‘3 नहीं, 403 पर नजर’: अखिलेश नहीं उतारेंगे तीसरा उम्मीदवार, BJP के 8-SP के 2 की राह साफ

SP ने रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी पर ही रोकी सूची; BJP के आठ उम्मीदवार मैदान में, अतिरिक्त प्रत्याशी नहीं आया तो 16 अक्टूबर को मतदान की जरूरत नहीं पड़ेगी

उत्तर प्रदेश राज्यसभा चुनाव में बड़ा बदलाव आया है। समाजवादी पार्टी ने तीसरा उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला किया है। अखिलेश यादव ने ‘3 नहीं, 403 पर नजर’ का संदेश देकर विधानसभा चुनाव की ओर फोकस का संकेत दिया। SP के रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी तथा BJP के आठ उम्मीदवार मैदान में हैं। अगर कोई अतिरिक्त वैध नामांकन नहीं आता तो सभी 10 उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना लगभग तय है।

तीसरे उम्मीदवार से पीछे हटी SP, अब 10 सीटों का गणित लगभग साफ

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समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश राज्यसभा चुनाव में तीसरा उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला किया है। BJP के आठ और SP के दो उम्मीदवारों के रहने से सभी 10 सीटों पर निर्विरोध निर्वाचन की राह लगभग साफ हो गई है।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | उत्तर प्रदेश डेस्क | 6 अक्टूबर 2026

खबर में खास

  • उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों की चुनाव प्रक्रिया
  • SP तीसरा उम्मीदवार नहीं उतारेगी
  • अखिलेश यादव का संदेश—“तीन नहीं, हमारी निगाह 403 पर है”
  • SP के उम्मीदवार रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी
  • BJP ने सभी 8 उम्मीदवार घोषित किए
  • BJP के सभी उम्मीदवार इस बार नए चेहरे
  • तीसरा SP उम्मीदवार आता तो cross-voting की जरूरत पड़ सकती थी
  • BJP के आठवें उम्मीदवार को भी संख्या से आगे अतिरिक्त समर्थन की चुनौती थी
  • तीसरा उम्मीदवार न आने से सीधा मुकाबला टलने की स्थिति
  • BJP की सूची में 3 OBC, 2 SC, 2 ब्राह्मण और 1 ठाकुर
  • BJP की सूची में 2 महिलाएं
  • नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर
  • Scrutiny 7 अक्टूबर
  • नाम वापसी 9 अक्टूबर
  • जरूरत हुई तो मतदान 16 अक्टूबर
  • केवल 10 वैध उम्मीदवार बचे तो मतदान की आवश्यकता नहीं होगी

अखिलेश ने तीसरे उम्मीदवार पर खींचे कदम

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों को लेकर पिछले कई दिनों से बन रही सियासी टक्कर अब लगभग खत्म होती दिखाई दे रही है। समाजवादी पार्टी ने तीसरा उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला किया है।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार सुबह सोशल मीडिया पर लिखा—“अब निगाहें 3 पर नहीं, 403 पर हैं।”
यह संदेश ऐसे समय आया जब राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन का आखिरी दिन है और पिछले कुछ दिनों से चर्चा चल रही थी कि समाजवादी पार्टी दो के बजाय तीसरा उम्मीदवार भी मैदान में उतार सकती है। 

‘3 नहीं, 403’ का मतलब क्या है?

उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं और अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है।
अखिलेश यादव के इस संदेश को राज्यसभा की संभावित तीसरी सीट के बजाय अगले विधानसभा चुनाव पर फोकस के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
सपा पिछले दो विधानसभा चुनावों से सत्ता से बाहर है। वहीं 2024 लोकसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन के बाद वह अब 2027 के लिए संगठन और गठबंधन की रणनीति पर जोर दे रही है। हालांकि “403” वाली पोस्ट से आगे अखिलेश ने तीसरा उम्मीदवार न उतारने की विस्तृत वजह सार्वजनिक रूप से नहीं बताई है। पहले तीसरा उम्मीदवार उतारने की बात क्यों थी?
अखिलेश यादव ने इससे पहले संकेत दिया था कि अगर आवश्यक संख्या जुटी तो समाजवादी पार्टी तीसरा राज्यसभा उम्मीदवार मैदान में उतार सकती है।
अगर ऐसा होता तो उत्तर प्रदेश में 10 सीटों के लिए 11 उम्मीदवार हो जाते और चुनाव होना तय था।
विधानसभा के मौजूदा संख्या बल में BJP नेतृत्व वाला गठबंधन सात सीटों और SP-कांग्रेस खेमे के दो उम्मीदवारों को अपेक्षाकृत आसानी से जिताने की स्थिति में था। असली मुकाबला BJP की आठवीं और SP की संभावित तीसरी सीट पर बनता। 

Cross-voting क्यों बनती सबसे बड़ी कहानी?

राज्यसभा चुनाव सामान्य बहुमत से नहीं बल्कि proportional representation और single transferable vote प्रणाली से होते हैं।
अगर 11 उम्मीदवार मैदान में उतरते तो BJP को आठवें और SP को तीसरे प्रत्याशी के लिए अपने निश्चित वोटों से आगे दूसरे विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती थी।
यही वजह थी कि संभावित cross-voting इस चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बन सकती थी।

पिछला राज्यसभा चुनाव भी था सपा के लिए सबक

पिछले राज्यसभा चुनाव में cross-voting के कारण सपा को झटका लगा था।
ऐसे में तीसरा उम्मीदवार उतारने पर पार्टी को अपने विधायकों को एकजुट रखने के साथ अतिरिक्त वोट जुटाने की चुनौती का सामना करना पड़ता।
राजनीतिक विश्लेषण में इसी वजह से माना जा रहा है कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले किसी संभावित राज्यसभा हार या भीतर की टूट को सार्वजनिक मुद्दा बनने देने के बजाय सपा ने दो सुरक्षित उम्मीदवारों तक सीमित रहना बेहतर समझा। यह विश्लेषण है; पार्टी ने इसे आधिकारिक कारण के रूप में घोषित नहीं किया है।

अब राज्यसभा का गणित क्या है?

उत्तर प्रदेश में कुल 10 सीटों पर चुनाव प्रक्रिया चल रही है।
समाजवादी पार्टी ने दो उम्मीदवार उतारे हैं और BJP ने आठ।
इस तरह प्रमुख उम्मीदवारों की संख्या फिलहाल 10 है।
अगर नामांकन की जांच के बाद सभी 10 उम्मीदवारों के पर्चे वैध पाए जाते हैं और कोई अन्य प्रत्याशी मैदान में नहीं रहता, तो सीटों और प्रत्याशियों की संख्या बराबर होने के कारण मतदान कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
इसी स्थिति में सभी को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया जाएगा। 

अभी ‘जीत गए’ क्यों नहीं लिखना चाहिए?

नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है।
इसके बाद:
7 अक्टूबर — नामांकन पत्रों की जांच
9 अक्टूबर — नाम वापस लेने की अंतिम तारीख
16 अक्टूबर — आवश्यकता पड़ने पर मतदान
इसलिए 9 अक्टूबर से पहले “सभी सांसद बन गए” कहना तकनीकी रूप से जल्दबाजी होगी।
सही भाषा है:
“निर्विरोध चुने जाने की राह साफ”
या
“निर्विरोध निर्वाचन लगभग तय”। 

SP के दोनों उम्मीदवार कौन हैं?

रामगोपाल यादव: मुलायम परिवार के पुराने रणनीतिकार

समाजवादी पार्टी ने अपने वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय महासचिव प्रोफेसर रामगोपाल यादव को फिर राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाया है।
रामगोपाल यादव का जन्म 29 जून 1946 को सैफई, इटावा में हुआ था। राजनीति में आने से पहले वह अध्यापन से जुड़े रहे। उन्होंने भौतिक विज्ञान में M.Sc. और राजनीति विज्ञान में Ph.D. की है। Live Hindustan
उनका राजनीतिक सफर 1989 में स्थानीय निकाय राजनीति से शुरू हुआ। वह ब्लॉक प्रमुख और इटावा जिला परिषद के अध्यक्ष रहे।
1992 में वह पहली बार राज्यसभा पहुंचे। 2004 में संभल से लोकसभा सांसद भी चुने गए। वह संसद में समाजवादी पार्टी संसदीय दल का नेतृत्व कर चुके हैं और लंबे समय से पार्टी की राष्ट्रीय राजनीति एवं संसदीय रणनीति के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। 
रामगोपाल यादव रिश्ते में अखिलेश यादव के चाचा हैं।

धनराज परिमल नथवानी: राजनीति से ज्यादा कॉरपोरेट और खेल जगत की पहचान

सपा के दूसरे उम्मीदवार धनराज परिमल नथवानी का चयन सबसे अधिक चर्चा में रहा।
5 फरवरी 1986 को जन्मे धनराज ने लंदन के Regent's Business School से International Business की पढ़ाई की है। वह कॉरपोरेट क्षेत्र से जुड़े हैं और ऊर्जा, इंफ्रास्ट्रक्चर तथा इंजीनियरिंग से जुड़े विभिन्न कारोबार और प्रोजेक्ट्स में जिम्मेदारी संभालते रहे हैं।
खेल प्रशासन में भी उनकी बड़ी भूमिका है।
वह Gujarat Cricket Association के अध्यक्ष हैं और Gujarat State Football Association से भी जुड़े हैं।
उनके पिता परिमल नथवानी भी उद्योग जगत से जुड़े रहे हैं और राज्यसभा के सदस्य रहे हैं। 
धनराज का चयन इसलिए भी चर्चा में आया क्योंकि वह सपा की पारंपरिक सक्रिय राजनीतिक पृष्ठभूमि से आने वाला चेहरा नहीं हैं।

BJP ने किन 8 नेताओं को दिया टिकट?

BJP ने आठों राज्यसभा सीटों के लिए:
धर्मपाल सिंह
राधाकांत ओझा
प्रकाश पाल
विद्यासागर सोनकर
गोपी कृष्ण पांडेय
प्रियंका सिंह रावत
राम प्रताप सिंह चौहान
श्रुति गंगवार
को उम्मीदवार बनाया है। 
इस बार पार्टी ने अपने मौजूदा राज्यसभा सदस्यों को दोहराने के बजाय नए चेहरों को मैदान में उतारा है। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा भी UP की इस सूची में दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाए गए हैं। 

BJP की सूची में सामाजिक समीकरण

BJP के आठ उम्मीदवारों में:
3 OBC
2 अनुसूचित जाति
2 ब्राह्मण
1 ठाकुर
चेहरा शामिल है।
इनमें प्रियंका सिंह रावत और श्रुति गंगवार दो महिला उम्मीदवार हैं। 
अब सभी BJP उम्मीदवारों का परिचय:

धर्मपाल सिंह: योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री

धर्मपाल सिंह बरेली की आंवला विधानसभा सीट से विधायक हैं और उत्तर प्रदेश सरकार में पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग के मंत्री हैं।
उनका जन्म 15 जनवरी 1953 को बरेली के गुलड़िया गौरीशंकर गांव में हुआ था।
उन्होंने स्थानीय निकाय राजनीति से शुरुआत की। 1988 में मंझगवां ब्लॉक प्रमुख बने और 1996 में पहली बार आंवला से विधानसभा चुनाव जीता।
इसके बाद 2002, 2012, 2017 और 2022 में भी विधायक बने।
योगी सरकार के पहले कार्यकाल में वह सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री भी रहे। 

राधाकांत ओझा: वरिष्ठ अधिवक्ता, दो बार हाईकोर्ट बार अध्यक्ष

राधाकांत ओझा का जन्म 10 फरवरी 1959 को प्रतापगढ़ में हुआ।
वह 1987 से वकालत कर रहे हैं और संवैधानिक एवं सिविल मामलों के अधिवक्ता हैं।
वह इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के 2015-16 और 2022-23 में अध्यक्ष रह चुके हैं।
उनके बड़े भाई शिवाकांत ओझा सक्रिय राजनीति में रहे और अलग-अलग समय पर राज्य सरकार में मंत्री भी रहे। 

श्रुति गंगवार: संतोष गंगवार की बेटी, टेक्नोलॉजी से राजनीति तक सफर

श्रुति गंगवार झारखंड के राज्यपाल और बरेली से आठ बार लोकसभा सांसद रहे संतोष गंगवार की बेटी हैं।
वह बरेली की Urban Cooperative Bank की चेयरमैन हैं।
उन्होंने वर्ष 2000 में IIT Roorkee से Chemical Engineering की पढ़ाई पूरी की। बाद में टेक्नोलॉजी क्षेत्र में काम किया और 2012 में उद्यमिता की तरफ बढ़ीं।
उन्होंने IIM Bangalore से महिला उद्यमियों से जुड़ा short-term management programme भी किया है।
श्रुति 2019 से BJP संगठन में सक्रिय बताई जाती हैं और 2024 से बैंक की चेयरमैन हैं। 

विद्यासागर सोनकर: सांसद से MLC तक लंबा संगठनात्मक सफर

जौनपुर के विद्यासागर सोनकर BJP के पुराने संगठनात्मक नेताओं में शामिल हैं।
वह 1985 में बूथ अध्यक्ष बने। इसके बाद नगर निकाय और पार्टी संगठन में कई जिम्मेदारियां संभालीं।
1996 से 1998 तक वह सैदपुर लोकसभा सीट से सांसद रहे।
2018 से 2024 तक उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य रहे और 2023 में विधान परिषद में उपनेता बने।
वह BJP अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। 

प्रकाश पाल: संघ प्रचारक से OBC मोर्चा अध्यक्ष तक

प्रकाश पाल कानपुर के रहने वाले हैं और लंबे समय से संगठन की राजनीति से जुड़े हैं।
उन्होंने संघ प्रचारक के रूप में काम किया और बाद में फतेहपुर, हमीरपुर, महोबा, अयोध्या, बांदा, कानपुर और इटावा जैसे क्षेत्रों में संगठन की जिम्मेदारियां संभालीं।
वह पश्चिम उत्तर प्रदेश में क्षेत्रीय संगठन मंत्री भी रहे।
2023 में उन्हें कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र का अध्यक्ष बनाया गया और 2026 में BJP पिछड़ा वर्ग मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया।

राम प्रताप सिंह चौहान: युवा मोर्चा से विधायक और प्रदेश महामंत्री तक

आगरा के राम प्रताप सिंह चौहान ने 1991 में BJP युवा मोर्चा के मंडल अध्यक्ष के रूप में राजनीति शुरू की।
इसके बाद महानगर संगठन, ब्रज क्षेत्र और प्रदेश संगठन में कई जिम्मेदारियां संभालीं।
2005-06 के दौरान वह प्रदेश उपाध्यक्ष भी रहे।
2017 में एत्मादपुर विधानसभा सीट से विधायक चुने गए और वर्तमान में पार्टी के प्रदेश महामंत्री हैं।
उनके पिता योगेंद्र सिंह चौहान BJP के शुरुआती संगठन से जुड़े नेताओं में रहे। 

गोपी कृष्ण पांडेय: संघ, बजरंग दल और किसान मोर्चा का अनुभव

कानपुर के गोपी कृष्ण पांडेय की संगठनात्मक पृष्ठभूमि काफी पुरानी है।
वह कम उम्र से संघ से जुड़े और 1990 से 1992 के बीच बजरंग दल में जिला स्तर की जिम्मेदारी संभाली।
इसके बाद हिन्दू जागरण मंच, BJP युवा मोर्चा और किसान मोर्चा में अलग-अलग पदों पर रहे।
वह BJP किसान मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यसमिति से भी जुड़े रहे और कई राज्यों में संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभालीं। 

प्रियंका सिंह रावत: बाराबंकी की पूर्व सांसद

प्रियंका सिंह रावत का जन्म 7 अगस्त 1985 को हुआ।
उन्होंने Political Science में MA और Mass Communication एवं Electronic Journalism में PG Diploma किया है।
वह जून 2013 में BJP में शामिल हुईं और 2014 के लोकसभा चुनाव में बाराबंकी से सांसद चुनी गईं।
2019 में उन्हें लोकसभा टिकट नहीं मिला।
बाद में उन्होंने पार्टी संगठन में प्रदेश महामंत्री की जिम्मेदारी संभाली और वर्तमान में प्रदेश उपाध्यक्ष हैं

BJP ने सभी पुराने सांसद क्यों बदले?

BJP ने इस बार उत्तर प्रदेश से अपने मौजूदा राज्यसभा सदस्यों को दोबारा टिकट देने के बजाय आठ नए चेहरे उतारे हैं।
सूची में संगठन से जुड़े नेताओं, OBC, दलित, ब्राह्मण, ठाकुर और महिला चेहरों को जगह दी गई है। इसे 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सामाजिक और संगठनात्मक संतुलन के संदर्भ में देखा जा रहा है।
हालांकि किसी खास जातीय या चुनावी मकसद को पार्टी की आधिकारिक वजह तभी माना जाना चाहिए जब पार्टी खुद उसे स्पष्ट करे।

क्या अब 16 अक्टूबर को मतदान नहीं होगा?

यह सबसे जरूरी सवाल है।
चुनाव की घोषित तारीख 16 अक्टूबर है।
लेकिन अगर scrutiny और withdrawal के बाद उत्तर प्रदेश की 10 सीटों के लिए सिर्फ BJP के आठ और SP के दो उम्मीदवार ही बचे, तो उम्मीदवारों की संख्या सीटों के बराबर होने के कारण मतदान की जरूरत नहीं होगी।
उन्हें निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया जा सकेगा। 
इसलिए अभी:
“16 अक्टूबर की वोटिंग रद्द हो गई” मत लिखिए।
सही बात होगी:
“अगर अतिरिक्त उम्मीदवार नहीं बचा तो मतदान की जरूरत नहीं पड़ेगी।”

आखिर SP ने मुकाबला क्यों टाला?

इस फैसले का सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक पहलू 2027 है।
अगर SP तीसरा प्रत्याशी उतारती तो उसके लिए पार्टी के अपने विधायकों से आगे अतिरिक्त समर्थन की जरूरत पड़ती। BJP के आठवें प्रत्याशी के सामने भी इसी तरह अतिरिक्त वोट जुटाने की चुनौती रहती।
इससे पूरा चुनाव cross-voting और विधायकों की टूट की परीक्षा बन सकता था।
अखिलेश के “3 नहीं, 403” संदेश के बाद अब पार्टी ने राज्यसभा की अतिरिक्त सीट पर जोखिम लेने की बजाय विधानसभा की सभी 403 सीटों पर ध्यान देने का संकेत दिया है।

उत्तर प्रदेश की राज्यसभा की 10 सीटों पर जिस बड़े मुकाबले की संभावना बन रही थी, वह समाजवादी पार्टी के तीसरा उम्मीदवार न उतारने के फैसले के बाद लगभग खत्म हो गई है। BJP के आठ और SP के दो उम्मीदवारों के साथ फिलहाल सीट और प्रत्याशी बराबर हैं। लेकिन औपचारिक निर्विरोध निर्वाचन के लिए 7 अक्टूबर की scrutiny और 9 अक्टूबर की नाम वापसी पूरी होना बाकी है। इस बीच अखिलेश यादव का ‘3 नहीं, 403’ संदेश साफ तौर पर राज्यसभा से ज्यादा 2027 विधानसभा चुनाव की ओर राजनीतिक फोकस का संकेत दे रहा है।

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