2027 विधानसभा चुनाव से पहले मायावती ने BSP की बड़ी बैठक बुलाई है। आकाश आनंद को किनारे किए जाने के बाद अब छोटे भतीजे ईशान आनंद को संगठन में बड़ी जिम्मेदारी मिलने की चर्चा है।
आकाश बाहर, अब ईशान पर मायावती लगाएंगी दांव? BSP की बड़ी बैठक में तय होगा 2027 का रोडमैप
मायावती की अध्यक्षता में होने वाली BSP की राष्ट्रीय बैठक में चुनावी तैयारियों, उम्मीदवारों और संगठन की समीक्षा होगी। आकाश आनंद के बाहर होने के बाद ईशान आनंद की भूमिका पर सबसे ज्यादा नजर रहेगी।
BSP की राष्ट्रीय बैठक में मायावती 2027 चुनाव की रणनीति और संगठन की समीक्षा करेंगी।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | लखनऊ | 23 सितंबर 2026
खबर में खास
मायावती ने लखनऊ में बुलाई BSP की राष्ट्रीय बैठक
सभी राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष और वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल
2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति पर होगा मंथन
उम्मीदवारों और पार्टी संगठन की होगी समीक्षा
ईशान आनंद को मिल सकती है महत्वपूर्ण जिम्मेदारी
बहुजन समाज पार्टी की सियासत में बुधवार का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। पार्टी प्रमुख मायावती ने लखनऊ स्थित प्रदेश मुख्यालय में BSP के राष्ट्रीय पदाधिकारियों, वरिष्ठ नेताओं और अलग-अलग राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों की बड़ी बैठक बुलाई है।
बैठक का मुख्य एजेंडा उत्तर प्रदेश सहित आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी और कमजोर हो चुके संगठन को दोबारा सक्रिय करना है। लेकिन राजनीतिक नजर सबसे ज्यादा मायावती के छोटे भतीजे ईशान आनंद पर लगी है।
आकाश आनंद को पार्टी की जिम्मेदारियों से दूर किए जाने के बाद चर्चा है कि मायावती अब ईशान आनंद को संगठन में आगे बढ़ा सकती हैं। हालांकि बैठक से पहले पार्टी की तरफ से उनकी जिम्मेदारी को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
ईशान आनंद को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी
मायावती कुछ दिन पहले साफ कर चुकी हैं कि आकाश आनंद और उनकी बहन दीपिका आनंद को पार्टी में कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। वहीं, ईशान आनंद को सम्मानजनक जिम्मेदारी देकर राजनीति में आगे बढ़ाने की बात कही गई थी।
इसके बाद से ही माना जा रहा है कि राष्ट्रीय बैठक में ईशान आनंद के नए पद या कार्यक्षेत्र की घोषणा हो सकती है। उन्हें किन राज्यों या किस संगठनात्मक क्षेत्र की जिम्मेदारी मिलेगी, इसे लेकर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है।
यदि ईशान आनंद को नई जिम्मेदारी मिलती है तो इसे केवल पारिवारिक बदलाव नहीं, बल्कि BSP की नई पीढ़ी तैयार करने की कोशिश के रूप में भी देखा जाएगा।
आकाश आनंद के लिए दरवाजे बंद?
आकाश आनंद को लंबे समय तक मायावती के राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में देखा जाता रहा है। उन्हें BSP का नेशनल कोऑर्डिनेटर बनाया गया और चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी भी सौंपी गई, लेकिन मायावती ने अलग-अलग मौकों पर उनकी कार्यशैली और राजनीतिक परिपक्वता पर सवाल उठाए।
इस महीने आकाश आनंद को एक बार फिर सभी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से हटा दिया गया। मायावती ने उन पर अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रभाव में होने का आरोप भी लगाया था।
अब राष्ट्रीय बैठक में आकाश आनंद की मौजूदगी और उनकी भविष्य की भूमिका पर भी नजर रहेगी। फिलहाल मायावती के बयानों से यही संकेत मिलता है कि पार्टी संगठन में उनकी वापसी का रास्ता आसान नहीं है।
बैठक में आनंद कुमार की मौजूदगी भी अहम
BSP के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और मायावती के भाई आनंद कुमार भी इस बैठक में शामिल हो सकते हैं। वह ईशान और आकाश आनंद के पिता हैं और पार्टी की राष्ट्रीय बैठकों में उनकी मौजूदगी पहले से निर्धारित मानी जाती है।
आकाश आनंद को किनारे किए जाने और ईशान को आगे बढ़ाने की चर्चाओं के बीच आनंद कुमार की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है। इससे यह संकेत मिल सकता है कि BSP में मायावती के बाद संगठन की दूसरी पंक्ति किस तरह तैयार की जा रही है।
हालांकि पार्टी की अंतिम कमान और सभी बड़े फैसलों का अधिकार अभी पूरी तरह मायावती के पास ही है।
2027 के उम्मीदवारों की होगी समीक्षा
बैठक में 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए संभावित उम्मीदवारों की समीक्षा होने की भी संभावना है। BSP कई विधानसभा क्षेत्रों में प्रभारी प्रत्याशियों के नाम घोषित करना शुरू कर चुकी है।
मायावती का जोर ऐसे उम्मीदवारों पर रहने की संभावना है, जो अपने क्षेत्र में मजबूत संगठन, सामाजिक समीकरण और निजी जनाधार रखते हों। कमजोर प्रदर्शन या संगठन से दूरी रखने वाले पदाधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव भी किया जा सकता है।
BSP पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि वह आगामी चुनाव अपने दम पर लड़ने की तैयारी कर रही है। इसलिए प्रत्याशियों का चयन और बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करना पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।
BSP के सामने वोट बैंक वापस लाने की चुनौती
साल 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में BSP को केवल एक सीट मिली थी और उसका वोट शेयर करीब 12.9 प्रतिशत रह गया था। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में भी पार्टी कोई सीट नहीं जीत सकी।
इसके बावजूद BSP के पास उत्तर प्रदेश में अपना एक स्थायी दलित वोट आधार मौजूद है। भाजपा, समाजवादी पार्टी और आजाद समाज पार्टी की नजर भी इसी वोट बैंक पर है।
मायावती की रणनीति अब अपने पुराने मतदाताओं को दोबारा जोड़ने के साथ युवाओं और नई पीढ़ी तक पहुंच बनाने की है। ऐसे में ईशान आनंद को आगे करने का संभावित फैसला युवा मतदाताओं को जोड़ने की रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है।
क्या ईशान बनेंगे BSP का नया युवा चेहरा?
ईशान आनंद ने लंदन की यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टमिंस्टर से कानून की पढ़ाई की है। वह पिछले कुछ समय से BSP की महत्वपूर्ण बैठकों और कार्यक्रमों में मायावती तथा अपने पिता आनंद कुमार के साथ दिखाई दे रहे हैं।
लेकिन केवल बैठक में मौजूदगी या नई जिम्मेदारी मिलने से उन्हें मायावती का राजनीतिक उत्तराधिकारी नहीं माना जा सकता। पार्टी में उनका भविष्य उनके काम, संगठन के साथ तालमेल और मायावती के भरोसे पर निर्भर करेगा।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मायावती ईशान आनंद को केवल संगठनात्मक जिम्मेदारी देंगी या उन्हें 2027 चुनाव में BSP के प्रमुख युवा चेहरे के तौर पर मैदान में उतारेंगी।