तीन दल हों या चार, 2027 में BSP की सरकार बनानी है; मायावती ने कार्यकर्ताओं को दिया सत्ता में वापसी का बड़ा मंत्र
लखनऊ में BSP की अहम बैठक के दौरान मायावती ने कार्यकर्ताओं से कहा कि मुकाबला त्रिकोणीय हो या चतुष्कोणीय, लक्ष्य उत्तर प्रदेश में पार्टी की सरकार बनाना होना चाहिए।
BSP प्रमुख मायावती ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए सत्ता में वापसी का लक्ष्य दिया है। उन्होंने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और पूरे समर्पण से चुनावी तैयारियों में जुटने का निर्देश दिया।
तीन दल हों या चार, 2027 में BSP की सरकार बनानी है; मायावती ने कार्यकर्ताओं को दिया सत्ता में वापसी का बड़ा मंत्र
2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को संबोधित करतीं BSP प्रमुख मायावती।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | उत्तर प्रदेश डेस्क | 23 सितंबर 2026
खबर में खास
मायावती ने कार्यकर्ताओं को दिया मिशन 2027 का लक्ष्य
त्रिकोणीय या चतुष्कोणीय मुकाबले से नहीं घबराने का संदेश
उत्तर प्रदेश में BSP की सरकार बनाने का किया आह्वान
संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने पर दिया जोर
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों में जुटी बहुजन समाज पार्टी ने अपनी रणनीति तेज कर दी है। BSP प्रमुख मायावती ने पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए साफ कहा कि चुनावी मुकाबला चाहे त्रिकोणीय हो या चतुष्कोणीय, पार्टी का लक्ष्य उत्तर प्रदेश में अपनी सरकार बनाना होना चाहिए। उन्होंने कार्यकर्ताओं से सभी राजनीतिक समीकरणों की चिंता छोड़कर संगठन को मजबूत करने में जुटने का आह्वान किया।
कार्यकर्ताओं को दिया सत्ता में वापसी का लक्ष्य
लखनऊ में आयोजित पार्टी की अहम बैठक में मायावती ने कहा कि BSP कार्यकर्ताओं को विरोधी दलों के गठबंधन और चुनावी दावों से घबराने की जरूरत नहीं है। पार्टी को अपने जनाधार, संगठन और बहुजन समाज की ताकत पर भरोसा रखते हुए चुनाव मैदान में उतरना होगा।
मायावती ने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे गांव, मोहल्ले और बूथ स्तर पर लोगों से संपर्क बढ़ाएं। पार्टी की नीतियों और BSP सरकार के दौरान किए गए कार्यों की जानकारी जनता तक पहुंचाई जाए। उन्होंने अनुशासन, निष्ठा और सक्रियता को चुनावी सफलता के लिए सबसे जरूरी बताया।
चुनावी समीकरणों पर मायावती का बड़ा संदेश
उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव भाजपा, समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और BSP के बीच कड़े मुकाबले में बदल सकता है। इसी संभावित राजनीतिक तस्वीर को लेकर मायावती ने कहा कि मैदान में तीन दल हों या चार, BSP कार्यकर्ताओं का ध्यान केवल पार्टी को जीत दिलाने पर रहना चाहिए।
उन्होंने पार्टी नेताओं को आपसी मतभेदों से दूर रहने और संगठन के फैसलों का पालन करने का निर्देश दिया। मायावती का संदेश साफ है कि BSP किसी दूसरे दल के चुनावी समीकरण के भरोसे रहने के बजाय अपनी स्वतंत्र राजनीतिक ताकत को दोबारा खड़ा करना चाहती है।
संगठन मजबूत करने पर जोर
बैठक में पार्टी संगठन की स्थिति और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर भी चर्चा की गई। मायावती ने जिम्मेदार पदाधिकारियों से अपने क्षेत्रों में नियमित बैठकें करने और निष्क्रिय कार्यकर्ताओं की जगह सक्रिय लोगों को आगे लाने को कहा।
युवाओं, महिलाओं, दलितों, पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों और अन्य सामाजिक वर्गों के बीच पार्टी की पहुंच बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। BSP की रणनीति अपने पारंपरिक मतदाताओं को दोबारा जोड़ने के साथ नए सामाजिक वर्गों में पकड़ मजबूत करने की है।
BSP के सामने वापसी की बड़ी चुनौती
पिछले कुछ चुनावों में BSP का प्रदर्शन उम्मीद के अनुरूप नहीं रहा है। ऐसे में 2027 का विधानसभा चुनाव पार्टी और मायावती दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी को अपने पुराने जनाधार को वापस लाने के साथ मतदाताओं को यह भरोसा भी दिलाना होगा कि वह उत्तर प्रदेश की सत्ता की मजबूत दावेदार है।
मायावती ने कार्यकर्ताओं को निराशा छोड़कर पूरी ताकत से मैदान में उतरने का संदेश दिया है। उनका मानना है कि यदि संगठन बूथ स्तर तक सक्रिय होकर काम करता है और पार्टी का वोट एकजुट रहता है, तो BSP उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ी वापसी कर सकती है।
मायावती के संदेश से गरमाई UP की राजनीति
मायावती के इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में BSP की आगामी रणनीति को लेकर चर्चा तेज होना तय है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि पार्टी जमीन पर संगठन को कितना मजबूत कर पाती है और 2027 के चुनाव से पहले किन चेहरों को आगे लाती है।
मायावती का यह संदेश केवल कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश की सत्ता के लिए BSP की खुली दावेदारी भी है। त्रिकोणीय हो या चतुष्कोणीय मुकाबला—पार्टी ने अपना लक्ष्य साफ कर दिया है। अब BSP की असली परीक्षा इस चुनावी दावे को मजबूत जमीनी संगठन और मतदाताओं के समर्थन में बदलने की होगी।