राजस्थान निकाय चुनाव में कहीं BJP का दबदबा, कहीं कांग्रेस की वापसी; बीकानेर में 10 साल बाद कांग्रेस, भीलवाड़ा-उदयपुर में खिला कमल
राजस्थान निकाय चुनाव 2026 में कई शहरों की तस्वीर साफ हो गई है। बीकानेर में कांग्रेस ने 10 साल बाद बहुमत हासिल किया, भीलवाड़ा और उदयपुर में BJP मजबूत रही, जबकि भरतपुर में निर्दलीयों ने दोनों बड़े दलों का खेल बिगाड़ दिया।
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राजस्थान निकाय चुनाव 2026 के नतीजों में अलग-अलग शहरों में अलग राजनीतिक तस्वीर सामने आई है। बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस ने 79 में से 42 वार्ड जीतकर 10 साल बाद बहुमत हासिल किया। भीलवाड़ा में BJP ने 70 में से 45 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत लिया, जबकि उदयपुर में BJP 53 सीटों के साथ सातवीं बार बोर्ड बनाने की ओर है। भरतपुर में 36 निर्दलीय जीतकर सबसे बड़ी ताकत बने हैं।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | जयपुर | 14 सितंबर 2026
खबर में खास
- बीकानेर में कांग्रेस ने 10 साल बाद हासिल किया बहुमत
- भीलवाड़ा में BJP ने 70 में से 45 वार्ड जीते
- उदयपुर में BJP 53 सीटों के साथ फिर मजबूत
- भरतपुर में 36 निर्दलीय बने सबसे बड़ी ताकत
राजस्थान के निकाय चुनाव 2026 ने कई बड़े शहरों में अलग-अलग राजनीतिक संदेश दिए हैं।
कहीं BJP ने मजबूत पकड़ बनाए रखी, कहीं कांग्रेस ने वापसी की, तो कुछ शहरों में निर्दलीयों ने दोनों बड़े दलों की गणित ही बिगाड़ दी।
सबसे ज्यादा चर्चा बीकानेर, भीलवाड़ा, उदयपुर और भरतपुर के नतीजों की हो रही है।
बीकानेर में कांग्रेस की 10 साल बाद वापसी
बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस ने बड़ा राजनीतिक उलटफेर किया है।
79 वार्डों में कांग्रेस ने 42 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है।
BJP को 25 सीटों पर जीत मिली, जबकि 11 निर्दलीय और एक RLP प्रत्याशी विजयी रहा।
अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस की यह जीत इसलिए खास है क्योंकि पार्टी ने करीब 10 साल बाद बीकानेर नगर निगम में वापसी की है।
कांग्रेस के अनिल कल्ला ने BJP प्रदेश उपाध्यक्ष दीपक पारीक को हराया, जबकि पूर्व महापौर सुशीला कंवर राजपुरोहित को भी हार का सामना करना पड़ा।
भीलवाड़ा में BJP का स्पष्ट बहुमत
भीलवाड़ा में नगर निगम बनने के बाद हुए पहले चुनाव में BJP ने मजबूत प्रदर्शन किया।
70 वार्डों में BJP ने 45 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया।
कांग्रेस को 10 और निर्दलीय उम्मीदवारों को 15 सीटें मिलीं।
इस नतीजे ने भीलवाड़ा में BJP के शहरी संगठन की ताकत को एक बार फिर सामने रखा है।
उदयपुर में सातवीं बार BJP बोर्ड की ओर
उदयपुर नगर निगम में भी BJP का प्रदर्शन मजबूत रहा।
80 वार्डों में BJP ने 53 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस को 23 सीटें मिलीं।
CPM को एक और निर्दलीयों को तीन सीटें मिलीं।
इन नतीजों के बाद BJP लगातार सातवीं बार उदयपुर नगर निगम में बोर्ड बनाने की स्थिति में दिखाई दे रही है।
भरतपुर में निर्दलीयों ने बिगाड़ा खेल
भरतपुर के नतीजे सबसे दिलचस्प रहे।
65 वार्डों में 36 निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की।
BJP को 20, कांग्रेस को 7, जबकि BSP और RLP को एक-एक सीट मिली।
इस आंकड़े के बाद भरतपुर में निर्दलीय ही सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बन गए हैं।
यानी यहां बोर्ड बनाने की पूरी राजनीति निर्दलीय पार्षदों के इर्द-गिर्द घूम सकती है।
जयपुर में पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल हारीं
जयपुर में BJP और कांग्रेस के बीच मुकाबले के बीच एक बड़ा व्यक्तिगत नतीजा भी सामने आया।
पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल को कांग्रेस उम्मीदवार सुनीता मेठी ने हरा दिया।
रिपोर्ट के मुताबिक ज्योति खंडेलवाल किसी भी बूथ पर बढ़त नहीं बना सकीं।
वहीं जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों में BJP का प्रदर्शन मजबूत रहा है। अलग-अलग अपडेटों में घोषित नतीजों की संख्या बदलती रही, इसलिए अंतिम आधिकारिक समेकित आंकड़े पर ही भरोसा करना बेहतर होगा।
जोधपुर में BJP-कांग्रेस की कांटे की टक्कर
जोधपुर के 100 वार्डों में भी BJP और कांग्रेस के बीच बेहद करीबी मुकाबला देखने को मिला।
अमर उजाला के दोपहर तक के अपडेट में दोनों दल 44-44 सीटों पर थे, जबकि अन्य के खाते में 11 सीटें गई थीं।
इस तरह जोधपुर उन शहरों में रहा जहां किसी एक पार्टी को आसान बढ़त नहीं मिली।
नगर निकाय चुनाव क्यों हैं अहम?
राजस्थान में कुल 309 शहरी स्थानीय निकायों के लिए मतदान हुआ।
इनमें 10 नगर निगमों के साथ नगर परिषद और नगर पालिकाएं भी शामिल हैं।
मतदान 9 और 11 सितंबर को दो चरणों में हुआ था।
इन निकाय चुनावों को 2028 विधानसभा चुनाव से पहले राज्य के शहरी राजनीतिक मूड का एक अहम संकेत माना जा रहा है।
BJP के लिए कहां राहत?
BJP के लिए भीलवाड़ा और उदयपुर जैसे बड़े शहरों में स्पष्ट बढ़त बड़ा राजनीतिक संदेश है।
इसके अलावा कई शहरी निकायों में पार्टी ने कांग्रेस पर बढ़त बनाई है। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक सोमवार दोपहर तक BJP अधिकांश शहरी निकायों में आगे चल रही थी।
यह मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सरकार और राज्य BJP संगठन के लिए राहत की खबर मानी जा सकती है।
कांग्रेस के लिए कहां अच्छी खबर?
कांग्रेस के लिए बीकानेर की जीत सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल है।
10 साल बाद नगर निगम में बहुमत हासिल करना पार्टी के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक वापसी है।
इसके अलावा कुछ नगर परिषदों और अन्य निकायों में भी कांग्रेस ने BJP को चुनौती दी है।
निर्दलीय क्यों बने सबसे बड़ा फैक्टर?
निकाय चुनावों में स्थानीय चेहरा, जातीय समीकरण और वार्ड स्तर की राजनीति अक्सर पार्टी लहर से ज्यादा प्रभावी हो जाती है।
भरतपुर में 36 निर्दलीयों की जीत इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।
ऐसे नतीजों में मेयर और बोर्ड गठन के समय निर्दलीय पार्षदों की भूमिका निर्णायक हो सकती है।
अब नजर मेयर और चेयरमैन चुनाव पर
निकाय चुनाव के बाद अगला बड़ा चरण मेयर, चेयरमैन और अन्य पदों के चुनाव का होगा।
मेयर और चेयरपर्सन पदों के चुनाव 21 सितंबर को और डिप्टी मेयर व अन्य उपाध्यक्ष पदों के चुनाव 22 सितंबर को प्रस्तावित हैं।
इसलिए वार्ड परिणाम आने के बाद भी राजनीतिक जोड़-तोड़ का दौर खत्म नहीं होगा।
खासतौर पर उन शहरों में जहां किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है, अगले कुछ दिन बेहद अहम रहेंगे।
राजस्थान ने दिया मिला-जुला संदेश
राजस्थान के निकाय चुनावों का अब तक का सबसे बड़ा संदेश यही है कि शहरी मतदाता ने एकतरफा फैसला नहीं दिया।
BJP ने कई बड़े शहरों में मजबूत प्रदर्शन किया, कांग्रेस ने बीकानेर जैसे अहम निगम में वापसी की और भरतपुर जैसे शहर में निर्दलीयों ने दोनों दलों को पीछे छोड़ दिया।
यानी ये नतीजे सिर्फ जीत-हार की कहानी नहीं, बल्कि 2028 से पहले राजस्थान की शहरी राजनीति में बदलते समीकरणों का संकेत भी हैं।
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