SIR पर 14 आपत्तियों के दावे के बाद EC की 8-Point सफाई—‘अलग राय सामान्य, सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से’

चुनाव आयोग ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दो चुनाव आयुक्तों के बीच कथित मतभेद की रिपोर्ट पर आठ बिंदुओं में जवाब दिया है। आयोग ने कहा कि आंतरिक सवाल सामान्य प्रक्रिया हैं और सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से हुए।

चुनाव आयोग ने SIR पर कथित मतभेद की रिपोर्ट को अधूरी तस्वीर बताते हुए आठ बिंदुओं में सफाई दी है। आयोग के मुताबिक आंतरिक सवाल और सुझाव सामान्य प्रक्रिया हैं, जबकि सभी आधिकारिक फैसलों को तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी मिली है।

SIR पर 14 आपत्तियों के दावे के बाद EC की 8-Point सफाई—‘अलग राय सामान्य, सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से’

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SIR पर कथित मतभेद की रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग ने आठ बिंदुओं में अपनी कार्यप्रणाली और फैसलों पर सफाई जारी की।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | राष्ट्रीय डेस्क | 23 सितंबर 2026

खबर में खास

  • कथित अंदरूनी मतभेद पर चुनाव आयोग की विस्तृत सफाई
  • आठ बिंदुओं में बताई आयोग की निर्णय प्रक्रिया
  • कहा—सुझाव और अलग-अलग राय सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा
  • SIR सहित सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लेने का दावा
यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग के अंदर कथित मतभेद की रिपोर्ट पर आयोग ने विस्तृत जवाब जारी किया है। चुनाव आयोग ने आठ बिंदुओं में अपनी कार्यप्रणाली स्पष्ट करते हुए कहा कि किसी अंतिम निर्णय से पहले अलग-अलग राय, सवाल और सुझाव सामने आना सामान्य प्रक्रिया है।
आयोग ने दावा किया कि SIR सहित पिछले एक साल के सभी आधिकारिक फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू एवं विवेक जोशी की सहमति से लिए गए हैं।

14 बार आपत्ति दर्ज होने का दावा

इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच रिपोर्ट में दावा किया गया कि सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के विभिन्न कदमों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज कराई थी।
रिपोर्ट में मतदाता सूची से नाम हटाने एवं जोड़ने, Form 6 में बदलाव, मतदाता डाटा के नियंत्रण और SIR के दौरान लिए गए कुछ फैसलों पर सवाल उठने का दावा किया गया। रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए।
अब चुनाव आयोग ने आठ बिंदुओं में इन सवालों का जवाब दिया है।

1. संवैधानिक नियमों के तहत काम करता है आयोग

चुनाव आयोग ने कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 324, संबंधित कानूनों और स्थापित संस्थागत परंपराओं के तहत काम करने वाली बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था है।
आयोग में लिखित टिप्पणियां, तकनीकी सुझाव और आंतरिक जांच की व्यवस्था सामान्य रूप से चलती रहती है। इसका उद्देश्य कानूनी नियमों का पालन, पारदर्शिता और चुनावी प्रक्रिया की मजबूती सुनिश्चित करना है।

2. सभी आधिकारिक फैसले कानूनी रूप से मान्य

आयोग के अनुसार, उसके सभी आधिकारिक आदेश, फैसले और प्रशासनिक निर्देश कानूनी रूप से मान्य हैं। इन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त एवं अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम 2023 के तहत तय प्रक्रिया का पालन करते हुए जारी किया गया है।
आयोग ने उन आरोपों को खारिज किया जिनमें बिना आवश्यक मंजूरी के आधिकारिक फैसले जारी किए जाने की बात कही गई थी।

3. शुरुआती सवाल अंतिम असहमति नहीं

चुनाव आयोग ने कहा कि किसी फैसले के शुरुआती Draft पर आयुक्तों द्वारा सवाल उठाना या सुझाव देना सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
आयोग के मुताबिक इन सवालों और सुझावों का उद्देश्य मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करना और चुनावी व्यवस्था को बेहतर बनाना होता है। शुरुआती टिप्पणी को अंतिम फैसले के खिलाफ औपचारिक असहमति नहीं माना जा सकता।

4. अलग-अलग विचार होना सामान्य

आयोग ने कहा कि किसी भी बहुसदस्यीय संस्था में अलग-अलग विचार सामने आना सामान्य बात है। अंतिम फैसला लेने से पहले होने वाली चर्चा निर्णय प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है।
केवल तीनों चुनाव आयुक्त ही नहीं, बल्कि आयोग का प्रत्येक अधिकारी चुनावी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सुझाव देने के लिए अधिकृत है।

5. केवल 14 टिप्पणियों से पूरी तस्वीर सामने नहीं आती

चुनाव आयोग ने कहा कि 10 महीनों में सामने आए कुछ चुनिंदा आंतरिक Notes और टिप्पणियों को दिखाकर बाकी फैसलों एवं मंजूरियों को नजरअंदाज करना पूरी तस्वीर पेश नहीं करता।
आयोग के अनुसार, पिछले एक साल में करीब 40 नई पहल शुरू की गई हैं। मतदाता सूची के पुनरीक्षण, SIR और दूसरे चुनाव सुधारों से जुड़े सभी अंतिम फैसले आयोग ने सर्वसम्मति से लिए हैं।

6. छह राज्यों में चुनाव कराने का दिया उदाहरण

आयोग ने बिहार, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, असम और पश्चिम बंगाल में चुनाव सफलतापूर्वक कराने का भी उल्लेख किया।
चुनाव आयोग ने कहा कि इतने बड़े स्तर पर चुनाव कराने के लिए व्यापक प्रशासनिक व्यवस्था, लगातार निगरानी और आयोग की कई मंजूरियों की जरूरत होती है। ये सभी काम पूरी चुनावी मशीनरी के तालमेल से किए गए।

7. ECINet की सुरक्षा पर दिया जवाब

आयोग ने अपने Digital Platform ECINet की सुरक्षा पर भी सफाई दी। आयोग के अनुसार, यह सिस्टम बिना अनुमति किसी बदलाव या छेड़छाड़ को रोकने वाले कड़े Data Security Protocol के तहत काम करता है।
IT Security Check और Audit Control राष्ट्रीय डाटाबेस पर लागू किए गए मानक Cyber Security उपायों का हिस्सा हैं। मतदाता का नाम जोड़ने या हटाने की कानूनी शक्ति Electoral Registration Officer और District Election Officer जैसे अधिकृत अधिकारियों के पास रहती है।

8. संवैधानिक जिम्मेदारी निभाने का भरोसा

चुनाव आयोग ने आखिरी बिंदु में कहा कि वह अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी से निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।
आयोग ने कहा कि वह लोकतंत्र को मजबूत बनाने में अपनी भूमिका और जिम्मेदारी को समझता है। चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता एवं मतदाताओं का भरोसा बनाए रखने के लिए काम जारी रहेगा।

विपक्ष अभी भी मांग रहा पूरे दस्तावेज

चुनाव आयोग की सफाई के बावजूद विवाद समाप्त होता दिखाई नहीं दे रहा है। विपक्षी नेताओं की मांग है कि आयोग केवल अंतिम फैसलों को सर्वसम्मति वाला न बताए, बल्कि दोनों चुनाव आयुक्तों द्वारा कथित रूप से उठाए गए सवालों और उन पर हुई कार्रवाई की जानकारी भी सार्वजनिक करे।
दूसरी ओर आयोग का कहना है कि आंतरिक चर्चा को टकराव के रूप में दिखाना गलत है। उसके मुताबिक सवाल और सुझाव मिलने के बाद ही अंतिम फैसला सर्वसम्मति से लिया गया।
चुनाव आयोग ने आठ बिंदुओं में अपनी कार्यप्रणाली और फैसलों का बचाव जरूर किया है, लेकिन कथित 14 आपत्तियों से जुड़े दस्तावेज अब भी पूरे विवाद के केंद्र में हैं। आयोग इन्हें सामान्य आंतरिक चर्चा बता रहा है, जबकि विपक्ष इन्हें गंभीर मतभेद मान रहा है। अब जनता की निगाह इस बात पर रहेगी कि आयोग इन आपत्तियों की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करता है या राजनीतिक विवाद और तेज होता है।

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