BJP-TDP Dispute: 21 गांवों को लेकर NDA के दो सहयोगियों में विवाद! ओडिशा सरकार सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में
आंध्र प्रदेश के पंचायत चुनाव नोटिफिकेशन से कोटिया क्षेत्र का पुराना सीमा विवाद फिर चर्चा में है। भाजपा शासित ओडिशा ने कानूनी कदम उठाने की बात कही, जबकि BJD और कांग्रेस भी विरोध में उतरे।
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ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच 21 गांवों को लेकर विवाद फिर बढ़ा है। TDP सरकार के पंचायत चुनाव नोटिफिकेशन पर BJP शासित ओडिशा ने आपत्ति जताई है।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | भुवनेश्वर/अमरावती | 23 अक्टूबर 2026
केंद्र की NDA सरकार में साथ काम कर रहे भाजपा और तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के बीच एक पुराना सीमा विवाद फिर राजनीतिक मुद्दा बन गया है। मामला ओडिशा और आंध्र प्रदेश की सीमा पर स्थित कोटिया ग्राम पंचायत के 21 गांवों का है, जिन पर दोनों राज्य अपना अधिकार जताते रहे हैं।
विवाद तब दोबारा चर्चा में आया, जब TDP के नेतृत्व वाली आंध्र प्रदेश सरकार ने पंचायत चुनाव की अधिसूचना में विवादित क्षेत्र के तीन गांवों को शामिल किया। दूसरी ओर, भाजपा शासित ओडिशा सरकार ने इस कदम पर आपत्ति जताते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपनी अवमानना याचिका फिर आगे बढ़ाने की बात कही है।
इस मामले में विपक्षी बीजू जनता दल (BJD) और कांग्रेस भी सक्रिय हो गए हैं।
खबर में खास
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कोटिया के 28 गांवों में से 21 पर दोनों राज्यों का दावा है।
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आंध्र प्रदेश ने विवादित क्षेत्र के तीन गांव पंचायत चुनाव प्रक्रिया में शामिल किए।
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ओडिशा सरकार सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका आगे बढ़ाना चाहती है।
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नवीन पटनायक ने भाजपा-TDP गठबंधन को लेकर सवाल उठाए।
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आंध्र प्रदेश का कहना है कि चुनाव कराना यथास्थिति आदेश का उल्लंघन नहीं है।
आखिर 21 गांवों को लेकर विवाद क्या है?
ओडिशा के कोरापुट जिले के पोट्टांगी क्षेत्र में स्थित कोटिया ग्राम पंचायत दशकों से सीमा विवाद का केंद्र रही है।
ओडिशा इन गांवों को अपने कोरापुट जिले का हिस्सा मानता है, जबकि आंध्र प्रदेश इन्हें पार्वतीपुरम मान्यम जिले के सालूर क्षेत्र से जुड़ा बताता है।
यह विवाद नया नहीं है। 1960 के दशक में मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। 1968 में अदालत ने यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया था।
हालांकि, दोनों राज्य इस आदेश की व्याख्या अलग तरीके से करते रहे हैं। इसी वजह से प्रशासनिक अधिकार और चुनाव कराने को लेकर समय-समय पर मतभेद सामने आते रहे हैं।
पंचायत चुनाव की अधिसूचना से विवाद क्यों बढ़ा?
आंध्र प्रदेश सरकार ने फागुनासिनेरी, गांजेईपदर और फाटुसीनेरी गांवों को अपने पंचायत चुनाव की प्रक्रिया में शामिल किया।
ओडिशा का दावा है कि ये गांव कोटिया पंचायत का हिस्सा हैं। इसलिए दूसरे राज्य की ओर से वहां चुनाव कराना उसकी प्रशासनिक सीमा में हस्तक्षेप है।
आंध्र प्रदेश के स्थानीय निकाय चुनावों की अधिसूचना के बाद ओडिशा के राजनीतिक दलों ने सरकार से तत्काल कदम उठाने की मांग की।
ओडिशा सरकार ने क्या फैसला किया?
ओडिशा के राजस्व मंत्री सुरेश पुजारी ने 21 अक्टूबर को कहा कि राज्य सरकार सीमा विवाद से जुड़ी अवमानना याचिका को सुप्रीम कोर्ट में फिर आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है।
उन्होंने बताया कि सरकार ने कोटिया क्षेत्र पर अपने दावे की रक्षा के लिए कानूनी और प्रशासनिक विकल्पों की समीक्षा की है।
ओडिशा सरकार का तर्क है कि विवादित गांवों में आंध्र प्रदेश की चुनावी गतिविधियां सुप्रीम कोर्ट के यथास्थिति आदेश से जुड़ा प्रश्न पैदा करती हैं।
हालांकि, आंध्र प्रदेश की मंत्री जी. संध्यारानी का कहना है कि अदालत का आदेश वहां चुनाव कराने पर रोक नहीं लगाता।
नवीन पटनायक ने BJP से क्या सवाल पूछा?
ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और BJD अध्यक्ष नवीन पटनायक ने राज्य की भाजपा सरकार से पूछा कि क्या आंध्र प्रदेश में TDP के साथ भाजपा के राजनीतिक संबंधों का असर कोटिया विवाद पर पड़ रहा है।
पटनायक ने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को पत्र लिखकर राज्य के क्षेत्रीय हितों की रक्षा करने की मांग की।
वहीं भाजपा ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि BJD की पिछली सरकार वर्षों तक इस विवाद का समाधान नहीं करा सकी।
कांग्रेस नेताओं ने भी दोनों राज्यों के बीच बातचीत और कानूनी कार्रवाई की जरूरत बताई है।
NDA के लिए राजनीतिक सवाल क्यों?
