राज्यसभा टिकट के बाद BJP में हलचल: धर्मेंद्र कश्यप ने छोड़ी पार्टी, कौशल किशोर परिवार भी नाराज; UP 2027 में क्यों अहम?
आंवला से दो बार सांसद रहे धर्मेंद्र कश्यप ने 2024 चुनाव में विरोध करने वालों को पार्टी में पद मिलने पर जताई नाराजगी; उधर राज्यसभा टिकट न मिलने के बाद कौशल किशोर के बेटे विकास की पोस्ट से अवध की राजनीति गरम
उत्तर प्रदेश में BJP की राज्यसभा उम्मीदवार सूची के बाद पार्टी के भीतर दो बड़े नेताओं की नाराजगी चर्चा में है। आंवला से दो बार सांसद रहे धर्मेंद्र कश्यप ने BJP छोड़ने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने 2024 लोकसभा चुनाव में उनका विरोध करने वालों को पार्टी में अहम जिम्मेदारी मिलने पर नाराजगी जताई। दूसरी ओर पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर के बेटे विकास किशोर ने राज्यसभा टिकट न मिलने के बाद सम्मान को लेकर तीखी पोस्ट की। इससे UP 2027 से पहले BJP के OBC और दलित सामाजिक समीकरण पर नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है।
राज्यसभा सूची के बाद दो बड़े नेताओं की नाराजगी खुलकर सामने आई
धर्मेंद्र कश्यप ने BJP छोड़ने का ऐलान किया है, जबकि कौशल किशोर परिवार की नाराजगी भी सामने आई है।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | उत्तर प्रदेश डेस्क | 7 अक्टूबर 2026
खबर में खास
धर्मेंद्र कश्यप ने BJP छोड़ने का ऐलान किया
आंवला से 2014 और 2019 में BJP सांसद रहे
2024 लोकसभा चुनाव में उन्हें हार मिली थी
राज्यसभा टिकट की दौड़ में उनका नाम चर्चा में था
सूची आने के बाद सोशल मीडिया पर लिखा—“टाटा बाय-बाय”
अपनी profile से PM मोदी की तस्वीर हटाने की भी चर्चा
धर्मेंद्र ने नाराजगी का कारण सिर्फ राज्यसभा टिकट नहीं बताया
उनका कहना—2024 में विरोध करने वालों को बड़े पद मिले
अगला राजनीतिक कदम समर्थकों से चर्चा के बाद तय करने की बात
SP में वापसी की चर्चा तेज, लेकिन अभी औपचारिक घोषणा नहीं
धर्मेंद्र कश्यप पहले SP में विधायक और मंत्री रह चुके हैं
कौशल किशोर को भी राज्यसभा टिकट नहीं मिला
बेटे विकास किशोर ने लिखा—जहां माता-पिता का सम्मान न हो, वहां नहीं रहना चाहिए
विकास BJP SC मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं
कौशल किशोर की पत्नी जय देवी BJP विधायक हैं
राज्यसभा सूची में अवध से प्रियंका सिंह रावत को मौका
BJP ने 8 उम्मीदवारों में 3 OBC और 2 SC चेहरे उतारे
अब चर्चा—2027 से पहले स्थानीय नेताओं की नाराजगी कैसे संभालेगी पार्टी
राज्यसभा सूची से शुरू हुई नाराजगी अब इस्तीफे तक पहुंची
लखनऊ/बरेली: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले BJP की राज्यसभा उम्मीदवार सूची ने पार्टी के अंदर एक नई राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है।
आंवला से दो बार सांसद रहे धर्मेंद्र कश्यप ने BJP छोड़ने का ऐलान कर दिया है।
एक दिन पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर सिर्फ दो शब्द लिखे थे—“टाटा बाय-बाय”। उस समय उन्होंने सीधे पार्टी का नाम नहीं लिया था, लेकिन बुधवार को सामने आए उनके बयान ने स्थिति साफ कर दी। उन्होंने BJP से अलग होने की बात कही और बताया कि अपने अगले कदम का फैसला समर्थकों से चर्चा के बाद करेंगे।
इस घटनाक्रम के साथ ही पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर के परिवार की नाराजगी भी चर्चा में है।
यानी राज्यसभा चुनाव के टिकट बंटवारे के बाद BJP के सामने एक साथ रुहेलखंड और अवध—दो क्षेत्रों से असंतोष की आवाजें सामने आई हैं।
धर्मेंद्र कश्यप ने क्यों छोड़ी BJP?
धर्मेंद्र कश्यप ने अपनी नाराजगी की वजह सिर्फ राज्यसभा टिकट न मिलने को नहीं बताया है।
उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि जिन लोगों ने उस चुनाव में खुलकर उनका विरोध किया, अगर उन्हीं लोगों को पार्टी में बड़ी जिम्मेदारियां मिलें और उनके खिलाफ कोई कार्रवाई न हो तो उन्हें तकलीफ होना स्वाभाविक है।
यही बात उनकी नाराजगी का सबसे अहम हिस्सा है।
यानी मामला सिर्फ यह नहीं है कि उन्हें राज्यसभा टिकट नहीं मिला। उनके मुताबिक पार्टी के भीतर 2024 चुनाव के दौरान उनके खिलाफ काम करने वाले लोगों को बाद में महत्व मिलने से उनकी नाराजगी बढ़ी।
‘टाटा-बाय-बाय’ पोस्ट से शुरू हुई थी चर्चा
राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची आने के बाद धर्मेंद्र कश्यप ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा:
“टाटा-बाय-बाय”
उन्होंने उस पोस्ट में BJP का नाम नहीं लिया था।
लेकिन उसी समय उनकी सोशल मीडिया profile से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर हटाए जाने की भी चर्चा हुई। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठने लगा कि क्या धर्मेंद्र BJP छोड़ने वाले हैं।
अब उनके ताजा बयान के बाद पार्टी छोड़ने की स्थिति साफ हो गई है।
समर्थक तय करेंगे अगला रास्ता
हालांकि BJP छोड़ने की बात स्पष्ट करने के बाद भी धर्मेंद्र कश्यप ने अभी अपनी अगली पार्टी का नाम घोषित नहीं किया है।
उनका कहना है कि वह पहले समर्थकों के साथ बैठक करेंगे और उनकी राय लेने के बाद अगला राजनीतिक कदम उठाएंगे।
इसीलिए अभी headline में:
“धर्मेंद्र कश्यप SP में शामिल हो गए”
लिखना गलत होगा।
क्या 18 अक्टूबर को SP में जाएंगे धर्मेंद्र?
यही अब सबसे बड़ा सवाल है।
राजनीतिक हलकों में धर्मेंद्र कश्यप की समाजवादी पार्टी में वापसी की चर्चा काफी तेज है। कुछ रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से 18 अक्टूबर को उनके SP में शामिल होने की संभावना भी जताई गई है।
लेकिन धर्मेंद्र ने खुद अभी यह तारीख या SP में जाने की औपचारिक घोषणा नहीं की है।
इसलिए फिलहाल सही स्थिति यह है:
BJP छोड़ी—confirmed.
SP में शामिल होना—चर्चा/संभावना, अभी official announcement बाकी।
SP से धर्मेंद्र का पुराना रिश्ता
धर्मेंद्र कश्यप के SP में जाने की चर्चा अचानक नहीं शुरू हुई है।
उनका राजनीतिक इतिहास खुद समाजवादी पार्टी से जुड़ा रहा है।
उन्होंने राजनीति की शुरुआत स्थानीय स्तर से की। 2002 में BSP के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीतकर विधायक बने। इसके बाद वह समाजवादी पार्टी में चले गए और 2007 में SP के टिकट पर फिर विधायक चुने गए।
वह उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री भी रहे।
2009 में उन्होंने SP के टिकट पर आंवला लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन जीत नहीं सके। बाद में SP से अलग होकर BJP में शामिल हुए।
इसलिए अगर भविष्य में वह SP में जाते हैं तो उसे राजनीतिक तौर पर “घर वापसी” के रूप में भी देखा जाएगा।
BJP में आने के बाद दो बार सांसद
BJP में आने के बाद धर्मेंद्र कश्यप का राजनीतिक ग्राफ तेजी से बढ़ा।
2014 में पार्टी ने उन्हें आंवला लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया और उन्होंने चुनाव जीत लिया।
2019 में BJP ने फिर उन पर भरोसा किया और वह लगातार दूसरी बार सांसद बने।
हालांकि 2024 लोकसभा चुनाव में उन्हें SP उम्मीदवार से हार का सामना करना पड़ा।
इसके बाद भी वह रुहेलखंड क्षेत्र में BJP के प्रमुख OBC चेहरों में गिने जाते रहे।
राज्यसभा टिकट की उम्मीद क्यों थी?
UP की 10 राज्यसभा सीटों के लिए BJP ने इस बार 8 उम्मीदवारों का ऐलान किया।
धर्मेंद्र कश्यप का नाम भी संभावित दावेदारों के बीच चर्चा में था।
लेकिन सूची में उनका नाम नहीं आया।
इसके उलट उनके बरेली क्षेत्र से धर्मपाल सिंह और श्रुति गंगवार को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया गया। TV9 भारतवर्ष
धर्मपाल सिंह योगी सरकार में मंत्री हैं, जबकि श्रुति गंगवार वरिष्ठ नेता संतोष गंगवार की बेटी हैं।
इसके बाद धर्मेंद्र की नाराजगी सार्वजनिक हो गई।
सिर्फ धर्मेंद्र नहीं, कौशल किशोर परिवार भी नाराज
राज्यसभा टिकट बंटवारे के बाद दूसरी बड़ी नाराजगी पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर के परिवार से सामने आई।
कौशल किशोर खुद खुलकर BJP छोड़ने की घोषणा नहीं कर रहे हैं, लेकिन उनके बेटे विकास किशोर की सोशल मीडिया पोस्ट ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी।
विकास ने लिखा:
“जिस परिवार में मां-बाप का मान और सम्मान न हो, उस परिवार में नहीं रहना चाहिए।”
इस पोस्ट को कौशल किशोर को राज्यसभा टिकट न मिलने से जोड़कर देखा गया।
विकास किशोर कौन हैं?
विकास किशोर BJP के अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं।
दिलचस्प बात यह है कि उन्हें यह जिम्मेदारी कुछ ही दिन पहले मिली थी। उस समय कौशल किशोर ने पार्टी नेतृत्व का धन्यवाद भी किया था।
लेकिन राज्यसभा उम्मीदवार सूची सामने आने के तुरंत बाद विकास की “सम्मान” वाली पोस्ट ने फिर सवाल खड़े कर दिए।
कौशल किशोर को क्यों थी राज्यसभा की उम्मीद?
कौशल किशोर मोहनलालगंज से BJP के सांसद रह चुके हैं और केंद्र सरकार में मंत्री भी रहे हैं।
2024 लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
राज्यसभा चुनाव से पहले उनका नाम भी संभावित दावेदारों के रूप में चर्चा में था। लेकिन BJP ने उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया।
अवध क्षेत्र और पासी समाज से पार्टी ने पूर्व सांसद प्रियंका सिंह रावत को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है।
इसी फैसले के बाद कौशल किशोर परिवार की नाराजगी खुलकर सामने आई।
कौशल किशोर पहले भी लगा चुके हैं ‘साइडलाइन’ करने का आरोप
राज्यसभा सूची से पहले भी कौशल किशोर पार्टी के भीतर अपनी स्थिति को लेकर सवाल उठा चुके थे।
उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि उन्हें लगता है कि कुछ लोग उन्हें साइडलाइन करने की कोशिश कर रहे हैं।
उनका आरोप था कि पार्टी और सरकार के कई कार्यक्रमों की उन्हें सूचना नहीं दी जाती और कई मौकों पर बुलाया भी नहीं जाता।
हालांकि कौशल किशोर ने तब यह भी कहा था कि वह इन परिस्थितियों से डरने वाले नहीं हैं और जनता तथा पार्टी कार्यकर्ताओं की समस्याएं उठाते रहेंगे।
परिवार अभी भी BJP से जुड़ा
यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि कौशल किशोर के परिवार ने अभी BJP छोड़ने की औपचारिक घोषणा नहीं की है।
उनके बेटे विकास पार्टी में संगठनात्मक पद पर हैं।
उनकी पत्नी जय देवी लखनऊ की मलिहाबाद विधानसभा सीट से BJP विधायक हैं। AajTak
इसलिए सिर्फ बेटे की नाराजगी वाली पोस्ट के आधार पर यह कहना कि “कौशल किशोर ने BJP छोड़ दी” गलत होगा।
BJP की राज्यसभा सूची में आखिर क्या सामाजिक समीकरण है?
BJP ने उत्तर प्रदेश से जिन आठ उम्मीदवारों को उतारा है, उनमें सामाजिक प्रतिनिधित्व पर साफ जोर दिखाई देता है।
सूची में:
3 OBC उम्मीदवार 2 अनुसूचित जाति उम्मीदवार 2 ब्राह्मण 1 ठाकुर
चेहरा शामिल है।
यानी पार्टी ने राज्यसभा सूची में OBC और SC प्रतिनिधित्व बढ़ाने की कोशिश की है।
लेकिन टिकट मिलने और न मिलने के बाद स्थानीय नेताओं की नाराजगी ने यह दिखाया कि सिर्फ जातीय category का प्रतिनिधित्व पर्याप्त नहीं होता—उस category के भीतर भी अलग-अलग क्षेत्रीय नेता और समुदाय अपनी राजनीतिक हिस्सेदारी देखते हैं।
फिर पासी और कश्यप समीकरण की चर्चा क्यों?
कौशल किशोर पासी समुदाय से आते हैं और अवध क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय हैं।
दूसरी तरफ धर्मेंद्र कश्यप का राजनीतिक आधार रुहेलखंड और आंवला-बरेली क्षेत्र में रहा है, जहां कश्यप समेत गैर-यादव OBC समूह राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
उत्तर प्रदेश में 2011 की जनगणना में Pasi/Tarmali को राज्य की अनुसूचित जातियों में एक बड़े समुदाय के रूप में दर्ज किया गया है। Census India
इसीलिए इन दोनों नेताओं की नाराजगी को 2027 से पहले BJP के व्यापक OBC-दलित सामाजिक समीकरण के संदर्भ में देखा जा रहा है।
लेकिन किसी एक या दो नेताओं की नाराजगी से पूरे समुदाय के वोट का रुख तय हो गया है—ऐसा कहना अभी सही नहीं होगा।
2024 लोकसभा चुनाव ने क्यों बढ़ाई BJP की चिंता?
2024 लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में BJP को 2019 के मुकाबले नुकसान हुआ था, जबकि SP ने अपना प्रदर्शन काफी बेहतर किया।
उस चुनाव के बाद BJP के भीतर गैर-यादव OBC और गैर-जाटव दलित समुदायों तक अपनी पहुंच मजबूत रखने पर चर्चा तेज हुई।
इसी पृष्ठभूमि में राज्यसभा उम्मीदवार सूची में भी OBC और SC नेताओं को पर्याप्त जगह दी गई है।
धर्मेंद्र और कौशल किशोर से जुड़े घटनाक्रम को इसलिए सीधे 2027 की चुनावी तैयारियों के संदर्भ में देखा जा रहा है।
क्या SP इन नाराज नेताओं पर नजर रख रही है?
धर्मेंद्र कश्यप के मामले में समाजवादी पार्टी का angle ज्यादा साफ है।
उनकी अखिलेश यादव से हाल के दिनों में मुलाकातों की चर्चा पहले से रही है और वह खुद पहले SP में रह चुके हैं।
इसके कारण उनकी संभावित वापसी की चर्चा स्वाभाविक रूप से तेज हुई है।
लेकिन अभी SP ने भी सार्वजनिक रूप से उनके joining की तारीख घोषित नहीं की है।
कौशल किशोर के मामले में ऐसी कोई पुष्ट औपचारिक बातचीत सार्वजनिक नहीं हुई है।
क्या BJP को 2027 में नुकसान होगा?
अभी ऐसा निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
धर्मेंद्र कश्यप का पार्टी छोड़ना एक ठोस राजनीतिक घटना है।
कौशल किशोर परिवार की नाराजगी भी सार्वजनिक है।
लेकिन पूरे Pasi या Kashyap समुदाय का राजनीतिक रुख इससे कितना बदलेगा, यह अभी मापा नहीं जा सकता।
आगामी महीनों में तीन बातें महत्वपूर्ण होंगी:
धर्मेंद्र कश्यप आखिर किस पार्टी में जाते हैं?
BJP कौशल किशोर परिवार की नाराजगी कैसे संभालती है?
दोनों नेताओं को 2027 में टिकट या संगठनात्मक भूमिका कहां मिलती है?
इन्हीं घटनाक्रमों के बाद वास्तविक राजनीतिक असर का बेहतर आकलन किया जा सकेगा।
BJP के सामने अब क्या चुनौती?
BJP की चुनौती सिर्फ राज्यसभा चुनाव खत्म करने की नहीं है।
UP 2027 से पहले पार्टी को उन नेताओं को भी संभालना होगा जो 2024 चुनाव हारने के बाद संगठन में अपनी अगली भूमिका तलाश रहे हैं।
राज्यसभा की सिर्फ आठ सीटों पर उम्मीदवार बनाए जा सकते थे, जबकि दावेदार ज्यादा थे।
ऐसी स्थिति में टिकट से वंचित नेताओं की नाराजगी स्वाभाविक राजनीतिक चुनौती बन सकती है।
अब पार्टी यह कैसे संतुलित करती है—यही आने वाले महीनों का महत्वपूर्ण सवाल होगा।
उत्तर प्रदेश की राज्यसभा सूची ने BJP को आठ नए उम्मीदवार जरूर दिए हैं, लेकिन इसके साथ दो अलग क्षेत्रों से असंतोष भी सामने आया है। धर्मेंद्र कश्यप अब BJP छोड़ने का ऐलान कर चुके हैं, जबकि कौशल किशोर परिवार की नाराजगी सार्वजनिक है। धर्मेंद्र के SP में लौटने की चर्चा तेज है, लेकिन उन्होंने अभी अपना अगला दल घोषित नहीं किया है। इसलिए UP 2027 से पहले असली सवाल यह नहीं कि किसी एक समुदाय का वोट अभी किस ओर चला गया, बल्कि यह है कि BJP अपने पुराने OBC-दलित नेताओं की नाराजगी को कैसे संभालती है और विपक्ष इन घटनाक्रमों को किस तरह राजनीतिक अवसर में बदलने की कोशिश करता है।