‘राहुल गांधी ने बिल्कुल सही कहा’; चुनाव आयोग पर उमर अब्दुल्ला बोले—भरोसा उठ गया तो वोट कौन देगा?
चुनाव आयोग के अंदर कथित मतभेद की रिपोर्ट पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने चिंता जताई है। उन्होंने राहुल गांधी के बयान का समर्थन करते हुए सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि किसी योग्य नागरिक को मतदान से रोकना लोकतंत्र पर हमला है। चुनाव प्रक्रिया से लोगों का भरोसा उठ गया तो वे मतदान में हिस्सा क्यों लेंगे? चुनाव आयोग ने मतभेद के दावों को खारिज किया है।
‘राहुल गांधी ने बिल्कुल सही कहा’; चुनाव आयोग पर उमर अब्दुल्ला बोले—भरोसा उठ गया तो वोट कौन देगा?
चुनाव आयोग और SIR विवाद पर राहुल गांधी के बयान का समर्थन करते जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | राष्ट्रीय डेस्क | 23 सितंबर 2026
खबर में खास
चुनाव आयोग के कामकाज पर उमर अब्दुल्ला ने उठाए सवाल
राहुल गांधी के बयान को बताया बिल्कुल सही
बोले—चुनाव से भरोसा उठा तो लोकतंत्र में क्या बचेगा
चुनाव आयोग ने कहा—SIR के सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए
चुनाव आयोग और Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर जारी विवाद में जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी उतर गए हैं। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि मतदान के अधिकार से किसी नागरिक को रोकना लोकतंत्र पर सीधा हमला है।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि लोकतंत्र की बुनियाद चुनाव होते हैं। यदि लोगों का भरोसा चुनाव प्रक्रिया से ही उठ गया तो वे चुनाव में हिस्सा क्यों लेंगे? उन्होंने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार से इस विवाद पर गंभीरता से विचार करने और सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की।
‘राहुल गांधी ने बिल्कुल सही कहा’
राहुल गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा, “अगर आप किसी को वोट देने से रोक रहे हैं, जबकि वोट देना उसका अधिकार है, तो यह लोकतंत्र पर हमला नहीं है तो और क्या है? राहुल गांधी ने जो कहा, बिल्कुल सही कहा है।”
उन्होंने आगे कहा कि अब यह देखना होगा कि सामने आए सवालों और आरोपों को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। केवल सफाई जारी करने से लोगों के मन में पैदा हुई आशंकाएं खत्म नहीं होंगी। चुनावी व्यवस्था में विश्वास बनाए रखने के लिए जवाबदेही और पारदर्शिता जरूरी है।
चुनाव आयोग की सफाई पर भी उठाए सवाल
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि चुनाव आयोग के अंदर कथित मतभेद से जुड़ी रिपोर्ट कई गंभीर सवाल खड़े करती है। उनके अनुसार, आयोग की ओर से यह कहना कि आंतरिक चर्चा में अलग-अलग विचार सामने आते रहते हैं, बताता है कि पूरे मामले पर अधिक स्पष्ट जानकारी देने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि आयोग को आरोपों का विस्तार से जवाब देना चाहिए, जिससे मतदाताओं के बीच कोई भ्रम न रहे। चुनाव की निष्पक्षता पर संदेह पैदा होना लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं है।
जम्मू-कश्मीर के परिसीमन का किया जिक्र
उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर में हुई परिसीमन प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जम्मू-कश्मीर में SIR का विवाद राष्ट्रीय स्तर पर सामने आने से पहले ही चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर शिकायतें मिल रही थीं।
उन्होंने दावा किया कि जम्मू-कश्मीर में परिसीमन की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं थी और उसमें कई कमियां थीं। उमर अब्दुल्ला ने आरोप लगाया कि निर्वाचन क्षेत्रों में किए गए बदलावों से एक राजनीतिक दल और उसके सहयोगियों को फायदा पहुंचाने का प्रयास किया गया।
यह उमर अब्दुल्ला का आरोप है। चुनाव आयोग पहले भी परिसीमन और चुनावी प्रक्रिया को नियमों के अनुसार एवं निष्पक्ष तरीके से पूरा किए जाने की बात कहता रहा है।
राहुल गांधी ने क्या आरोप लगाया?
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग के दो आयुक्तों द्वारा कथित रूप से कई बार आपत्ति दर्ज कराने की रिपोर्ट सामने आने के बाद आयोग पर तीखा हमला किया था।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाना या योग्य नागरिकों को मतदान के अधिकार से वंचित करना संविधान पर हमला है। उन्होंने चुनाव आयोग के अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा था कि गलत काम करने वालों की भविष्य में जवाबदेही तय की जाएगी।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
चुनाव आयोग ने अंदरूनी मतभेद और फैसलों में टकराव के दावों को खारिज किया है। आयोग का कहना है कि SIR सहित सभी अंतिम फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए।
आयोग ने कहा कि किसी निर्णय से पहले सवाल, सुझाव और अलग विचार सामने आना सामान्य प्रक्रिया है। इन्हें अंतिम फैसले के खिलाफ औपचारिक असहमति नहीं माना जा सकता। आयोग के अनुसार, उसके सभी आधिकारिक फैसले निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत लिए गए हैं।
चुनावी भरोसे पर छिड़ी बड़ी बहस
राहुल गांधी के आरोपों को उमर अब्दुल्ला का समर्थन मिलने के बाद चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर राजनीतिक बहस और तेज हो सकती है। विपक्ष आयोग से कथित आपत्तियों और SIR से जुड़े फैसलों की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग कर रहा है।
उमर अब्दुल्ला का बयान इस विवाद को नया राजनीतिक मोड़ देता है। उनका सीधा सवाल है कि यदि जनता का चुनाव प्रक्रिया से भरोसा उठ गया तो लोकतंत्र की बुनियाद कैसे बचेगी। अब चुनाव आयोग के सामने केवल आरोपों को खारिज करने की नहीं, बल्कि मतदाताओं का भरोसा मजबूत करने की भी बड़ी चुनौती है।