UP चुनाव 2027 से पहले ASP छोड़ गए अमीर आलम और नवाजिश, 23 सितंबर को कांग्रेस में होंगे शामिल
पूर्व सांसद अमीर आलम और उनके बेटे पूर्व विधायक नवाजिश आलम ने आजाद समाज पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। दोनों ने 23 सितंबर को दिल्ली में कांग्रेस की सदस्यता लेने की बात कही है। पार्टी छोड़ने की वजह पर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे हैं।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पूर्व सांसद अमीर आलम और उनके बेटे पूर्व विधायक नवाजिश आलम ने आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) से इस्तीफा दे दिया है। दोनों 2025 में RLD छोड़कर चंद्रशेखर आजाद की पार्टी में शामिल हुए थे। अब उन्होंने 23 सितंबर को नई दिल्ली में कांग्रेस की सदस्यता लेने का ऐलान किया है।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | लखनऊ | 19 सितंबर 2026
अमीर आलम और नवाजिश आलम ने ASP से इस्तीफा देकर 23 सितंबर को कांग्रेस में शामिल होने की बात कही है।
खबर में खास
अमीर आलम और नवाजिश आलम ने छोड़ी ASP
23 सितंबर को कांग्रेस में शामिल होने का ऐलान
2025 में RLD छोड़कर ASP में आए थे पिता-पुत्र
पार्टी छोड़ने की वजह पर दोनों पक्षों के अलग दावे
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले नेताओं के दल बदलने का सिलसिला जारी है। पश्चिमी यूपी की राजनीति में सक्रिय पूर्व सांसद अमीर आलम खान और उनके बेटे पूर्व विधायक नवाजिश आलम खान ने चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) से इस्तीफा दे दिया है।
दोनों ने शुक्रवार को ASP की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया। अब उन्होंने 23 सितंबर को नई दिल्ली में कांग्रेस की सदस्यता लेने की बात कही है। अमीर आलम ने भी मीडिया से कांग्रेस में शामिल होने की पुष्टि की है।
डेढ़ साल में छोड़ी चंद्रशेखर आजाद की पार्टी
अमीर आलम और नवाजिश आलम ने फरवरी 2025 में चंद्रशेखर आजाद की मौजूदगी में ASP की सदस्यता ली थी।
इससे पहले दोनों राष्ट्रीय लोकदल यानी RLD से जुड़े थे। रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी 2025 में RLD से अलग होने के बाद 2 फरवरी 2025 को शामली के गढ़ीपुख्ता में आयोजित कार्यक्रम में दोनों ASP में शामिल हुए थे।
करीब डेढ़ साल बाद अब दोनों ने ASP से इस्तीफा दे दिया है।
ASP क्यों छोड़ी? नवाजिश ने बताई वजह
पार्टी छोड़ने के बाद नवाजिश आलम ने सोशल मीडिया के जरिए अपने फैसले की जानकारी दी।
नवाजिश का आरोप है कि पार्टी में उन्हें और उनके पिता को अपेक्षित सम्मान नहीं मिला। जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोधियों को उनकी सहमति के बिना पार्टी में शामिल किया जा रहा था।
अमीर आलम ने भी ASP नेतृत्व पर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पार्टी में शामिल होते समय जो वादे किए गए थे, उन्हें पूरा नहीं किया गया।
अमर उजाला से बातचीत में अमीर आलम ने आरोप लगाया कि ASP प्रमुख चंद्रशेखर आजाद उनसे मुलाकात नहीं करते थे और फोन भी रिसीव नहीं करते थे।
ये अमीर आलम और नवाजिश आलम के आरोप हैं।
टिकट को लेकर ASP की तरफ से अलग दावा
पार्टी छोड़ने की वजह को लेकर ASP से जुड़े नेताओं की तरफ से अलग पक्ष सामने आया है।
ASP के थानाभवन विधानसभा क्षेत्र प्रभारी मौसम अली राव का दावा है कि अमीर आलम और नवाजिश जब पार्टी में शामिल हुए थे तब बुढ़ाना विधानसभा सीट को लेकर बात हुई थी, लेकिन बाद में नवाजिश ने थानाभवन सीट पर दावेदारी की। उनके मुताबिक इस पर सहमति नहीं बन सकी।
अमीर आलम ने टिकट विवाद वाले इस दावे को खारिज किया है।
इसलिए पार्टी छोड़ने की वजह को केवल “टिकट नहीं मिला” कहना सही नहीं होगा। दोनों पक्ष इस मामले में अलग-अलग कारण बता रहे हैं।
23 सितंबर को कांग्रेस में होंगे शामिल
ASP से इस्तीफा देने के बाद पिता-पुत्र ने अपना अगला राजनीतिक कदम भी स्पष्ट कर दिया है।
रिपोर्ट के मुताबिक अमीर आलम और नवाजिश आलम 23 सितंबर को नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में पार्टी की सदस्यता ग्रहण करेंगे।
हालांकि 2027 विधानसभा चुनाव में दोनों में से कौन चुनाव लड़ेगा, किस सीट से लड़ेगा या कांग्रेस उन्हें टिकट देगी या नहीं—इस पर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
इसलिए संभावित विधानसभा टिकट को फिलहाल तय नहीं माना जा सकता।
कौन हैं अमीर आलम?
अमीर आलम पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में करीब चार दशक से सक्रिय रहे हैं।
उन्होंने 1985 में थानाभवन विधानसभा सीट से पहली बार चुनाव जीता। इसके बाद 1989 में मोरना और 1996 में दोबारा थानाभवन से विधायक बने। वह उत्तर प्रदेश सरकार में परिवहन मंत्री भी रहे।
इसके बाद वह कैराना से लोकसभा सांसद चुने गए और बाद में राज्यसभा के सदस्य भी रहे।
अपने लंबे राजनीतिक सफर में अमीर आलम अलग-अलग दलों से जुड़े रहे हैं।
कौन हैं नवाजिश आलम?
अमीर आलम के बेटे नवाजिश आलम भी पश्चिमी यूपी की राजनीति में सक्रिय हैं।
नवाजिश ने 2012 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर बुढ़ाना विधानसभा सीट से जीत हासिल की थी। इसके बाद 2017 में उन्होंने मीरापुर विधानसभा सीट से BSP के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन जीत नहीं मिली।
2018 में वह RLD में शामिल हुए और 2025 में अपने पिता के साथ ASP में चले गए। अब सितंबर 2026 में उन्होंने ASP से भी इस्तीफा दे दिया है।
UP चुनाव 2027 से पहले क्यों चर्चा में फैसला?
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले पश्चिमी यूपी में राजनीतिक दलों की गतिविधियां बढ़ रही हैं। अमीर आलम और नवाजिश आलम का ASP छोड़ना भी इसी राजनीतिक माहौल के बीच हुआ है।
हालांकि इस बदलाव का 2027 के चुनावी नतीजों पर कितना प्रभाव पड़ेगा, इसका अभी तथ्यात्मक आकलन नहीं किया जा सकता।
फिलहाल स्थिति इतनी स्पष्ट है कि पिता-पुत्र ने ASP छोड़ दी है और 23 सितंबर को कांग्रेस में शामिल होने का ऐलान किया है। इसके बाद उनके चुनाव लड़ने या संभावित सीट को लेकर तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।