₹880 करोड़ खर्च, फिर 15 एयरपोर्ट पर उड़ानें बंद; कांग्रेस का मोदी सरकार पर हमला- ‘उद्घाटन हुआ, फिर अंधेरी रात’
कांग्रेस ने मोदी सरकार पर UDAN योजना को लेकर हमला बोला है। पार्टी का दावा है कि करीब ₹880 करोड़ खर्च कर विकसित किए गए 15 एयरपोर्ट अब गैर-संचालित हैं। सरकारी जानकारी भी 15 एयरपोर्ट के बंद होने की पुष्टि करती है, हालांकि कारण अलग-अलग बताए गए हैं।
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कांग्रेस ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मोदी सरकार की UDAN योजना पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का दावा है कि करीब ₹880 करोड़ खर्च कर विकसित किए गए 15 एयरपोर्ट अब बंद पड़े हैं और कई जगह उद्घाटन के कुछ समय बाद ही उड़ानें रुक गईं। संसद में सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक 15 UDAN एयरपोर्ट फिलहाल गैर-संचालित हैं, लेकिन इसके पीछे कम यात्री संख्या, विमान की कमी, खराब विजिबिलिटी, रनवे प्रतिबंध, एयरलाइन सेवाओं का अस्थायी रूप से बंद होना और VGF अवधि खत्म होना जैसे कई कारण बताए गए हैं।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली | 14 सितंबर 2026
खबर में खास
- कांग्रेस का दावा- करीब ₹880 करोड़ खर्च के बाद 15 एयरपोर्ट गैर-संचालित
- सरकारी जवाब में भी 15 UDAN एयरपोर्ट के बंद होने की पुष्टि
- कम यात्री, विमान की कमी और तकनीकी दिक्कतों समेत कई कारण बताए गए
- कांग्रेस ने इसे ‘उद्घाटन और प्रचार की राजनीति’ से जोड़ा
देश में क्षेत्रीय हवाई संपर्क बढ़ाने के लिए शुरू की गई UDAN योजना एक बार फिर राजनीतिक विवाद के केंद्र में है।
कांग्रेस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए दावा किया है कि करीब ₹880 करोड़ खर्च करने के बाद 15 एयरपोर्ट ऐसे हैं, जहां फिलहाल वाणिज्यिक उड़ानें नहीं चल रही हैं।
कांग्रेस ने लिखा कि इन एयरपोर्ट का बड़े स्तर पर उद्घाटन किया गया, लेकिन कुछ समय बाद उड़ानें बंद हो गईं।
हालांकि सरकारी आंकड़े तस्वीर का दूसरा पहलू भी बताते हैं।
15 एयरपोर्ट गैर-संचालित होने की पुष्टि
फरवरी 2026 में संसद में नागरिक उड्डयन मंत्रालय की ओर से दिए गए जवाब में बताया गया था कि UDAN योजना के तहत 15 एयरपोर्ट फिलहाल गैर-संचालित हैं।
इनमें शामिल हैं:
पठानकोट, पाकयोंग, कुशीनगर, अलीगढ़, आजमगढ़, चित्रकूट, श्रावस्ती, मुरादाबाद, भावनगर, अंबिकापुर, लुधियाना, दतिया, कलबुर्गी, शिमला और कूचबिहार।
इस लिहाज से कांग्रेस के पोस्ट में 15 एयरपोर्ट गैर-संचालित होने का मूल दावा सरकारी रिकॉर्ड से मेल खाता है।
क्या सभी एयरपोर्ट ‘उद्घाटन के बाद बंद’ हुए?
यहीं कांग्रेस के राजनीतिक आरोप और सरकारी रिकॉर्ड में फर्क समझना जरूरी है।
सरकार ने इन 15 एयरपोर्ट के गैर-संचालित होने के पीछे एक ही वजह नहीं बताई है।
संसदीय जवाब में कारणों में शामिल हैं:
कम यात्री संख्या, एयरलाइन की रुचि में कमी, विमान की उपलब्धता की समस्या, लीजिंग संबंधी दिक्कतें, खराब विजिबिलिटी, VFR एयरपोर्ट पर दिन के समय की सीमाएं, रूट का बदलाव और तीन साल की Viability Gap Funding अवधि पूरी होना।
इसलिए सभी एयरपोर्ट को सिर्फ “उद्घाटन के बाद सरकार ने बंद कर दिया” कहना पूरी तस्वीर नहीं बताता।
₹880 करोड़ का आंकड़ा कहां से आया?
एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया से जुड़े जनवरी 2026 के एक विश्लेषण में 15 गैर-संचालित UDAN एयरपोर्ट पर करीब ₹880 करोड़ खर्च होने का आंकड़ा दिया गया था।
यही आंकड़ा अब कांग्रेस ने अपने राजनीतिक हमले में इस्तेमाल किया है।
हालांकि विभिन्न सरकारी सूचियों में समय के साथ गैर-संचालित एयरपोर्ट के नाम बदलते रहे हैं, इसलिए ₹880 करोड़ के आंकड़े को उसी समय की सूची के संदर्भ में देखना चाहिए।
कांग्रेस ने क्या कहा?
कांग्रेस ने अपने पोस्ट में लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार ने वाहवाही लूटने के लिए देश में कई एयरपोर्ट का उद्घाटन किया।
पार्टी का आरोप है कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद इनमें से कई एयरपोर्ट कुछ ही समय बाद बंद हो गए।
कांग्रेस ने इसे जनता के पैसों से प्रचार करने का मामला बताते हुए पूछा कि इतने पैसे खर्च करने के बाद ये एयरपोर्ट टिकाऊ क्यों नहीं बन पाए।
यह कांग्रेस का राजनीतिक आरोप है।
उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा असर
गैर-संचालित 15 एयरपोर्ट की सूची में सबसे ज्यादा संख्या उत्तर प्रदेश की है।
सरकारी सूची में UP के कुशीनगर, अलीगढ़, आजमगढ़, चित्रकूट, श्रावस्ती और मुरादाबाद शामिल हैं।
इससे पहले एक RTI के आधार पर सामने आई रिपोर्ट में कहा गया था कि 2021 के बाद शुरू हुए UP के सात नए एयरपोर्ट में से छह पर निर्धारित वाणिज्यिक उड़ानें बंद हो चुकी थीं।
इसी कारण उत्तर प्रदेश की क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी पर सवाल सबसे ज्यादा उठे हैं।
कुशीनगर से मुरादाबाद तक क्या दिक्कतें आईं?
कुशीनगर एयरपोर्ट को बौद्ध पर्यटन से जोड़कर बड़ी उम्मीदों के साथ शुरू किया गया था।
लेकिन बाद में यात्री संख्या और एयरलाइन सेवाओं की व्यवहारिकता से जुड़ी दिक्कतों के चलते निर्धारित उड़ानें बंद हो गईं।
इसी तरह आजमगढ़ में खराब दृश्यता, अलीगढ़ में एयरलाइन ऑपरेटरों की सीमित रुचि और मुरादाबाद में कम यात्री संख्या जैसी समस्याएं सामने आईं।
क्या UDAN योजना पूरी तरह विफल है?
यह निष्कर्ष भी सही नहीं होगा।
सरकार के मुताबिक जनवरी 2026 तक UDAN योजना के तहत 93 एयरपोर्ट operationalise किए जा चुके थे और 657 रूट शुरू किए गए थे।
इन रूटों पर 1.6 करोड़ से ज्यादा यात्रियों ने सफर किया था।
यानी योजना के तहत कई एयरपोर्ट और रूट चल रहे हैं, जबकि कुछ छोटे शहरों में सेवाएं टिकाऊ नहीं रह पाईं।
सरकार ने अब Modified UDAN क्यों शुरू किया?
इसी तरह की दिक्कतों को देखते हुए केंद्र सरकार ने मार्च 2026 में Modified UDAN Scheme को मंजूरी दी।
नई योजना के लिए ₹28,840 करोड़ का कुल बजट रखा गया है और अगले 10 वर्षों में 100 नए एयरपोर्ट विकसित करने की योजना है।
नई योजना में खास बात यह है कि छोटे एयरपोर्ट के संचालन और रखरखाव के लिए भी अलग आर्थिक सहायता का प्रावधान किया गया है।
सरकार ने माना है कि क्षेत्रीय एयरपोर्ट की recurring O&M cost ज्यादा होती है और कम यात्री संख्या वाले एयरपोर्ट को टिकाऊ बनाने के लिए अतिरिक्त मदद की जरूरत पड़ती है।
कांग्रेस का ‘उद्घाटन’ वाला हमला क्यों?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने पिछले वर्षों में एयरपोर्ट की संख्या बढ़ने को अपनी प्रमुख उपलब्धियों में गिनाया है।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय के मुताबिक भारत में एयरपोर्ट की संख्या 2014 के 74 से बढ़कर 2026 में 166 तक पहुंच गई है।
कांग्रेस इसी दावे के जवाब में गैर-संचालित एयरपोर्ट का आंकड़ा सामने ला रही है।
विपक्ष का तर्क है कि सिर्फ एयरपोर्ट खोलना पर्याप्त नहीं है, बल्कि वहां नियमित उड़ानें और पर्याप्त यात्री भी होने चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल- एयरपोर्ट बनाना या उन्हें चलाना?
इस विवाद का असली मुद्दा यही है।
छोटे शहरों में एयरपोर्ट बनाकर उन्हें हवाई नक्शे पर लाना क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिए जरूरी है, लेकिन अगर एयरलाइन को पर्याप्त यात्री नहीं मिलते या संचालन की लागत ज्यादा होती है तो सेवाएं बंद हो सकती हैं।
यही कारण है कि UDAN योजना की सफलता सिर्फ इस आधार पर नहीं मापी जा सकती कि कितने एयरपोर्ट का उद्घाटन हुआ।
असल परीक्षा यह है कि कितने एयरपोर्ट लंबे समय तक नियमित और आर्थिक रूप से टिकाऊ उड़ानें चला पाए।
कांग्रेस ने अब इसी मुद्दे को मोदी सरकार के खिलाफ राजनीतिक हथियार बनाया है, जबकि सरकार Modified UDAN के जरिए इन्हीं operational challenges को दूर करने की तैयारी कर रही है।
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