प्रशांत भूषण के 'सत्ता परिवर्तन' बयान पर स्मृति-रिजिजू का पलटवार, PM मोदी का पुराना VIDEO वायरल
प्रशांत भूषण के सत्ता परिवर्तन वाले बयान पर भाजपा नेताओं ने जवाब दिया। स्मृति ईरानी ने चुनाव का रास्ता बताया, किरेन रिजिजू ने वीडियो शेयर किया और शिवराज सिंह चौहान ने PM मोदी का पुराना बयान साझा किया।
Prashant Bhushan News: सत्ता परिवर्तन पर प्रशांत भूषण के बयान से राजनीतिक विवाद बढ़ा। जानिए स्मृति ईरानी, किरेन रिजिजू, शिवराज सिंह चौहान और संबित पात्रा ने क्या कहा।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली | अपडेट: 16 अक्टूबर 2026
प्रशांत भूषण के सत्ता परिवर्तन वाले बयान पर भाजपा नेताओं ने सवाल उठाए, PM मोदी का पुराना वीडियो भी शेयर किया गया।
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण के 'सत्ता परिवर्तन' वाले बयान पर राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। पहले भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने प्रतिक्रिया दी थी। अब स्मृति ईरानी, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू, शिवराज सिंह चौहान और भाजपा सांसद संबित पात्रा ने भी उनके बयान पर सवाल उठाए हैं।
भाजपा नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक पुराना वीडियो भी साझा किया है, जिसमें वह सत्ता पाने के लिए जनता का विश्वास जीतने की बात कर रहे हैं। दूसरी ओर, प्रशांत भूषण का कहना है कि लोकतंत्र में सरकार बदलने की मांग करना नागरिकों का अधिकार है।
खबर में खास
प्रशांत भूषण ने 15 अक्टूबर को सत्ता परिवर्तन की इच्छा जताई थी।
स्मृति ईरानी ने कहा कि सरकार बदलने का फैसला जनता चुनाव के जरिए करती है।
किरेन रिजिजू और शिवराज सिंह चौहान ने भूषण के बयान की आलोचना की।
भाजपा नेताओं ने प्रधानमंत्री मोदी का पुराना वीडियो शेयर कर राजनीतिक जवाब दिया।
प्रशांत भूषण ने सत्ता परिवर्तन को लेकर क्या कहा था?
15 अक्टूबर को दिल्ली में CJP की प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रशांत भूषण ने चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा था, "जरूर रिजीम चेंज होगी। हां, हम सब चाहते हैं कि रिजीम चेंज हो।"
भूषण ने तर्क दिया कि लोकतंत्र में सरकार बदलने की मांग करना गलत नहीं है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों के साथ कथित पुलिस दुर्व्यवहार पर भी सवाल उठाए।
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में अभिजीत दीपके और छात्र नेता नेहा बोरा भी मौजूद थे।
स्मृति ईरानी ने प्रशांत भूषण को क्या जवाब दिया?
पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने प्रशांत भूषण के बयान पर आपत्ति जताई।
उन्होंने कहा कि भारत में सरकार बदलने का संवैधानिक रास्ता चुनाव है और इसका निर्णय देश की जनता करती है।
स्मृति ईरानी ने सवाल उठाया कि किसी व्यक्ति की सत्ता परिवर्तन की मांग के आधार पर करोड़ों मतदाताओं के अधिकारों को कैसे नजरअंदाज किया जा सकता है।
उनकी प्रतिक्रिया का मुख्य तर्क यह था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सत्ता परिवर्तन जनता के मतदान से होता है।
शिवराज सिंह चौहान ने शेयर किया PM मोदी का पुराना वीडियो
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी प्रशांत भूषण के बयान की आलोचना की।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक पुराना वीडियो साझा किया।
वीडियो में मोदी कह रहे हैं कि देश का प्रधानमंत्री बनने के लिए पहले जनता के दिलों में जगह बनानी पड़ेगी।
शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष पर राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने की कोशिश का आरोप लगाया।
हालांकि, ये भाजपा नेता के राजनीतिक आरोप हैं। केवल सत्ता परिवर्तन की मांग करने से किसी गैरकानूनी साजिश की पुष्टि नहीं होती।
किरेन रिजिजू और संबित पात्रा ने क्या कहा?
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रशांत भूषण का वीडियो साझा करते हुए उनकी टिप्पणियों की आलोचना की।
उन्होंने इस विवाद को भारत-विरोधी ताकतों और देश की रक्षा करने वाले लोगों के बीच संघर्ष के रूप में प्रस्तुत किया। यह उनकी राजनीतिक टिप्पणी है।
वहीं, भाजपा सांसद संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि कुछ विपक्षी नेता सरकार की आलोचना से आगे बढ़कर राजनीतिक अस्थिरता पैदा करना चाहते हैं।
इससे पहले भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया भी राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने के आरोप लगा चुके हैं।
क्या सरकार बदलने की मांग करना अपराध है?
इस विवाद में राजनीतिक बयानों के साथ एक संवैधानिक सवाल भी सामने आया है।
भारत में नागरिकों को संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत अभिव्यक्ति और शांतिपूर्ण सभा की स्वतंत्रता प्राप्त है, हालांकि इन पर उचित कानूनी प्रतिबंध लागू हो सकते हैं।
लोकतांत्रिक तरीके से सरकार बदलने की मांग और हिंसा के जरिए सत्ता परिवर्तन की कोशिश अलग-अलग बातें हैं।
किसी व्यक्ति की गतिविधि गैरकानूनी है या नहीं, इसका निर्धारण संबंधित कानून और प्रमाणों के आधार पर होना चाहिए।
अब आगे क्या होगा?
प्रशांत भूषण के बयान पर भाजपा नेताओं की प्रतिक्रियाओं के बीच SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विवाद भी जारी है।
विपक्ष मतदाता सूची से जुड़े आरोपों की जांच चाहता है, जबकि चुनाव आयोग से संबंधित मामले न्यायिक विचाराधीन हैं।
फिलहाल प्रशांत भूषण के बयान से शुरू हुई बहस में कई भाजपा नेता शामिल हो गए हैं। अब सवाल यह है कि राजनीतिक विरोध, लोकतांत्रिक अधिकार और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन को लेकर आगे क्या रुख सामने आता है।