UP Election 2027: कांग्रेस को सीट तभी जब उम्मीदवार हो जिताऊ! अखिलेश के फॉर्मूले से गठबंधन में बढ़ी खींचतान
सपा करीब 50 सीटें देने के लिए तैयार, लेकिन कांग्रेस चाहती है बड़ी हिस्सेदारी; मांगी गई सीट पर उम्मीदवार की जमीनी ताकत भी देखना चाहती है समाजवादी पार्टी
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सपा और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर खींचतान बढ़ती दिखाई दे रही है। समाजवादी पार्टी चाहती है कि कांग्रेस जिस सीट की मांग करे, वहां से उतारे जाने वाले जिताऊ उम्मीदवार का नाम भी बताए।
सीटों की संख्या पर ही नहीं, उम्मीदवारों पर भी फंसा पेंच; कांग्रेस के सामने अखिलेश यादव ने रखा ‘जिताऊ चेहरे’ का फॉर्मूला
सीट बंटवारे और जिताऊ उम्मीदवारों के सवाल पर सपा-कांग्रेस गठबंधन में बढ़ी खींचतान
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | उत्तर प्रदेश डेस्क | 28 सितंबर 2026
खबर में खास
UP Election 2027 से पहले सपा-कांग्रेस में सीटों पर खींचतान
कांग्रेस से मांगी गई सीटों पर उम्मीदवारों के नाम चाहती है सपा
उम्मीदवार की स्थानीय पकड़ और जीतने की क्षमता बनेगी आधार
कांग्रेस ज्यादा सीटें चाहती है, सपा करीब 50 सीटों पर तैयार
30 सितंबर की INDIA गठबंधन बैठक पर टिकी निगाहें
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे का सवाल लगातार उलझता जा रहा है। दोनों पार्टियों के नेता गठबंधन कायम रहने का दावा कर रहे हैं, लेकिन कितनी सीटों पर कौन चुनाव लड़ेगा और उन सीटों पर उम्मीदवार कौन होगा, इसे लेकर अंदरूनी खींचतान बढ़ती दिखाई दे रही है।
अब विवाद केवल सीटों की संख्या तक सीमित नहीं है। समाजवादी पार्टी चाहती है कि कांग्रेस जिस विधानसभा सीट की मांग करे, वहां से चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार का नाम भी पहले बताए। सपा उम्मीदवार की जमीनी पकड़ और जीतने की क्षमता परखने के बाद ही सीट छोड़ने का फैसला करना चाहती है।
सीट के साथ उम्मीदवार का नाम भी बताए कांग्रेस
समाजवादी पार्टी का मानना है कि केवल सीटों का बंटवारा कर लेने से गठबंधन को जीत नहीं मिलेगी। जिस पार्टी को सीट दी जाए, उसका उम्मीदवार भी स्थानीय स्तर पर मजबूत और चुनाव जीतने की स्थिति में होना चाहिए।
सपा इसलिए कांग्रेस के संभावित उम्मीदवारों की जनता के बीच पकड़, राजनीतिक प्रभाव, सामाजिक समीकरण और चुनावी तैयारी का आकलन करना चाहती है। पार्टी को डर है कि कमजोर उम्मीदवार के कारण गठबंधन को ऐसी सीट भी गंवानी पड़ सकती है, जहां उसकी स्थिति मजबूत हो।
अखिलेश-राहुल की मुलाकात में उठा था मुद्दा
रिपोर्ट के अनुसार, 20 जुलाई को अखिलेश यादव और राहुल गांधी के बीच हुई मुलाकात में भी सीट बंटवारे और उम्मीदवारों का मुद्दा उठा था। बताया गया कि सपा ने कांग्रेस से कहा था कि वह जिस सीट की मांग करे, वहां से उतारे जाने वाले उम्मीदवार का नाम भी सामने रखे।
समाजवादी पार्टी स्थानीय समीकरण और उम्मीदवार की जीतने की संभावना को सीट बंटवारे का प्रमुख आधार बनाना चाहती है। अखिलेश यादव का यह फॉर्मूला कांग्रेस के लिए ज्यादा सीटें हासिल करने की राह कठिन कर सकता है।
कांग्रेस चाहती है ज्यादा सीटें
कांग्रेस उत्तर प्रदेश में अपना संगठन मजबूत करने के लिए ज्यादा विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है। दूसरी तरफ राजनीतिक जानकारों का कहना है कि समाजवादी पार्टी कांग्रेस को करीब 50 सीटें देने के पक्ष में हो सकती है।
हालांकि, दोनों पार्टियों ने अभी सीटों की संख्या को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के बयान से भी विवाद तेज हुआ था। उन्होंने कहा था कि यदि गठबंधन नहीं होता है तो कांग्रेस अपने स्तर पर चुनाव की तैयारी करेगी।
इमरान मसूद के बयान के बाद सपा नेता शिवपाल यादव और रामगोपाल यादव की प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। इससे सीट बंटवारे को लेकर दोनों पार्टियों के बीच चल रही खींचतान खुलकर दिखाई देने लगी।
सपा के मजबूत क्षेत्रों में कांग्रेस बढ़ा रही संगठन
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने इटावा, मैनपुरी, सैफई और कन्नौज जैसे सपा के प्रभाव वाले क्षेत्रों में भी कांग्रेस का संगठन मजबूत करने की बात कही है।
इस पर शिवपाल यादव ने कहा कि कांग्रेस इन क्षेत्रों में अपना संगठन बढ़ाने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन वहां उसे वोट मिलना आसान नहीं होगा। इन बयानों से संकेत मिल रहे हैं कि गठबंधन की बात करने के बावजूद दोनों पार्टियां अपनी-अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटी हैं।
कांग्रेस का संगठन विस्तार समाजवादी पार्टी के लिए चिंता का कारण बन सकता है। वहीं कांग्रेस चाहती है कि गठबंधन में उसकी भूमिका केवल कुछ चुनिंदा सीटों तक सीमित न रहे।
लोकसभा चुनाव के नतीजों से बढ़ी कांग्रेस की उम्मीद
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश की 17 सीटों पर चुनाव लड़कर छह सीटों पर जीत दर्ज की थी। प्रयागराज और सीतापुर में कांग्रेस ने ऐसे नेताओं को उम्मीदवार बनाया था, जो पहले समाजवादी पार्टी से जुड़े रहे थे। दोनों उम्मीदवार चुनाव जीतने में सफल रहे।
कांग्रेस लोकसभा चुनाव के इन परिणामों के आधार पर विधानसभा चुनाव में ज्यादा सीटों की मांग कर सकती है। पार्टी का मानना है कि सपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ने से भाजपा के खिलाफ मजबूत मुकाबला तैयार किया जा सकता है।
दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी 2022 के विधानसभा चुनाव में जीती गई 111 सीटों और प्रदेश में अपने मजबूत संगठन के आधार पर गठबंधन में बड़ी भूमिका बनाए रखना चाहती है।
दोनों पार्टियों के सामने 2022 और 2024 के आंकड़े
वर्ष 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को केवल दो सीटों पर जीत मिली थी और उसका वोट प्रतिशत 2.39 फीसदी रहा था। वहीं समाजवादी पार्टी ने 111 सीटें जीती थीं और उसे 32.06 फीसदी वोट मिले थे।
भाजपा ने 255 सीटों के साथ सरकार बनाई थी और उसे 41.29 फीसदी वोट मिले थे। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस का संयुक्त वोट प्रतिशत 43.52 फीसदी तक पहुंच गया था, जबकि भाजपा को 41.37 फीसदी वोट मिले थे।
लोकसभा चुनाव के परिणामों ने सपा-कांग्रेस गठबंधन का उत्साह बढ़ाया था। अब दोनों पार्टियां इसी प्रदर्शन को विधानसभा चुनाव में दोहराना चाहती हैं, लेकिन सीटों और उम्मीदवारों पर सहमति बनाना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
PDA रणनीति पर आगे बढ़ रही सपा
समाजवादी पार्टी आगामी चुनाव में अपनी PDA रणनीति पर आगे बढ़ रही है। पार्टी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक मतदाताओं को एक साथ जोड़कर भाजपा के खिलाफ मजबूत चुनावी समीकरण तैयार करना चाहती है।
वहीं कांग्रेस अपने पुराने वोट बैंक को वापस लाने के साथ प्रदेश में संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। दोनों पार्टियों की अलग-अलग राजनीतिक जरूरतें ही सीट बंटवारे की बातचीत को कठिन बना रही हैं।
30 सितंबर की बैठक पर टिकी नजर
अब सभी की नजर 30 सितंबर को होने वाली INDIA गठबंधन की बैठक पर रहेगी। माना जा रहा है कि बैठक में आगामी चुनावों की रणनीति के साथ उत्तर प्रदेश में सपा-कांग्रेस के सीट बंटवारे पर भी चर्चा हो सकती है।
हालांकि, अखिलेश यादव के बैठक में शामिल होने को लेकर संशय बना हुआ है। उनकी जगह सपा के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव पार्टी का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। आधिकारिक रूप से अखिलेश यादव की व्यस्तता को कारण बताया जा रहा है, लेकिन इसे सीट बंटवारे की खींचतान से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
फिलहाल सपा और कांग्रेस गठबंधन टूटने की बात से इनकार कर रही हैं। इसके बावजूद सीटों की संख्या और उम्मीदवारों के चयन पर सहमति बनाना आसान दिखाई नहीं दे रहा। आने वाले दिनों में दोनों पार्टियों के नेताओं के फैसले गठबंधन की दिशा तय करेंगे।
UP Election 2027 से पहले सपा-कांग्रेस गठबंधन की सबसे बड़ी परीक्षा केवल सीटों की संख्या नहीं, बल्कि जिताऊ उम्मीदवारों का चयन बन गया है। अखिलेश यादव का नया फॉर्मूला कांग्रेस की दावेदारी को कठिन बना सकता है। अब 30 सितंबर की बैठक बताएगी कि दोनों दल समझौते की तरफ बढ़ेंगे या यह सियासी खींचतान और तेज होगी।