India China Border: अरुणाचल में अब भी जवान आमने-सामने! ITBP प्रमुख के खुलासे के बाद खरगे ने PM मोदी से पूछे 3 बड़े सवाल
ITBP प्रमुख शत्रुजीत कपूर ने अरुणाचल प्रदेश में कई जगह सैनिकों के आमने-सामने आने और स्थिति जारी रहने की बात कही। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी से सीमा सुरक्षा, चीन से व्यापार और कूटनीतिक बातचीत पर जवाब मांगा।
On
India China Border News: अरुणाचल में भारत-चीन सीमा पर तनाव को लेकर ITBP प्रमुख के बयान के बाद कांग्रेस ने मोदी सरकार को घेरा। खरगे ने सीमा पर गश्त, चीन से व्यापार और बातचीत के नतीजों पर सवाल उठाए।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली/ईटानगर | 23 अक्टूबर 2026
भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव को लेकर एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने कहा है कि अरुणाचल प्रदेश में कई स्थानों पर जवानों के आमने-सामने आने की घटनाएं हुई हैं और स्थिति अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।
उनके इस बयान के बाद शुक्रवार, 23 अक्टूबर को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्र सरकार से सवाल पूछे हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत और चीन के सैन्य अधिकारियों के बीच सितंबर में बातचीत होने के बावजूद सीमा पर तनाव की स्थिति को लेकर सवाल बने हुए हैं। हालांकि, जवानों का आमना-सामना होने का मतलब अपने आप गोलीबारी, युद्ध या भारतीय क्षेत्र पर कब्जा होना नहीं है।
खबर में खास
-
ITBP प्रमुख ने 22 अक्टूबर को अरुणाचल में कई स्थानों पर जवानों के आमने-सामने आने की बात कही।
-
उन्होंने बताया कि ITBP के शौर्य कमांडो संवेदनशील इलाकों में सक्रिय हैं।
-
6 सितंबर को भारत-चीन के बीच कोर कमांडर स्तर की बातचीत हुई थी।
-
कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी से तीन प्रमुख सवाल पूछे।
-
कांग्रेस ने सीमा पर गश्त, चीन से व्यापार घाटे और कूटनीतिक वार्ताओं के परिणाम पर जवाब मांगा।
-
भारतीय क्षेत्र में नए कब्जे या सैनिकों की हताहत संख्या की पुष्टि इस बयान से नहीं होती।
ITBP प्रमुख शत्रुजीत कपूर ने क्या कहा?
22 अक्टूबर को राजस्थान के अलवर में ITBP के एक सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर बनी स्थिति का उल्लेख किया।
उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में अरुणाचल प्रदेश में कई जगह जवानों के आमने-सामने आने की परिस्थितियां बनी हैं और ऐसी घटनाओं से जुड़ी स्थिति जारी है।
कपूर ने ITBP की नई शौर्य कमांडो टीमों के काम की सराहना की। उन्होंने बताया कि सीमा की कठिन परिस्थितियों से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण, ड्रोन क्षमता और आधुनिक उपकरणों को बढ़ाया जा रहा है।
उनका जोर ऊंचाई वाले इलाकों में जवानों की तैयारी तथा सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर भी था।
सितंबर में बातचीत हुई, फिर भी तनाव क्यों?
अरुणाचल प्रदेश के ताकसिंग इलाके में सीमा संबंधी विवाद को लेकर पिछले कुछ महीनों से खबरें आती रही हैं।
6 सितंबर 2026 को वाचा-दमाई सीमा बैठक स्थल पर भारत और चीन के बीच कोर कमांडर स्तर की बातचीत हुई थी। इसका उद्देश्य वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से जुड़े विवादों और तनाव को कम करना था।
लेकिन अब ITBP प्रमुख की टिप्पणी के बाद फिर सवाल उठ रहे हैं कि बातचीत से जमीनी स्थिति में कितना बदलाव आया है।
रिपोर्टों के अनुसार, क्षेत्र में तनाव बढ़ने से रोकने के लिए भारतीय जवानों की तैनाती जारी है।
खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी से कौन-से 3 सवाल पूछे?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शुक्रवार को इस मामले में केंद्र सरकार से जवाब मांगा।
उन्होंने तीन प्रमुख मुद्दे उठाए।
पहला सवाल—सीमा की सुरक्षा: खरगे ने पूछा कि क्या भारतीय जवानों के पारंपरिक गश्ती अधिकार प्रभावित हुए हैं और यदि सीमा पर टकराव की स्थिति है, तो देश को इसकी स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दी जा रही?
दूसरा सवाल—चीन से व्यापार: उन्होंने दावा किया कि वित्त वर्ष 2025–26 में चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा लगभग 112.16 अरब डॉलर तक पहुंच गया। उन्होंने सरकार से पूछा कि सीमा संबंधी विवाद के बावजूद चीन पर आर्थिक निर्भरता कम करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।
तीसरा सवाल—कूटनीतिक बातचीत: खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच संपर्क तथा दोनों देशों की विभिन्न बैठकों का उल्लेख करते हुए पूछा कि इन वार्ताओं से भारत को क्या ठोस परिणाम मिले हैं।
ये कांग्रेस अध्यक्ष के सवाल और राजनीतिक आलोचनाएं हैं। इनमें शामिल अलग-अलग दावों का मूल्यांकन संबंधित आधिकारिक आंकड़ों और सीमा की सत्यापित स्थिति के आधार पर होना चाहिए।
जयराम रमेश ने भी केंद्र सरकार को घेरा
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि ITBP प्रमुख ने अरुणाचल प्रदेश में जवानों के प्रदर्शन की सराहना की है, लेकिन प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार को वहां की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
उन्होंने चीन की ओर से अरुणाचल प्रदेश के स्थानों का नाम बदलने की कोशिशों, सीमा पर गश्त से जुड़ी शिकायतों और चीन की प्रस्तावित बड़ी जलविद्युत परियोजना का भी उल्लेख किया।
रमेश ने केंद्र सरकार की चीन नीति पर सवाल उठाते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक हितों को प्राथमिकता देने की मांग की।
सरकार पहले क्या कह चुकी है?
अरुणाचल प्रदेश सीमा विवाद पर केंद्र सरकार के मंत्री किरेन रिजिजू ने अगस्त 2026 में लगभग 60 किलोमीटर की नई चीनी घुसपैठ के दावे को खारिज किया था।
रिजिजू ने कहा था कि कई क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सीमा का स्पष्ट और पारस्परिक सीमांकन नहीं हुआ है। इस कारण कुछ इलाकों को लेकर अलग-अलग दावे होते हैं।
उन्होंने सीमा पर सुरक्षा और गश्त बढ़ाए जाने की बात कही थी। हालांकि, उनका अगस्त का बयान ITBP प्रमुख की 22 अक्टूबर वाली टिप्पणी पर नई प्रतिक्रिया नहीं है।
23 अक्टूबर की दोपहर तक उपलब्ध रिपोर्टों में इस नए घटनाक्रम पर केंद्र सरकार की विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
क्या सीमा पर फिर युद्ध जैसी स्थिति है?
