AMU में 17 दिन से छात्रों का धरना, 8 साल से चुनाव नहीं; रात में छात्राओं ने किया प्रदर्शन

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग को लेकर आंदोलन जारी है। भूख हड़ताल पर बैठे छात्र यासिर फहद की तबीयत बिगड़ने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन उन्हें अस्पताल ले जाना चाहता था, लेकिन विरोध कर रहे छात्रों ने रोक दिया।

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में 21 सितंबर से छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर प्रदर्शन चल रहा है। छात्र नेता यासिर फहद की भूख हड़ताल के बीच छात्राओं ने देर रात हॉस्टल में प्रदर्शन किया और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारे लगाए।

'एक चाय, दो समोसा… वीसी पर अब नहीं भरोसा', AMU में क्यों भड़का छात्रों का विरोध?

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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर छात्र धरने पर बैठे हैं।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | उत्तर प्रदेश डेस्क | 8 अक्टूबर 2026
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग को लेकर पिछले 17 दिनों से आंदोलन चल रहा है। विश्वविद्यालय में वर्ष 2018-19 के बाद से छात्रसंघ चुनाव नहीं हुए हैं। इसी बात को लेकर छात्रों में नाराजगी है। इस बीच भूख हड़ताल पर बैठे छात्र यासिर फहद की तबीयत बिगड़ने और उन्हें अस्पताल ले जाने की कोशिश के बाद परिसर में तनाव बढ़ गया। छात्राओं ने भी देर रात विरोध प्रदर्शन किया और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारे लगाए।

खबर में खास

  • AMU में 21 सितंबर से छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर आंदोलन चल रहा है।
  • विश्वविद्यालय में 2018-19 के बाद से छात्रसंघ चुनाव नहीं हुए हैं।

  • उर्दू विभाग के छात्र यासिर फहद अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।

  • तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल ले जाने पहुंची टीम को छात्रों ने रोक दिया।

  • छात्राओं ने देर रात हॉस्टल और अगले दिन परिसर में विरोध प्रदर्शन किया।

  • प्रदर्शन के दौरान कुलपति के खिलाफ नारेबाजी हुई और छात्रसंघ चुनाव जल्द कराने की मांग उठी।

5. पूरी खबर

आठ साल से चुनाव नहीं, इसलिए धरने पर बैठे छात्र

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव की मांग एक बार फिर जोर पकड़ रही है। छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय में लंबे समय से चुनाव नहीं कराए गए हैं, जिसके कारण उन्हें अपनी समस्याएं प्रशासन तक पहुंचाने के लिए चुने हुए प्रतिनिधि नहीं मिल रहे हैं।
विश्वविद्यालय में आखिरी छात्रसंघ चुनाव 2018-19 के शैक्षणिक सत्र में हुए थे। इसके बाद से चुनाव नहीं होने को लेकर छात्र लगातार सवाल उठाते रहे हैं।
21 सितंबर से शुरू हुए आंदोलन में छात्र चुनाव की तारीख घोषित करने और चुनाव प्रक्रिया शुरू करने की मांग कर रहे हैं।

भूख हड़ताल पर बैठे यासिर फहद की तबीयत बिगड़ी

AMU के उर्दू विभाग में पढ़ने वाले छात्र यासिर फहद लंबे समय से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। मंगलवार रात उनकी तबीयत बिगड़ने की जानकारी विश्वविद्यालय प्रशासन को मिली थी।
इसके बाद विश्वविद्यालय की सुरक्षा टीम और मेडिकल स्टाफ एंबुलेंस लेकर प्रदर्शन स्थल पहुंचे। प्रशासन का कहना था कि छात्र की सेहत को देखते हुए उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाना जरूरी है।
हालांकि, वहां मौजूद प्रदर्शनकारी छात्रों ने उन्हें अस्पताल ले जाने का विरोध किया। इसके बाद टीम बिना उन्हें अस्पताल पहुंचाए वापस लौट गई।

रात में हॉस्टलों से बाहर निकलीं छात्राएं

यासिर फहद को अस्पताल ले जाने की कोशिश की जानकारी मिलते ही छात्राओं में भी नाराजगी फैल गई।
अब्दुल्ला हॉल, बेगम हॉल और आईजी हॉल की छात्राओं ने देर रात प्रदर्शन किया। छात्राएं मोबाइल की टॉर्च जलाकर विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारे लगाने लगीं।
कुछ छात्राओं द्वारा हॉस्टल का ताला तोड़े जाने की बात भी सामने आई है, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अगली सुबह छात्राओं ने विरोध मार्च निकाला और छात्रसंघ चुनाव जल्द कराने की मांग दोहराई।

'एक चाय, दो समोसा…' जैसे नारे गूंजे

छात्राओं के विरोध मार्च के दौरान विश्वविद्यालय की कुलपति के खिलाफ अलग-अलग नारे लगाए गए।
प्रदर्शनकारी छात्रों ने 'वी वांट यूनियन' और 'बोल इंकलाब' जैसे नारे लगाए। इसके साथ ही कुलपति पर भरोसा न होने की बात कहते हुए चाय और समोसे वाला नारा भी लगाया गया।
छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को बातचीत के साथ छात्रसंघ चुनाव की तारीख भी घोषित करनी चाहिए।

छात्रसंघ चुनाव के साथ अब दूसरी मांगें भी उठीं

छात्रों का आंदोलन शुरुआत में केवल छात्रसंघ चुनाव की बहाली के लिए शुरू हुआ था।
लेकिन प्रदर्शन के दौरान छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों और प्रशासन से हुए विवाद के बाद अन्य मांगें भी उठने लगी हैं।
छात्र प्रतिनिधियों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को चुनाव की स्पष्ट समयसीमा तय करनी चाहिए।
वहीं, छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR और प्रदर्शन से जुड़े मामलों को लेकर भी आंदोलनकारी सवाल उठा रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रदर्शन से जुड़ी घटनाओं में कुल 18 छात्रों पर मामले दर्ज किए गए हैं

विश्वविद्यालय प्रशासन का क्या कहना है?

विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि भूख हड़ताल पर बैठे छात्र को अस्पताल पहुंचाने की कोशिश उसकी खराब तबीयत को देखते हुए की गई थी।
AMU के प्रॉक्टर नावेद खान के मुताबिक, मेडिकल टीम भेजने का उद्देश्य छात्र को जरूरी इलाज उपलब्ध कराना था।
प्रशासन और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बातचीत की कोशिश भी हुई है। हालांकि, छात्रसंघ चुनाव की नई तारीख तय होने की पुष्टि अभी नहीं हुई है।

अब आगे क्या होगा?

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन फिलहाल चर्चा में है।
एक तरफ छात्र चुनाव की तारीख घोषित करने की मांग पर अड़े हैं, तो दूसरी ओर विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने भूख हड़ताल पर बैठे छात्र की सेहत और परिसर में शांति बनाए रखने की चुनौती है।
AMU में आठ साल से छात्रसंघ चुनाव नहीं होने को लेकर छात्रों की नाराजगी बढ़ती जा रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि विश्वविद्यालय प्रशासन चुनाव की तारीख कब घोषित करेगा और छात्रों का जारी आंदोलन किस तरह समाप्त होगा।
 

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