लखनऊ में BJP से सपा ने छीनी MLC सीट! 17,127 वोटों से कांति सिंह की जीत, 6 साल बाद अवनीश सिंह को हराकर की वापसी

राजधानी लखनऊ की स्नातक विधान परिषद सीट पर समाजवादी पार्टी ने भाजपा को हराया। 2020 में इसी सीट पर हारने वाली कांति सिंह ने 2026 में सपा उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की।

Lucknow MLC Result 2026: समाजवादी पार्टी की कांति सिंह ने भाजपा के मौजूदा MLC अवनीश कुमार सिंह को 17,127 वोटों से हराया। जानिए किसे कितने वोट मिले, कांति सिंह का राजनीतिक इतिहास और 2027 चुनाव से पहले इस परिणाम का महत्व।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | लखनऊ | 29 अक्टूबर 2026
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लखनऊ स्नातक विधान परिषद सीट पर सपा प्रत्याशी कांति सिंह ने 17,127 मतों से जीत दर्ज की।

खबर में खास

  • सपा की कांति सिंह ने लखनऊ स्नातक MLC सीट जीती।
  • कांति सिंह को 56,905 और भाजपा के अवनीश कुमार सिंह को 39,778 वोट मिले।

  • जीत का अंतर 17,127 वोट रहा।

  • 2020 में इसी भाजपा प्रत्याशी से हारी थीं कांति सिंह।

  • 2014 में निर्दलीय जीती थीं, अब सपा के टिकट पर दोबारा विधान परिषद पहुंचेंगी।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राजधानी लखनऊ की स्नातक विधान परिषद सीट पर बड़ा राजनीतिक बदलाव सामने आया है। समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार कांति सिंह ने भाजपा के मौजूदा विधान परिषद सदस्य इंजीनियर अवनीश कुमार सिंह को 17,127 मतों से हराकर सीट अपने नाम कर ली है।
बुधवार, 28 अक्टूबर की देर रात नौवें और अंतिम चरण की मतगणना पूरी होने के बाद यह परिणाम सामने आया। मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने कांति सिंह की जीत की घोषणा की। उनके पक्ष में 56,905 वोट पड़े, जबकि भाजपा प्रत्याशी को 39,778 वोट मिले।

शुरुआती राउंड से आगे रहीं कांति सिंह

लखनऊ स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की मतगणना में कांति सिंह ने शुरुआती चरणों से ही बढ़त बनाए रखी।
पांचवें चरण तक उनकी बढ़त 10,385 वोट हो गई थी। सातवें चरण तक यह अंतर 14,235 और आठवें चरण तक 14,855 वोट पहुंच गया। अंतिम चरण में बढ़त और बढ़कर 17,127 वोट हो गई।
इस चुनाव में निर्दलीय विजय कुमार बंधु तीसरे स्थान पर रहे। उन्हें 10 हजार से अधिक वोट मिले।

2020 में मिली थी हार, 2026 में कैसे हुई वापसी?

कांति सिंह का इस सीट से पुराना राजनीतिक संबंध है।
वर्ष 2002 और 2008 में उनके पति डॉ. एसपी सिंह ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लखनऊ स्नातक सीट जीती थी। वर्ष 2014 में कांति सिंह स्वयं निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में निर्वाचित हुई थीं।
लेकिन 2020 में भाजपा के अवनीश कुमार सिंह ने उन्हें लगभग छह हजार वोटों से पराजित कर दिया था।
इस बार कांति सिंह समाजवादी पार्टी के टिकट पर मैदान में उतरीं और पिछली हार को जीत में बदल दिया। पिछले 24 वर्षों में यह चौथी बार है जब इस परिवार के किसी सदस्य ने लखनऊ स्नातक सीट जीती है।

लखनऊ की दूसरी MLC सीट पर क्या हुआ?

दिलचस्प बात यह है कि लखनऊ की दोनों विधान परिषद सीटों के परिणाम अलग-अलग दलों के पक्ष में गए।
स्नातक सीट सपा की कांति सिंह ने जीती, जबकि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के उमेश द्विवेदी ने लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की।
उमेश द्विवेदी को 13,179 और सपा प्रत्याशी सुशील कुमार को 8,371 वोट मिले। इस तरह भाजपा ने शिक्षक सीट बरकरार रखी, लेकिन स्नातक सीट गंवा दी।

जीत के बाद कांति सिंह ने क्या वादा किया?

चुनाव जीतने के बाद कांति सिंह ने युवाओं के रोजगार, करियर काउंसलिंग और शिक्षा व्यवस्था में सुधार को प्राथमिकता देने की बात कही।
उन्होंने 2027 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने की स्थिति में बेरोजगार स्नातकों के लिए रोजगार भत्ता और वित्तविहीन शिक्षकों के लिए प्रोत्साहन राशि पर काम करने का भरोसा दिलाया।
फिलहाल ये उनके राजनीतिक आश्वासन हैं। किसी नई सरकारी योजना या बजट आवंटन की घोषणा नहीं हुई है।

2027 विधानसभा चुनाव से पहले क्या मायने हैं?

लखनऊ स्नातक सीट पर भाजपा को हराना समाजवादी पार्टी के लिए एक उल्लेखनीय चुनावी परिणाम है। वहीं भाजपा के सामने अपने मौजूदा उम्मीदवार की हार के कारणों की समीक्षा का सवाल है।
हालांकि, स्नातक MLC चुनाव में केवल पात्र पंजीकृत स्नातक मतदाता मतदान करते हैं। लखनऊ स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में 3,13,531 पंजीकृत मतदाताओं में से 39.83 प्रतिशत ने मतदान किया।
इसलिए इसे पूरे लखनऊ या उत्तर प्रदेश के सभी विधानसभा मतदाताओं की राजनीतिक पसंद का प्रतिनिधि परिणाम नहीं माना जा सकता।
इस चुनाव से जुड़ा प्रमुख सवाल यही है कि 2020 में भाजपा को जीत दिलाने वाले स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में छह साल बाद मतदाताओं की पसंद किस वजह से बदली। उम्मीदवारों के कामकाज, प्रचार और स्थानीय मुद्दों की समीक्षा से इसका अधिक स्पष्ट जवाब मिल सकेगा।
 

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