आकाश आनंद तीसरी बार BSP से बाहर, ससुर का ‘संन्यास’ भी नहीं आया काम; क्या अब ईशान को आगे बढ़ाएंगी मायावती?
मायावती ने आकाश आनंद को BSP की सभी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया है। ससुर अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास की घोषणा के बाद भी आकाश की वापसी का रास्ता नहीं खुला। इस बीच छोटे भाई ईशान आनंद की बढ़ती सक्रियता ने उत्तराधिकार की नई चर्चा छेड़ दी है।
BSP में एक बार फिर बड़ा पारिवारिक और संगठनात्मक बदलाव हुआ है। कभी मायावती के राजनीतिक उत्तराधिकारी बनाए गए आकाश आनंद तीसरी बार पार्टी से बाहर हो गए। अब सवाल है—क्या मायावती ने आकाश का अध्याय बंद कर दिया और ईशान आनंद को आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है?
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले बहुजन समाज पार्टी में एक और बड़ा संगठनात्मक उलटफेर हो गया है। बसपा प्रमुख मायावती ने अपने भतीजे और कभी घोषित राजनीतिक उत्तराधिकारी रहे आकाश आनंद को पार्टी की सभी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया है। इस फैसले के बाद पार्टी के भावी नेतृत्व को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।
आकाश आनंद के ससुर और बसपा के पूर्व वरिष्ठ नेता अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा की थी। माना जा रहा था कि उनके इस कदम से आकाश की पार्टी में वापसी का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, मायावती ने आकाश को भी पार्टी से पूरी तरह अलग करके इन अटकलों पर विराम लगा दिया।
आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, इस घटनाक्रम ने बसपा की अंदरूनी रणनीति और दलित राजनीति में पार्टी के भविष्य को लेकर नई बहस शुरू कर दी है।
अशोक सिद्धार्थ के ‘संन्यास’ के बाद भी नहीं बनी बात
आकाश आनंद की शादी बसपा के वरिष्ठ नेता रहे अशोक सिद्धार्थ की बेटी प्रज्ञा सिद्धार्थ से हुई है। मायावती लंबे समय से अशोक सिद्धार्थ के कथित प्रभाव और पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी को लेकर नाराज बताई जा रही थीं।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, मायावती ने संकेत दिया था कि यदि अशोक सिद्धार्थ सक्रिय राजनीति से पूरी तरह संन्यास ले लेते हैं तो आकाश आनंद के राजनीतिक भविष्य पर विचार किया जा सकता है। इसके बाद अशोक सिद्धार्थ ने सार्वजनिक रूप से राजनीति छोड़ने की घोषणा कर दी।
उन्होंने अपने बयान में मायावती के प्रति सम्मान और वफादारी जताते हुए आकाश आनंद का भी बचाव किया। इसके बावजूद मायावती संतुष्ट नहीं हुईं और उन्होंने आकाश को भी पार्टी की सभी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया।
मायावती ने अशोक सिद्धार्थ पर क्या आरोप लगाए?
मायावती ने अपने बयान में आरोप लगाया कि अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से हटने की शर्त स्वीकार करने के बजाय रातभर अपना पद और प्रभाव बचाने के लिए अलग-अलग हथकंडे अपनाए। यह मायावती का आरोप है और अशोक सिद्धार्थ की ओर से इसकी विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
बसपा प्रमुख ने यह भी संकेत दिया कि वह उचित समय पर इस पूरे प्रकरण से जुड़ी और बातें सार्वजनिक कर सकती हैं। उनके इस बयान के बाद पार्टी के अंदर चल रहे मतभेदों और राजनीतिक दबावों को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
मायावती का स्पष्ट संदेश है कि परिवार अथवा व्यक्तिगत रिश्तों को पार्टी और बहुजन आंदोलन से ऊपर नहीं रखा जा सकता।
तीसरी बार आकाश पर मायावती का एक्शन
आकाश आनंद को वर्ष 2023 में बसपा का नेशनल कोऑर्डिनेटर बनाकर मायावती ने अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया था। उन्हें पार्टी के युवा चेहरे के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा था। सोशल मीडिया, युवा कार्यकर्ताओं और अलग-अलग राज्यों में बसपा के विस्तार की जिम्मेदारी भी उनके पास थी।
लेकिन आकाश और मायावती के रिश्तों में लगातार उतार-चढ़ाव दिखाई दिया। लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान मायावती ने उन्हें अपरिपक्व बताते हुए महत्वपूर्ण पदों से हटा दिया था। बाद में उन्हें दोबारा जिम्मेदारी मिली।
मार्च 2025 में भी आकाश को पार्टी से बाहर किया गया था। हालांकि, कुछ समय बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से मायावती से माफी मांगी और बसपा में उनकी वापसी हो गई। उन्हें दोबारा राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी सौंप दी गई थी।
अब वर्ष 2026 में तीसरी बार हुई कार्रवाई से संकेत मिल रहा है कि मायावती इस बार आकाश को लेकर पहले से अधिक सख्त हैं।
क्या आकाश ने मायावती की पोस्ट साझा नहीं की?
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अशोक सिद्धार्थ के संन्यास से संबंधित मायावती की पोस्ट को आकाश आनंद ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा नहीं किया था। पार्टी के भीतर इसे नेतृत्व के संदेश से दूरी के रूप में देखा गया।
रिपोर्ट के अनुसार, मायावती आकाश की पार्टी और बहुजन आंदोलन के प्रति प्रतिबद्धता को लेकर भी असंतुष्ट थीं। हालांकि, आकाश आनंद की तरफ से इस पूरे घटनाक्रम पर कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अब ईशान आनंद की क्यों हो रही चर्चा?
आकाश आनंद के छोटे भाई ईशान आनंद पिछले कुछ समय से मायावती के साथ पार्टी के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों और मंचों पर दिखाई दे रहे हैं। उन्हें मुख्य सेक्टर प्रभारी जैसी संगठनात्मक जिम्मेदारी भी दी गई है।
ईशान के पार्टी में बढ़ते कद को आकाश के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, मायावती ने औपचारिक रूप से ईशान को अपना उत्तराधिकारी घोषित नहीं किया है। इसलिए उन्हें भावी उत्तराधिकारी बताना फिलहाल राजनीतिक अनुमान ही है।
फिर भी, आकाश को हटाए जाने और ईशान को संगठन में आगे बढ़ाए जाने का समय महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे संकेत मिलता है कि बसपा नेतृत्व पार्टी में नई पीढ़ी तैयार करना चाहता है, लेकिन अंतिम नियंत्रण अभी पूरी तरह मायावती के हाथ में रहेगा।
2027 चुनाव से पहले BSP के सामने बड़ी चुनौती
उत्तर प्रदेश में बसपा इस समय अपने सबसे कठिन राजनीतिक दौर से गुजर रही है। पार्टी के पास विधानसभा और लोकसभा में प्रभावी प्रतिनिधित्व नहीं है। दलित वोट बैंक के एक हिस्से पर भाजपा, समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और आजाद समाज पार्टी भी अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही हैं।
ऐसे समय में पार्टी के युवा चेहरे का बार-बार बदलना कार्यकर्ताओं के बीच भ्रम पैदा कर सकता है। दूसरी ओर, मायावती का यह फैसला संगठन में अनुशासन और अपने निर्विवाद नियंत्रण का संदेश भी माना जा रहा है।
बसपा प्रमुख लगातार यह संदेश देती रही हैं कि पार्टी में किसी भी व्यक्ति को पारिवारिक संबंधों के आधार पर स्थायी स्थान नहीं मिलेगा। जो भी नेता पार्टी की विचारधारा और अनुशासन का पालन नहीं करेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
आकाश के सामने अब क्या विकल्प हैं?
आकाश आनंद की आगे की राजनीतिक दिशा पर सबकी नजर है। वह मायावती के फैसले को स्वीकार करते हुए सक्रिय राजनीति से दूरी बनाते हैं, फिर से वापसी का प्रयास करते हैं या किसी अन्य राजनीतिक रास्ते पर जाते हैं—यह अभी स्पष्ट नहीं है।
आकाश की राजनीतिक पहचान मुख्य रूप से बसपा और मायावती से जुड़ी रही है। ऐसे में पार्टी से बाहर स्वतंत्र राजनीतिक आधार तैयार करना उनके लिए आसान नहीं होगा।
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या आकाश आनंद के लिए बसपा के दरवाजे हमेशा के लिए बंद हो गए हैं, या मायावती भविष्य में एक बार फिर अपना फैसला बदल सकती हैं? फिलहाल ईशान आनंद की बढ़ती सक्रियता ने बसपा के संभावित उत्तराधिकार की लड़ाई को नया मोड़ जरूर दे दिया है।
