SIR Protest: चुनाव आयोग की ओर मार्च शुरू, ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग! दिल्ली में पुलिस-RAF तैनात, देशभर में प्रदर्शन का ऐलान

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में शुक्रवार को दिल्ली में चुनाव आयोग की ओर मार्च शुरू हुआ। किसान, छात्र और नागरिक संगठनों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने तथा SIR रद्द करने की मांग की है।

SIR Protest Today: दिल्ली में चुनाव आयोग की ओर विरोध मार्च शुरू हुआ। ज्ञानेश कुमार को हटाने और वोटर लिस्ट पुनरीक्षण रद्द करने की मांग को लेकर किसान व छात्र संगठन सड़क पर उतरे हैं।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली | 23 अक्टूबर 2026
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मतदाता सूची पुनरीक्षण के विरोध में 23 अक्टूबर को दिल्ली में चुनाव आयोग की ओर मार्च शुरू हुआ। पुलिस और RAF ने सुरक्षा बढ़ाई।
देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चल रहा राजनीतिक विवाद शुक्रवार, 23 अक्टूबर को एक नए विरोध मार्च के रूप में सामने आया। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और 'People Against SIR' मंच के आह्वान पर दिल्ली में प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग के मुख्यालय की ओर मार्च शुरू किया।
दोपहर 2 बजे तक सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, गोल डाकखाना क्षेत्र में लगभग 100 से 150 प्रदर्शनकारी एकत्र हुए थे। इनमें छात्र संगठनों के सदस्य और दिल्ली, हरियाणा तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश से आए कार्यकर्ता शामिल थे।
प्रदर्शन को देखते हुए गुरुद्वारा बंगला साहिब और चुनाव आयोग के कार्यालय के आसपास दिल्ली पुलिस तथा रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की तैनाती बढ़ाई गई।
खबर में खास
  • 23 अक्टूबर को दिल्ली में SIR विरोधी मार्च शुरू हुआ।
  • दोपहर 2 बजे तक गोल डाकखाना के पास करीब 100–150 लोग जुटे।

  • प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग कर रहे हैं।

  • संयुक्त किसान मोर्चा ने भी देशव्यापी विरोध का आह्वान किया।

  • दिल्ली में दोपहर 1 से शाम 5 बजे तक ट्रैफिक डायवर्जन की व्यवस्था की गई।

  • 13.41 करोड़ मतदाताओं के नाम हटने का दावा विवादित है; चुनाव आयोग इसे अंतिम सूची से हटाए गए लोगों की संख्या नहीं मानता।

दिल्ली में कहां से शुरू हुआ विरोध मार्च?

आयोजकों ने गुरुद्वारा बंगला साहिब, गोल डाकखाना और गोल मार्केट के आसपास प्रदर्शनकारियों को एकत्र होने के लिए कहा था।
योजना के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को राष्ट्रीय ध्वज लेकर चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर बढ़ना था।
दोपहर 2 बजे के लाइव अपडेट में गोल डाकखाना के पास से मार्च शुरू होने की पुष्टि हुई। कार्यक्रम में किसान संगठनों के अलावा क्रांतिकारी युवा संगठन (KYS) और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) से जुड़े कार्यकर्ताओं की भागीदारी की सूचना मिली।
आयोजकों ने पहले कहा था कि अगर पुलिस मार्च रोकती है, तो वे वहीं शांतिपूर्ण 'जन संसद' आयोजित करेंगे।
आखिर प्रदर्शनकारी क्या मांग कर रहे हैं?
'People Against SIR' मंच ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए उसे रद्द करने की मांग की है।
संगठन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई और कथित तौर पर सूची से बाहर हुए पात्र मतदाताओं के नाम बहाल करने की मांग भी कर रहे हैं।
इसके अतिरिक्त चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित 2023 के कानून में बदलाव और चुनावी प्रक्रिया में व्यापक सुधार की मांग की गई है।
संयुक्त किसान मोर्चा ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ज्ञापन भेजने के लिए जिला और तहसील स्तर पर भी कार्यक्रमों का आह्वान किया है।
क्या सचमुच 13.41 करोड़ वोटरों के नाम काट दिए गए?
यही इस विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है।
आंदोलन से जुड़े संगठनों ने आरोप लगाया है कि SIR प्रक्रिया में लगभग 13.41 करोड़ लोगों के मतदान अधिकार प्रभावित हुए हैं।
हालांकि, चुनाव आयोग ने पहले इस तरह के दावों को भ्रामक बताया था।
आयोग के अनुसार, लगभग 13.39 करोड़ मतदाता प्रविष्टियां 'Absent, Shifted, Dead और Duplicate' यानी अनुपस्थित, स्थायी रूप से स्थानांतरित, मृत या दोहराव वाली श्रेणियों में चिह्नित की गई थीं।
चुनाव आयोग का कहना है कि इस आंकड़े को अंतिम मतदाता सूची से हटाए गए 13 करोड़ से अधिक लोगों की संख्या बताना सही नहीं है। पात्र मतदाता निर्धारित प्रक्रिया के तहत नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
राकेश टिकैत, प्रशांत भूषण और प्रकाश राज का नाम क्यों चर्चा में?
आयोजकों की ओर से जारी कार्यक्रम में किसान नेता राकेश टिकैत, वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण, अभिनेता प्रकाश राज, अर्थशास्त्री परकला प्रभाकर और छात्र नेता नेहा बोरा सहित कई लोगों को आमंत्रित किया गया है।
परकला प्रभाकर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पति हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर भी देशव्यापी प्रदर्शन का समर्थन करते हुए लोगों से इसमें भाग लेने की अपील की थी।
हालांकि, इन सभी प्रमुख व्यक्तियों के शुक्रवार के मार्च में वास्तव में शामिल होने की पुष्टि दोपहर 2 बजे तक उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं थी।
दिल्ली पुलिस ने क्या सुरक्षा व्यवस्था की?
पिछले प्रदर्शनों के बाद नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के अंतर्गत प्रतिबंधात्मक आदेश लागू रहे हैं।
आयोजकों ने बिना पूर्व पुलिस अनुमति मार्च निकालने की घोषणा की थी। ऐसे में पुलिस ने चुनाव आयोग के कार्यालय और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई।
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने भी बंगला साहिब और जंतर-मंतर के आसपास दोपहर 1 बजे से शाम 5 बजे तक ट्रैफिक डायवर्जन की सूचना जारी की।
समाचार लिखे जाने तक मार्च की अंतिम स्थिति और कार्यक्रम समाप्त होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी
चुनाव आयोग और प्रदर्शनकारियों के बीच विवाद का अगला सवाल
चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण का उद्देश्य रिकॉर्ड की शुद्धता सुनिश्चित करना है। आयोग ने पहले छूटे हुए पात्र मतदाताओं को दोबारा पंजीकरण का अवसर देने और विशेष अभियान चलाने के निर्देश भी जारी किए थे।
दूसरी ओर प्रदर्शनकारी संगठनों की मांग है कि सूची से नाम हटाने के आधार, प्रक्रिया और शिकायत निवारण की पूरी व्यवस्था की स्वतंत्र समीक्षा हो।
फिलहाल 23 अक्टूबर का नया घटनाक्रम यह है कि SIR विरोधी संगठनों का मार्च दिल्ली में शुरू हो चुका है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चुनाव आयोग तक प्रदर्शनकारी पहुंच पाते हैं या नहीं और उनकी मांगों पर संबंधित संस्थाओं की क्या प्रतिक्रिया आती है।

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