उनकी वजह।
पुलिस यह भी पता लगा रही है कि घटना से पहले रसिक दुलारी के व्यवहार में कोई बदलाव आया था या नहीं। आश्रम में उनके साथ रहने वाले लोगों से भी जानकारी ली जा सकती है।
अभी किसी नतीजे पर नहीं पहुंची पुलिस
CCTV फुटेज के आधार पर पुलिस शुरुआती स्तर पर आत्महत्या की आशंका की जांच कर रही है। लेकिन कमरे में मिले ग्राइंडर, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में दर्ज चोटों और परिवार की ओर से उठाए गए सवालों के कारण मामले को सीधा नहीं माना जा रहा।
इस मामले में संत प्रेमानंद महाराज या आश्रम प्रबंधन की किसी भूमिका की पुष्टि नहीं हुई है। जांच पूरी होने और वैज्ञानिक रिपोर्ट सामने आने से पहले किसी व्यक्ति या संस्था को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।
रसिक दुलारी शरण के कमरे से निकलने और इमारत से गिरने के बीच केवल 11 मिनट का अंतर था, लेकिन इन्हीं 11 मिनटों में उनकी मौत का रहस्य छिपा है। अब CCTV, मोबाइल डेटा, पोस्टमॉर्टम और ग्राइंडर की फॉरेंसिक रिपोर्ट बताएगी कि यह आत्महत्या थी, दुर्घटना थी या इसके पीछे कोई दूसरी कहानी है।