UP MLC Election 2026: वोटिंग से पहले कार में मिले ₹2.41 लाख और वोटर स्लिप! 4 लोग हिरासत में, पैसे बांटने की तैयारी का आरोप

आजमगढ़ में शिक्षक MLC चुनाव से पहले उड़नदस्ते ने एक कार से ₹2,41,500 नकद, मतदाता पर्चियां और प्रचार सामग्री बरामद की। पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

UP MLC Election 2026: आजमगढ़ में वोटिंग से पहले कार से ₹2.41 लाख नकद और मतदाता सूची बरामद। चार लोग हिरासत में, मतदाताओं को पैसे बांटने की तैयारी का आरोप।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | लखनऊ/आजमगढ़ | 23 अक्टूबर 2026
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आजमगढ़ में शिक्षक एमएलसी चुनाव से पहले कार से ₹2,41,500 नकद और चुनाव प्रचार सामग्री बरामद हुई। चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।
उत्तर प्रदेश में शुक्रवार, 23 अक्टूबर को विधान परिषद की 11 सीटों के लिए मतदान के बीच आजमगढ़ से चुनावी आचार संहिता के कथित उल्लंघन का मामला सामने आया है। गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में वोटिंग से एक दिन पहले उड़नदस्ता टीम ने एक कार से ₹2,41,500 नकद और बड़ी मात्रा में चुनाव प्रचार सामग्री बरामद की।
पुलिस के अनुसार, कार में सवार चार लोगों से पूछताछ के दौरान मतदाताओं को रुपये बांटने की तैयारी का आरोप सामने आया। चारों को हिरासत में लेकर सिधारी थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है।
हालांकि, बरामद रकम वास्तव में मतदाताओं को बांटी गई थी, इसकी पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
खबर में खास
  • आजमगढ़ में कार से ₹2,41,500 नकद बरामद हुए।
  • कार में चुनावी पर्चे, मतदाता सूची और प्रचार सामग्री भी मिली।

  • चार लोगों को हिरासत में लेकर मुकदमा दर्ज किया गया।

  • पुलिस ने मतदाताओं को रुपये बांटने की तैयारी का आरोप लगाया।

  • मामला गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक MLC निर्वाचन क्षेत्र से संबंधित है।

  • 23 अक्टूबर को मतदान और 27 अक्टूबर को मतगणना निर्धारित है।

दौलतपुर पुलिया पर कार रोकने के बाद क्या मिला?

पुलिस के अनुसार, गुरुवार, 22 अक्टूबर की शाम एसडीएम सदर अविनाश गौतम के नेतृत्व में उड़नदस्ता टीम आजमगढ़ के सिधारी थाना क्षेत्र में दौलतपुर पुलिया के पास वाहनों की जांच कर रही थी।
इसी दौरान एक सफेद कार को रोककर तलाशी ली गई। उसकी बीच वाली सीट पर पांच सफेद झोले रखे थे।
इन झोलों में ₹2,41,500 नकद के अलावा मतदाता पर्चियां, विभिन्न विद्यालयों से संबंधित मतदाता सूचियां, चुनावी पंपलेट, हैंडबिल और मतपत्र के प्रतिरूप मिले।
पुलिस के अनुसार, झोलों पर गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र तथा एक विद्यालय प्रबंधक का नाम अंकित था।
पूछताछ में पैसे बांटने को लेकर क्या सामने आया?
पुलिस द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, कार में सवार चार लोगों ने पूछताछ में कथित तौर पर बताया कि वे लिफाफों में रुपये रखकर चुनाव प्रचार सामग्री के साथ मतदाताओं में बांटने जा रहे थे।
इसके बाद नकदी और सामग्री जब्त कर चारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई।
एसपी सिटी मानुष पारिख ने बताया कि मामला चुनावी आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन से जुड़ा है।
हालांकि, यह पुलिस का प्रारंभिक विवरण है। आरोपियों का दोष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निर्धारित होगा।
किन चार लोगों के खिलाफ हुई कार्रवाई?
पुलिस की जानकारी के अनुसार, कार्रवाई में जिन चार लोगों को हिरासत में लिया गया, उनकी पहचान सुभाष सिंह, राजेश कुमार पांडेय, शिवमोहन सिंह और शिवगोविंद सिंह के रूप में हुई है।
ये लोग आजमगढ़ और मऊ जिलों के रहने वाले बताए गए हैं।
पुलिस ने सिधारी थाने में मुकदमा दर्ज कर नकदी के स्रोत, चुनाव प्रचार सामग्री और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच शुरू की है।
अब तक उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टों में यह स्थापित नहीं हुआ है कि किसी राजनीतिक दल के नेतृत्व ने इन लोगों को रुपये बांटने का निर्देश दिया था।

शिक्षक MLC चुनाव में क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में 17 जिलों के 54,303 पंजीकृत शिक्षक मतदाता हैं।
इनमें गोरखपुर जिले के 7,289 शिक्षक मतदाता भी शामिल हैं। मतदान शुक्रवार को सुबह आठ बजे से शाम चार बजे तक निर्धारित है।
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता अपने विधान परिषद प्रतिनिधि का चुनाव करते हैं। इसलिए चुनाव के दौरान नकदी मिलने और मतदाताओं को प्रभावित करने के आरोपों की जांच महत्वपूर्ण है।

अब आगे क्या होगा?

पुलिस को यह स्पष्ट करना होगा कि बरामद ₹2.41 लाख कहां से आए, किस उद्देश्य से ले जाए जा रहे थे और उनका चुनाव में इस्तेमाल होना था या नहीं।
इसके अतिरिक्त यह भी जांच का विषय है कि बरामद चुनाव सामग्री किस प्रत्याशी या अभियान से जुड़ी थी और क्या किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है।
फिलहाल पुष्टि केवल नकदी और चुनाव सामग्री की बरामदगी, चार लोगों के खिलाफ मुकदमे और जारी जांच की है। किसी उम्मीदवार या राजनीतिक दल को जिम्मेदार ठहराने के लिए स्वतंत्र प्रमाण और जांच के निष्कर्ष आवश्यक होंगे।
 

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