स्वतंत्र भारद्वाज को बड़ी राहत, कोर्ट ने दी 3 हफ्ते की अंतरिम जमानत; CJP प्रदर्शन में मारपीट का है मामला
जंतर-मंतर पर CJP प्रदर्शन के दौरान छात्र कार्यकर्ता के पिता से कथित मारपीट मामले में गिरफ्तार स्वतंत्र भारद्वाज को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने तीन हफ्ते की अंतरिम जमानत दी है। कोर्ट ने सोमवार को उनकी जमानत अर्जी पर फैसला सुरक्षित रखा था।
स्वतंत्र भारद्वाज को जंतर-मंतर पर CJP प्रदर्शन के दौरान एक छात्र कार्यकर्ता के पिता से कथित मारपीट के मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने उन्हें तीन हफ्ते की अंतरिम जमानत दी है। भारद्वाज की ओर से regular bail मांगी गई थी, जिस पर अदालत ने सोमवार को सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा था। मामले की FIR में बाद में SC/ST एक्ट और आपराधिक धमकी से जुड़ी धाराएं जोड़ी गई थीं।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली | 15 सितंबर 2026
CJP प्रदर्शन से जुड़े कथित मारपीट मामले में स्वतंत्र भारद्वाज को पटियाला हाउस कोर्ट ने तीन हफ्ते की अंतरिम जमानत दी।
खबर में खास
स्वतंत्र भारद्वाज को 3 हफ्ते की अंतरिम जमानत
पटियाला हाउस कोर्ट ने मंगलवार को सुनाया फैसला
CJP कार्यकर्ता के पिता से कथित मारपीट का मामला
FIR में बाद में जोड़ा गया था SC/ST एक्ट
जंतर-मंतर पर CJP यानी कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन से जुड़े कथित मारपीट मामले में गिरफ्तार स्वतंत्र भारद्वाज को बड़ी कानूनी राहत मिली है।
दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने मंगलवार, 15 सितंबर को भारद्वाज को तीन हफ्ते की अंतरिम जमानत दे दी।
इसका मतलब यह है कि अदालत ने फिलहाल उन्हें सीमित अवधि के लिए राहत दी है। इसे मामले से बरी होना या आरोप खत्म होना नहीं माना जा सकता।
Regular Bail मांगी थी, मिली Interim Bail
इस मामले में एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है।
स्वतंत्र भारद्वाज ने अदालत में regular bail के लिए आवेदन किया था।
लेकिन मंगलवार को सामने आए आदेश में अदालत ने उन्हें तीन सप्ताह की interim bail यानी अंतरिम जमानत दी है।
इसलिए सोशल मीडिया पर चल रही “स्वतंत्र भारद्वाज को जमानत मिल गई, केस खत्म” जैसी व्याख्या सही नहीं होगी।
मामले की कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है।
आखिर किस मामले में गिरफ्तार हुए थे स्वतंत्र भारद्वाज?
मामला दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन के दौरान हुई मारपीट से जुड़ा है।
आरोप है कि प्रदर्शन में शामिल छात्र कार्यकर्ता निशु आजाद के पिता के साथ मारपीट हुई थी।
मामले में स्वतंत्र भारद्वाज का नाम सामने आया और बाद में दिल्ली पुलिस ने उन्हें उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से गिरफ्तार किया।
भारद्वाज पर लगाए गए आरोप अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं।
वायरल वीडियो के बाद बढ़ा था विवाद
मामले ने तब ज्यादा तूल पकड़ा जब स्वतंत्र भारद्वाज का एक वीडियो/पॉडकास्ट क्लिप सोशल मीडिया पर चर्चा में आया।
रिपोर्टों के मुताबिक इसमें उन्होंने प्रदर्शनकारी के पिता के साथ मारपीट को लेकर विवादित दावा किया था और राजनीतिक संपर्कों का भी जिक्र किया था।
इसके बाद CJP से जुड़े लोगों ने दिल्ली में प्रदर्शन कर उनकी गिरफ्तारी की मांग की थी।
FIR में बाद में जोड़ा गया SC/ST Act
इस केस में SC/ST एक्ट लगाए जाने को लेकर भी अदालत में महत्वपूर्ण बहस हुई।
14 सितंबर की सुनवाई के दौरान अदालत ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि घटना के समय जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल का आरोप था या नहीं।
दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि शुरुआती शिकायत में जातिसूचक शब्दों का उल्लेख नहीं था, लेकिन बाद में दर्ज कराए गए बयान में यह आरोप सामने आया, जिसके बाद SC/ST Act की धाराएं जोड़ी गईं।
यही पहलू जमानत की सुनवाई के दौरान भी चर्चा में रहा।
बचाव पक्ष ने क्या दलील दी?
स्वतंत्र भारद्वाज की तरफ से अदालत में दावा किया गया कि उनके खिलाफ कार्रवाई हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों से प्रभावित थी।
बचाव पक्ष ने यह भी दावा किया कि मारपीट की शुरुआत शिकायतकर्ता की तरफ से हुई थी और भारद्वाज पर हमला किया गया था।
उनकी ओर से वीडियो साक्ष्य होने की बात भी कही गई।
ये बचाव पक्ष की दलीलें हैं, अदालत द्वारा घटना के अंतिम तथ्य के रूप में स्थापित निष्कर्ष नहीं।
शिकायतकर्ता पक्ष का क्या आरोप?
दूसरी तरफ शिकायतकर्ता पक्ष स्वतंत्र भारद्वाज पर मारपीट और जातिसूचक टिप्पणी करने का आरोप लगाता रहा है।
इसी मामले में दिल्ली पुलिस ने बाद में SC/ST एक्ट और आपराधिक धमकी से संबंधित प्रावधान भी FIR में जोड़े थे।
इन आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत की आगे की सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा।
पहले 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे गए थे
स्वतंत्र भारद्वाज को गिरफ्तारी के बाद अदालत में पेश किया गया था।
7 सितंबर को पटियाला हाउस कोर्ट ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था और अगली पेशी 21 सितंबर निर्धारित की गई थी।
इसके बाद भारद्वाज ने regular bail के लिए अदालत का रुख किया।
दिल्ली हाईकोर्ट से पहले नहीं मिली थी राहत
स्वतंत्र भारद्वाज ने अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में habeas corpus petition भी दाखिल की थी।
दिल्ली हाईकोर्ट ने 7 सितंबर को वह याचिका खारिज कर दी थी।
इसके बाद उनकी जमानत की लड़ाई पटियाला हाउस कोर्ट में चली।
अब क्या जेल से बाहर आएंगे स्वतंत्र भारद्वाज?
तीन हफ्ते की अंतरिम जमानत मिलने का मतलब है कि इस केस में अदालत ने उन्हें अस्थायी रूप से हिरासत से बाहर रहने की राहत दी है, बशर्ते आदेश में तय जमानत संबंधी औपचारिकताएं और शर्तें पूरी हों।
इसलिए headline में सीधे “जेल से रिहा हुए” लिखना तब तक उचित नहीं होगा जब तक वास्तविक release की पुष्टि न हो जाए।
फिलहाल पुष्ट खबर यह है कि पटियाला हाउस कोर्ट ने तीन हफ्ते की अंतरिम जमानत मंजूर की है।
तीन हफ्ते बाद क्या होगा?
अंतरिम जमानत स्थायी राहत नहीं होती।
इसका अर्थ है कि स्वतंत्र भारद्वाज को अदालत से एक सीमित अवधि की राहत मिली है। केस और संबंधित कानूनी कार्यवाही जारी रहेगी।
आगे regular bail और मामले के अन्य पहलुओं पर अदालत के आदेश महत्वपूर्ण होंगे।
फिलहाल स्वतंत्र भारद्वाज के लिए यह बड़ी राहत है, लेकिन इसे मामले में क्लीन चिट या बरी होना नहीं माना जा सकता।