UP Election 2027 से पहले राज्यसभा और विधान परिषद की 21 सीटों पर राजनीतिक मुकाबला होने जा रहा है। नौ राज्यसभा सीटों का गणित लगभग साफ है, लेकिन 10वीं सीट BJP और सपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन सकती है।
विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में BJP और सपा की पहली बड़ी परीक्षा होने जा रही है; राज्यसभा की 10वीं सीट पर विधायकों का गणित टकराएगा तो 11 MLC सीटों पर शिक्षक और स्नातक मतदाता तय करेंगे सियासी बढ़त
UP Election 2027 से पहले राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों में BJP तथा समाजवादी पार्टी की राजनीतिक ताकत की परीक्षा होगी।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | उत्तर प्रदेश डेस्क | 24 सितंबर 2026
खबर में खास
UP में राज्यसभा की 10 सीटों पर 16 अक्टूबर को मतदान
नौ सीटों का गणित लगभग साफ, 10वीं पर मुकाबले के आसार
11 शिक्षक-स्नातक MLC सीटों के लिए 23 अक्टूबर को वोटिंग
दोनों चुनावों को माना जा रहा UP Election 2027 का सेमीफाइनल
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले BJP और समाजवादी पार्टी एक बड़ी राजनीतिक परीक्षा की तैयारी में जुट गई हैं। प्रदेश में राज्यसभा की 10 और विधान परिषद की 11 सीटों पर चुनाव होने हैं। इन 21 सीटों के नतीजे सरकार नहीं बदलेंगे, लेकिन राजनीतिक दलों की एकजुटता, संगठन और चुनावी तैयारी की तस्वीर जरूर सामने रखेंगे।
राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होगा। विधान परिषद की पांच स्नातक और छह शिक्षक कोटे की सीटों पर 23 अक्टूबर को वोट डाले जाएंगे, जबकि मतगणना 27 अक्टूबर को होगी।
राज्यसभा की 10वीं सीट पर फंसा गणित
उत्तर प्रदेश विधानसभा के मौजूदा संख्याबल के आधार पर BJP अपने सात और समाजवादी पार्टी अपने दो उम्मीदवारों को आसानी से राज्यसभा पहुंचाने की स्थिति में दिखाई देती है। असली मुकाबला 10वीं सीट को लेकर हो सकता है।
एक उम्मीदवार को जीतने के लिए करीब 37 विधायकों के वोट की जरूरत पड़ सकती है। BJP अपने सहयोगी दलों के समर्थन से आठवीं सीट जीतने की कोशिश करेगी। वहीं सपा भी अतिरिक्त और वरीयता वाले वोटों के सहारे मुकाबला रोचक बनाने की रणनीति तैयार कर सकती है।
ऐसी स्थिति में सहयोगी दलों, निर्दलीय विधायकों और संभावित क्रॉस वोटिंग की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। दोनों पक्ष अपने विधायकों को एकजुट रखकर चुनाव से पहले राजनीतिक संदेश देने की कोशिश करेंगे।
BSP का प्रतिनिधित्व समाप्त होने का खतरा
राज्यसभा की जिन सीटों पर चुनाव हो रहा है, उनमें BSP सांसद रामजी गौतम की सीट भी शामिल है। उत्तर प्रदेश विधानसभा में फिलहाल BSP का कोई विधायक नहीं है। ऐसे में पार्टी के लिए अपना उम्मीदवार राज्यसभा भेजना लगभग असंभव दिखाई देता है।
यदि BSP का कोई उम्मीदवार नहीं जीतता है तो उत्तर प्रदेश से राज्यसभा में पार्टी का प्रतिनिधित्व समाप्त हो सकता है। यह स्थिति प्रदेश की बदलती राजनीतिक ताकत का बड़ा संकेत मानी जाएगी।
MLC चुनाव क्यों हैं महत्वपूर्ण?
उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों पर होने वाला चुनाव राज्यसभा से अलग है। इन सीटों पर शिक्षक और स्नातक मतदाता वोट करेंगे। इसलिए नतीजों से पता चलेगा कि पढ़े-लिखे और नौकरीपेशा मतदाताओं के बीच किस पार्टी का संगठन अधिक मजबूत है।
पिछले चुनाव में BJP ने इन 11 सीटों में से छह पर जीत हासिल की थी। इस बार पार्टी अधिक सीटें जीतकर 2027 से पहले मनोवैज्ञानिक बढ़त बनाने की कोशिश करेगी। दूसरी तरफ सपा भी शिक्षक और स्नातक मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ बढ़ाने में जुटी है।
टिकट वितरण से साधे जाएंगे जातीय समीकरण
राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन में BJP और सपा जातीय, क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखेंगी। टिकट वितरण के जरिए दोनों पार्टियां उन वर्गों को संदेश देने की कोशिश कर सकती हैं, जिनकी 2027 के विधानसभा चुनाव में निर्णायक भूमिका रहने वाली है।
BJP की कोर कमेटी में संभावित उम्मीदवारों के नाम पर चर्चा होने की संभावना है। सपा भी ऐसे चेहरों पर दांव लगा सकती है जो PDA समीकरण के साथ पार्टी के राजनीतिक संदेश को मजबूत कर सकें।
राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव सरकार बनाने का फैसला नहीं करेंगे, लेकिन इनके नतीजे यह जरूर बताएंगे कि 2027 से पहले किस पार्टी का संगठन, सामाजिक समीकरण और विधायकों पर नियंत्रण ज्यादा मजबूत है। खास नजर राज्यसभा की 10वीं सीट पर रहेगी, जहां जीत से ज्यादा बड़ा सवाल राजनीतिक संदेश और पार्टी की एकजुटता का होगा।