यूपी MLC चुनाव में BJP को 27,663 वोटों से हराया! पहले राउंड में पीछे थी सपा, फिर मानसिंह यादव ने पलटा पूरा मुकाबला

इलाहाबाद-झांसी स्नातक MLC सीट पर सपा के डॉ. मानसिंह यादव जीते। भाजपा के अशोक राठौर को हार मिली। मतगणना में 9,596 मतपत्र अस्वीकृत हुए।

UP MLC Result 2026: इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीट पर सपा के मानसिंह यादव 27,663 वोटों से जीते। जानिए BJP की शुरुआती बढ़त कैसे पलटी।

यूपी MLC चुनाव में BJP को 27,663 वोटों से हराया! पहले राउंड में पीछे थी सपा, फिर मानसिंह यादव ने पलटा पूरा मुकाबला

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इलाहाबाद-झांसी खंड स्नातक MLC चुनाव 2026 में समाजवादी पार्टी के डॉ. मानसिंह यादव ने भाजपा के अशोक कुमार राठौर को 27,663 मतों से हराकर जीत दर्ज की।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | झांसी/प्रयागराज | 28 अक्टूबर 2026
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले विधान परिषद चुनाव में समाजवादी पार्टी को एक और महत्वपूर्ण सफलता मिली है। इलाहाबाद-झांसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से सपा प्रत्याशी डॉ. मानसिंह यादव ने भारतीय जनता पार्टी के अशोक कुमार राठौर को 27,663 मतों के बड़े अंतर से पराजित कर दिया है।
इस मुकाबले की सबसे दिलचस्प बात यह रही कि शुरुआत में भाजपा प्रत्याशी आगे थे, लेकिन दूसरे राउंड से सपा ने बढ़त बनानी शुरू कर दी। मतगणना पूरी होने तक यह बढ़त इतनी बढ़ गई कि भाजपा उम्मीदवार काफी पीछे रह गए।
बुधवार दोपहर घोषित अंतिम परिणाम के अनुसार मानसिंह यादव को 60,358 वोट मिले, जबकि अशोक कुमार राठौर को 32,695 मत प्राप्त हुए। सपा ने इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा है।

खबर में खास

  • सपा के डॉ. मानसिंह यादव ने इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीट जीती।
  • भाजपा प्रत्याशी अशोक कुमार राठौर 27,663 मतों से हारे।

  • पहली गणना में भाजपा को 984 वोटों की बढ़त थी।

  • दूसरे राउंड के बाद चुनावी मुकाबला सपा के पक्ष में बदलने लगा।

  • कुल 1,09,482 मतपत्रों की गणना हुई।

  • इनमें 9,596 मतपत्र अस्वीकृत घोषित किए गए।

पहले राउंड में भाजपा आगे, फिर कैसे पलटा चुनाव?

झांसी के बुंदेलखंड डिग्री कॉलेज में मंगलवार सुबह आठ बजे से मतगणना शुरू हुई थी।
पहले राउंड में भाजपा प्रत्याशी अशोक कुमार राठौर को 3,291 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी के डॉ. मानसिंह यादव को 2,307 वोट प्राप्त हुए।
इस तरह भाजपा उम्मीदवार 984 वोटों से आगे थे।
लेकिन दूसरे राउंड में स्थिति बदल गई। सपा उम्मीदवार ने बढ़त हासिल कर ली और उसके बाद भाजपा प्रत्याशी लगातार पीछे होते चले गए।
छठे राउंड तक मानसिंह यादव को 37,072 और अशोक राठौर को 21,815 वोट मिल चुके थे। उस समय सपा की बढ़त 15,257 मतों तक पहुंच गई थी।

अंतिम नतीजे में किसे कितने वोट मिले?

मतगणना पूरी होने के बाद प्रमुख उम्मीदवारों की स्थिति इस प्रकार रही।
उम्मीदवार
दल
प्राप्त वोट
डॉ. मानसिंह यादव
समाजवादी पार्टी
60,358
अशोक कुमार राठौर
भाजपा
32,695
शिवशंकर पटेल
निर्दलीय
3,949
सपा की जीत का अंतिम अंतर

27,663 वोट

अंतिम प्रकाशित मतगणना आंकड़े।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि समाजवादी पार्टी ने शुरुआती पिछड़ने की स्थिति से निकलकर इस सीट पर निर्णायक जीत दर्ज की।

9,596 मतपत्र अस्वीकृत, क्यों महत्वपूर्ण है यह आंकड़ा?

इस चुनाव का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू अस्वीकृत मतपत्रों की संख्या है।
कुल 1,09,482 मतपत्रों की गणना हुई, जिनमें 9,596 अस्वीकृत घोषित किए गए। यह कुल गिने गए मतपत्रों का लगभग 8.8 प्रतिशत है।
यह संख्या चुनाव प्रक्रिया की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में इन सभी मतपत्रों के अस्वीकृत होने के अलग-अलग कारणों का विस्तृत विवरण नहीं है।
इसलिए केवल इतनी बड़ी संख्या के आधार पर धांधली का आरोप लगाना उचित नहीं होगा। मतपत्रों की वैधता निर्धारित चुनावी नियमों के अनुसार तय होती है।

जीत के बाद सपा कार्यकर्ताओं में उत्साह

झांसी में अंतिम परिणाम घोषित होने के बाद समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों में उत्साह देखा गया।
हिन्दुस्तान की स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक, समर्थकों ने मानसिंह यादव का फूल-मालाओं से स्वागत किया और मतगणना स्थल के बाहर खुशी जताई।
समाजवादी पार्टी के लिए यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी ने इस निर्वाचन क्षेत्र में अपनी मौजूदा सीट बरकरार रखी है।

वाराणसी और आगरा के बाद सपा को एक और जीत

उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों पर हुए चुनाव में भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच अलग-अलग क्षेत्रों में मुकाबला देखने को मिला है।
वाराणसी शिक्षक सीट पर सपा के लाल बिहारी यादव जीते। आगरा शिक्षक सीट पर भी सपा के डॉ. आकाश अग्रवाल विजयी हुए।
अब इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीट पर मानसिंह यादव की जीत के बाद सपा की घोषित सफलताओं में एक और सीट जुड़ गई है।
दूसरी तरफ भाजपा ने मेरठ की शिक्षक और स्नातक सीटों सहित कई निर्वाचन क्षेत्रों में अपनी पकड़ बरकरार रखी है।

क्या 2027 विधानसभा चुनाव पर पड़ेगा असर?

इलाहाबाद-झांसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में समाजवादी पार्टी की यह जीत राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
लेकिन स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता सामान्य विधानसभा चुनाव से अलग पात्रता और पंजीकरण व्यवस्था के अंतर्गत मतदान करते हैं।
इसलिए यह परिणाम पूरे प्रयागराज, झांसी या बुंदेलखंड के आम मतदाताओं की राजनीतिक पसंद का सीधा प्रमाण नहीं है।
भाजपा के लिए इस हार के बाद स्नातक मतदाताओं के बीच अपने संगठन और चुनावी रणनीति की समीक्षा करना महत्वपूर्ण हो सकता है। वहीं सपा इस जीत को अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं के बीच राजनीतिक संदेश के रूप में इस्तेमाल कर सकती है।

अब सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल

वाराणसी और आगरा की शिक्षक सीटों के बाद इलाहाबाद-झांसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में जीत ने समाजवादी पार्टी को एक और चुनावी सफलता दी है।
लेकिन विशेष निर्वाचन क्षेत्रों की जीत विधानसभा चुनाव में अपने-आप नहीं दोहराई जाती।
ऐसे में सवाल यह है—क्या समाजवादी पार्टी स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में मिले समर्थन को 2027 के विधानसभा चुनाव में भी व्यापक जनसमर्थन में बदल पाएगी, या भाजपा अलग चुनावी रणनीति के साथ अपनी स्थिति मजबूत करेगी?
इसका वास्तविक उत्तर अगले विधानसभा चुनाव के नतीजों से ही सामने आएगा।

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