लखनऊ में ₹2799 की EMI बनी ‘खून की किस्त’! युवक को घर से ले जाने, बंधक बनाकर मजदूरी कराने और खून निकलवाने का आरोप

लखनऊ के निगोहां में मोबाइल की ₹2,799 EMI को लेकर युवक को घर से ले जाने, पांच दिन बंधक रखकर मजदूरी कराने और ब्लड बैंक में खून निकलवाने का आरोप है। परिवार का दावा है कि ₹12 हजार और मांगे गए तथा युवक को मारकर गोमती में फेंकने की धमकी भी दी गई।

राजधानी लखनऊ के निगोहां में मोबाइल की बकाया किस्त की वसूली का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। पीड़ित नेवल के परिवार का आरोप है कि ₹2,799 की EMI को लेकर दो लोग उसे घर से ले गए, ब्लड बैंक में एक यूनिट खून निकलवाया और कई दिनों तक बंधक रखकर मजदूरी कराई। परिवार से पैसे मांगने और नेवल को मारकर गोमती में फेंकने की धमकी देने का भी आरोप है। शिकायत के बाद FIR दर्ज हुई है और DCP South ने गिरफ्तारी के लिए दो टीमें बनाई हैं।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | लखनऊ | 15 सितंबर 2026

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लखनऊ के निगोहां में मोबाइल की EMI को लेकर युवक को बंधक रखने और खून निकलवाने के आरोप में पुलिस ने केस दर्ज किया है।

खबर में खास

  • ₹21,500 के मोबाइल की मासिक EMI थी ₹2,799
  • 8 सितंबर को युवक को घर से ले जाने का आरोप
  • ब्लड बैंक में एक यूनिट खून निकलवाने का दावा
  • FIR के बाद गिरफ्तारी के लिए पुलिस की दो टीमें गठित
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से मोबाइल की एक किस्त की वसूली से जुड़ा ऐसा मामला सामने आया है, जिसने रिकवरी के तरीकों से लेकर स्थानीय पुलिस की भूमिका तक गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
निगोहां के राजारामखेड़ा पुरहिया गांव निवासी नेवल के परिवार का आरोप है कि मोबाइल की ₹2,799 की किस्त को लेकर उसे घर से ले जाया गया।
इसके बाद उसे कथित तौर पर एक ब्लड बैंक ले जाकर एक यूनिट खून निकलवाया गया, कई दिनों तक बंधक रखा गया और उससे मजदूरी कराई गई।
परिवार का आरोप है कि शिकायत लेकर थाने जाने के बावजूद शुरुआत में प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
मामला DCP South तक पहुंचने के बाद FIR दर्ज की गई और अब पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही है।

₹21,500 के मोबाइल से कैसे शुरू हुआ मामला?

पीड़ित की मां के मुताबिक नेवल ने करीब एक साल पहले निगोहां की गीता मोबाइल शॉप से ₹21,500 का Samsung मोबाइल जीरो डाउन पेमेंट पर खरीदा था।
इसके लिए 12 महीने तक ₹2,799 की मासिक किस्त तय हुई थी।
परिवार का दावा है कि पहली किस्त बकाया होने पर दुकान से जुड़े लोग मोबाइल वापस ले गए थे।
इसके करीब एक साल बाद 8 सितंबर को दो लोग नेवल के गांव पहुंचे और उसे अपने साथ ले गए।

घर से ले गए, फिर ब्लड बैंक पहुंचाया?

नेवल का आरोप है कि घर से ले जाने के बाद उसे सीधे एक ब्लड बैंक पहुंचाया गया।
वहां कथित तौर पर उसका एक यूनिट खून निकलवाया गया।
इसके बाद उसे सदर इलाके के एक मकान में ले जाकर बंधक रखने और कई दिनों तक जबरन मजदूरी कराने का आरोप है।
यह इस मामले का सबसे गंभीर आरोप है।
फिलहाल पुलिस युवक को ब्लड बैंक ले जाने, खून निकलवाने और कथित वसूली में आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है।

परिवार से ₹2799 मंगवाए, फिर ₹12 हजार की मांग?

परिवार के मुताबिक इसी दौरान नेवल के बड़े भाई राजकुमार के पास फोन आया।
उनसे मोबाइल की किस्त के नाम पर ₹2,799 ऑनलाइन ट्रांसफर कराए गए।
परिवार का आरोप है कि इसके बाद नेवल को छोड़ने के लिए ₹12,000 और मांगे गए।

‘पैसे नहीं दिए तो मारकर गोमती में फेंक देंगे’

मामला यहीं खत्म नहीं हुआ।
परिवार का आरोप है कि अतिरिक्त रकम देने से इनकार करने पर नेवल को जान से मारने की धमकी दी गई।
आरोप है कि कहा गया कि पैसे नहीं मिले तो उसे मारकर गोमती नदी में फेंक दिया जाएगा।
परिवार ने इसके बाद पुलिस से संपर्क किया।

पांच दिन बाद घर कैसे पहुंचा नेवल?

अमर उजाला और आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक पांच दिन बाद नेवल को कैब से वापस भेजा गया।
परिवार का दावा है कि कैब का किराया भी उसके भाई को देना पड़ा।
इसके बाद नेवल ने घर पहुंचकर परिवार को अपने साथ हुई पूरी घटना बताई।

थाने पर पहुंचा परिवार, पुलिस पर भी गंभीर आरोप

इस मामले में सिर्फ कथित रिकवरी एजेंटों की भूमिका ही सवालों में नहीं है।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि जब वे निगोहां थाने पहुंचे तो शुरुआत में उनकी शिकायत पर FIR दर्ज नहीं की गई।
अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने कथित तौर पर केवल उस नंबर पर फोन किया जिससे पैसे मांगे गए थे। बाद में नेवल थाने पहुंचा तो परिवार का आरोप है कि वहां भी कार्रवाई करने के बजाय उसे डरा-धमकाकर वापस भेज दिया गया।

बुजुर्ग मां DCP के पास पहुंचीं, फिर दर्ज हुई FIR

स्थानीय स्तर पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए नेवल की मां वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के पास पहुंचीं।
मामला DCP South मोहम्मद मुश्ताक के संज्ञान में आने के बाद FIR दर्ज करने के निर्देश दिए गए।
अमर उजाला के मुताबिक दो लोगों के खिलाफ अपहरण, बंधक बनाकर पीटने और जानलेवा हमले से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

आरोपियों को पकड़ने के लिए दो टीमें

पुलिस ने अब इस मामले में जांच तेज कर दी है।
DCP South ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दो पुलिस टीमें गठित की गई हैं।
इसके साथ ही परिवार की शिकायत पर शुरुआत में कार्रवाई नहीं होने के आरोपों की भी जांच की जाएगी।
DCP के मुताबिक जांच में किसी पुलिसकर्मी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

ब्लड बैंक की भूमिका भी बड़ा सवाल

इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण सवाल उस ब्लड बैंक को लेकर भी है, जहां नेवल का खून निकाले जाने का आरोप है।
अगर पुलिस जांच में जबरन रक्त निकलवाने का आरोप सही पाया जाता है तो यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित ब्लड बैंक कौन-सा था, वहां युवक की पहचान और सहमति की क्या प्रक्रिया अपनाई गई और रक्त किस उद्देश्य से लिया गया।
अभी उपलब्ध रिपोर्टों में ब्लड बैंक की स्वतंत्र प्रतिक्रिया या उसकी भूमिका का अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। इसलिए इस पहलू को जांच पूरी होने से पहले तथ्य की तरह पेश करना उचित नहीं होगा।

कानून-व्यवस्था पर उठे सवाल

घटना राजधानी लखनऊ की है, इसलिए मामला राजनीतिक बहस में भी पहुंच गया है।
सोशल मीडिया पर इसे उत्तर प्रदेश सरकार की कानून-व्यवस्था और ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति से जोड़कर सवाल उठाए जा रहे हैं।
लेकिन यहां दो स्तर अलग रखना जरूरी है—युवक के साथ बंधक बनाने, खून निकलवाने और धमकी देने के आरोपों की पुलिस जांच अभी जारी है; वहीं स्थानीय पुलिस द्वारा शिकायत पर शुरुआत में कार्रवाई न किए जाने के आरोप की भी विभागीय जांच की बात कही गई है।
मामले में FIR दर्ज हो चुकी है।
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि आरोपियों की गिरफ्तारी कब होती है, कथित ब्लड बैंक की क्या भूमिका सामने आती है और शुरुआती शिकायत पर कार्रवाई न करने के आरोप में किन पुलिसकर्मियों की जवाबदेही तय होती है।

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