UP Politics: बस्ती BJP में 6 दिन में महिला जिलाध्यक्ष बदलीं, अपने ही नेताओं पर गंभीर आरोप; अब FIR दर्ज
बस्ती में भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष नियुक्ति को लेकर शुरू हुआ विवाद थाने तक पहुँच गया है। शैल त्रिपाठी ने पार्टी पदाधिकारियों पर आरोप लगाए, जबकि जिलाध्यक्ष विवेकानंद मिश्रा ने सभी आरोपों को निराधार बताया।
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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भाजपा के बस्ती संगठन में आंतरिक विवाद सामने आया है। महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष नियुक्त होने के महज छह दिन बाद शैल त्रिपाठी को पद से हटा दिया गया। इसके बाद सोशल मीडिया पर शुरू हुई आरोप-प्रत्यारोप की लड़ाई अब पुलिस तक पहुँच गई है।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | बस्ती | 21 अक्टूबर 2026
खबर में खास
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12 अक्टूबर को शैल त्रिपाठी को महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष बनाया गया, 18 अक्टूबर को हटा दिया गया।
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शैल त्रिपाठी ने स्थानीय पार्टी पदाधिकारियों पर नियुक्ति में अनियमितता के आरोप लगाए।
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सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर उनके खिलाफ FIR दर्ज होने की खबर है।
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भाजपा जिलाध्यक्ष ने आरोप खारिज किए; शैल त्रिपाठी मुख्यमंत्री योगी से मिलने की कोशिश में हैं।
सिर्फ छह दिन में क्यों बदल गईं महिला जिलाध्यक्ष?
बस्ती में भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष के रूप में शैल त्रिपाठी की नियुक्ति 12 अक्टूबर को हुई थी। लेकिन छह दिन बाद, 18 अक्टूबर को उन्हें पद से हटाकर मंजू श्रीवास्तव को नई जिलाध्यक्ष बना दिया गया।
शैल त्रिपाठी का आरोप है कि उन्हें पद से हटाने के पीछे स्थानीय संगठन के पदाधिकारियों की भूमिका है। उन्होंने दावा किया कि महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष सरोज कुशवाहा की ओर से इस्तीफा देने का दबाव बनाया गया था। इस्तीफा नहीं देने पर उन्हें बिना पूर्व सूचना के पद से हटा दिया गया।
नियुक्ति के बदले दो लाख रुपये लेने का आरोप
पद से हटाए जाने के बाद शैल त्रिपाठी ने सोशल मीडिया पर पार्टी के स्थानीय नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने भाजपा जिलाध्यक्ष विवेकानंद मिश्रा पर महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष की नियुक्ति के बदले दो लाख रुपये लेने का आरोप लगाया। उन्होंने इस विवाद में पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी हरिश द्विवेदी का नाम भी लिया।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। संबंधित पदाधिकारियों ने इन्हें निराधार बताया है।
सोशल मीडिया विवाद के बाद मामला थाने पहुँचा
21 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, शैल त्रिपाठी की सोशल मीडिया पोस्ट के मामले में उनके खिलाफ FIR दर्ज कराई गई है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने फेसबुक पर भाजपा नेताओं की छवि खराब करने के उद्देश्य से गलत और भ्रामक बातें लिखीं।
अब तक उपलब्ध समाचार रिपोर्टों में FIR की धाराओं और जांच की पूरी प्रामाणिक प्रति उपलब्ध नहीं है। इसलिए आरोपों की कानूनी स्थिति और पुलिस जांच के निष्कर्ष को लेकर अंतिम दावा करना जल्दबाजी होगी।
भाजपा जिलाध्यक्ष विवेकानंद मिश्रा ने क्या जवाब दिया?
इस विवाद पर भाजपा जिलाध्यक्ष विवेकानंद मिश्रा ने शैल त्रिपाठी के सभी आरोपों को खारिज किया है।
उनके मुताबिक, जिला संगठन ने प्रदेश नेतृत्व को जो आधिकारिक नियुक्ति सूची भेजी थी, उसमें शैल त्रिपाठी का नाम नहीं था। इसके बावजूद नियुक्ति होने के बाद सूची में सुधार किया गया और उन्हें पद से हटा दिया गया।
मिश्रा ने इसे संगठनात्मक प्रक्रिया में हुई गड़बड़ी बताया। उन्होंने शैल त्रिपाठी के आरोपों को मनगढ़ंत बताते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई की बात भी कही।
इससे पहले पार्टी के जिला महामंत्री अमृत कुमार वर्मा ने शैल त्रिपाठी से जुड़े कथित पार्टी-विरोधी गतिविधियों के मामलों का उल्लेख किया था। इस तरह नियुक्ति विवाद में दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग स्पष्टीकरण सामने आए हैं
अब मुख्यमंत्री योगी से मिलने की तैयारी
FIR दर्ज होने के बाद भी शैल त्रिपाठी अपने आरोपों पर कायम हैं। वह मामला लखनऊ तक ले जाने और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात करने की कोशिश में हैं।
हालांकि, मुख्यमंत्री से उनकी मुलाकात होने या किसी जांच का आदेश दिए जाने की पुष्टि अभी नहीं हुई है।
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