यूपी पंचायत चुनाव कब होंगे? हाईकोर्ट ने दी 3 महीने की डेडलाइन, OBC आरक्षण पर बड़ा निर्देश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी में ग्राम पंचायत चुनाव तीन महीने में पूरे कराने का आदेश दिया। मौजूदा 27% OBC आरक्षण जारी रहेगा। आयोग की रिपोर्ट लंबित होने पर आरक्षित सीटें सामान्य नहीं होंगी। मतदान की तारीखें अभी घोषित नहीं हुई हैं।
UP Panchayat Election 2026: हाईकोर्ट ने ग्राम पंचायत चुनाव 3 महीने में कराने का आदेश दिया। जानिए 27% OBC आरक्षण, मौजूदा प्रधानों की स्थिति और चुनाव की तारीख कब आएगी।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | लखनऊ/प्रयागराज | 16 अक्टूबर 2026
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी ग्राम पंचायत चुनाव तीन महीने में पूरे कराने और मौजूदा 27% OBC आरक्षण बनाए रखने का निर्देश दिया।
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव का इंतजार कर रहे लाखों मतदाताओं और संभावित उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण खबर है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को तीन महीने के भीतर ग्राम पंचायत चुनाव पूरे कराने का आदेश दिया है। अदालत ने साफ किया है कि OBC आयोग की रिपोर्ट लंबित होने के कारण चुनाव अनिश्चितकाल तक नहीं टाले जा सकते।
लेकिन सवाल है कि क्या अब जनवरी 2027 तक चुनाव हो जाएंगे, OBC आरक्षण कैसे लागू होगा और पुराने ग्राम प्रधानों का क्या होगा?
खबर में खास
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 14 अक्टूबर को ग्राम पंचायत चुनाव तीन महीने में पूरे कराने का आदेश दिया।
OBC के लिए मौजूदा 27 प्रतिशत आरक्षण बरकरार रहेगा।
आयोग की रिपोर्ट लंबित होने के कारण OBC आरक्षित सीटों को सामान्य नहीं किया जा सकेगा।
पुराने ग्राम प्रधानों की प्रशासक नियुक्ति रद्द नहीं हुई, लेकिन कानूनी समयसीमा लागू रहेगी।
हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव पर क्या आदेश दिया?
न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने दशरथ यादव और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया।
अदालत ने राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को तत्काल चुनाव की तैयारियां शुरू करने, कार्यक्रम घोषित करने और आदेश की तारीख से तीन महीने में ग्राम पंचायत चुनाव पूरे करने को कहा।
इसके अनुसार, यदि आदेश यथावत रहता है तो जनवरी 2027 के मध्य तक चुनाव प्रक्रिया पूरी करने की समयसीमा होगी।
हालांकि, अभी वास्तविक मतदान की तारीखें घोषित नहीं हुई हैं।
आखिर छह महीने से क्यों अटके हैं पंचायत चुनाव?
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2021 में ग्राम पंचायत चुनाव हुए थे। निर्वाचित ग्राम पंचायतों का पांच वर्ष का कार्यकाल मई 2026 में समाप्त हो गया।
इसके बावजूद चुनाव नहीं कराए जा सके। मुख्य विवाद अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षण निर्धारित करने की प्रक्रिया को लेकर रहा।
राज्य सरकार ने 18 मई 2026 को सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति राम अवतार सिंह की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग गठित किया था।
आयोग को विभिन्न जिलों से सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक प्रतिनिधित्व संबंधी आंकड़े जुटाने की जिम्मेदारी मिली थी।
अदालत में आयोग ने लगभग 60 प्रतिशत काम पूरा होने की जानकारी दी। हालांकि, हाईकोर्ट ने प्रस्तुत सर्वेक्षण की गुणवत्ता और पर्याप्तता पर भी सवाल उठाए।
OBC की 27 प्रतिशत आरक्षित सीटों का क्या होगा?
हाईकोर्ट के फैसले का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा OBC आरक्षण से जुड़ा है।
अदालत ने निर्देश दिया कि आगामी चुनाव मौजूदा आरक्षण व्यवस्था के अनुसार कराए जाएं, जिसमें OBC के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण शामिल है।
सिर्फ आयोग की रिपोर्ट लंबित होने के आधार पर OBC के लिए आरक्षित सीटों को सामान्य श्रेणी में नहीं बदला जा सकता।
अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिलाओं के लिए लागू आरक्षण भी कानून के अनुसार जारी रहेगा।
हालांकि, OBC आयोग अपना अध्ययन जारी रखेगा और भविष्य में उसकी सिफारिशों के आधार पर कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
पुराने ग्राम प्रधानों का क्या होगा?
मई 2026 में कार्यकाल समाप्त होने के बाद राज्य सरकार ने निवर्तमान ग्राम प्रधानों को अस्थायी रूप से प्रशासक बनाने का फैसला किया था।
इस व्यवस्था को भी हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।
अदालत ने नियुक्तियों को रद्द करने की मांग स्वीकार नहीं की। हालांकि, स्पष्ट किया कि तीन महीने में चुनाव कराने का निर्देश प्रशासकों का कार्यकाल कानूनी सीमा से आगे नहीं बढ़ाता।
इसका अर्थ है कि अस्थायी प्रशासन कानून के अनुसार चलेगा और निर्वाचित पंचायतों की जगह स्थायी व्यवस्था नहीं बन सकता।
चुनाव लड़ने वालों और मतदाताओं को अब क्या करना चाहिए?
प्रधान, वार्ड सदस्य और पंचायत चुनाव से जुड़े संभावित उम्मीदवारों के लिए अब राज्य निर्वाचन आयोग की अगली घोषणा महत्वपूर्ण होगी।
निर्वाचन आयोग ने अदालत में बताया कि मतदाता सूची 10 जून 2026 को प्रकाशित की जा चुकी है।
हालांकि, नामांकन की तारीख, मतदान का कार्यक्रम, सीटवार आरक्षण और उम्मीदवारों के लिए जरूरी निर्देश आधिकारिक अधिसूचना से ही स्पष्ट होंगे।
मतदाताओं को अपनी प्रविष्टि की जानकारी आयोग की आधिकारिक मतदाता सूची से जाँचनी चाहिए।
योगी सरकार और विपक्ष की क्या प्रतिक्रिया है?
पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत किया और आदेश का अध्ययन करने की बात कही।
सरकार का पक्ष रहा है कि OBC आरक्षण की कानूनी प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है।
दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने चुनाव में देरी पर सरकार की आलोचना की है। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार चुनाव टाल रही थी। सरकार की मंशा को लेकर ये राजनीतिक आरोप हैं।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हाईकोर्ट ने ग्राम पंचायत चुनाव के लिए तीन महीने की समयसीमा निर्धारित कर दी है। अब सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग के अगले कदम से चुनाव कार्यक्रम की स्थिति स्पष्ट होगी।