गिरफ्तारी के अगले दिन रो पड़े हुमायूं कबीर: राजनीति छोड़ने के संकेत, बोले—रेजीनगर में BJP जीतेगी

12 घंटे बाद रिहा हुए AJUP प्रमुख ने पुलिस-प्रशासन पर चुनाव प्रभावित करने का आरोप लगाया; कहा—नौदा की जनता से राय लेकर विधायक पद छोड़ने पर भी फैसला करेंगे

रेजीनगर उपचुनाव के दौरान पुलिस से टकराव और गिरफ्तारी के एक दिन बाद AJUP प्रमुख और नौदा विधायक हुमायूं कबीर मीडिया के सामने भावुक हो गए। उन्होंने चुनावी राजनीति से संन्यास लेने के संकेत दिए और दावा किया कि रेजीनगर में BJP जीतेगी। कबीर ने कहा कि वह नौदा की जनता की बैठक बुलाकर राय लेंगे और पर्याप्त समर्थन मिलने पर विधायक पद से इस्तीफा भी दे सकते हैं। मतगणना 9 अक्टूबर को होनी है।

कल गिरफ्तारी, आज आंसू और राजनीति छोड़ने की बात

humayun-kabir-retirement-rejinagar-bjp-win-claim.jpg (2)
हुमायूं कबीर ने राजनीति से संन्यास लेने के संकेत दिए हैं।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | पश्चिम बंगाल डेस्क | 7 अक्टूबर 2026

खबर में खास

  • हुमायूं कबीर ने चुनावी राजनीति से संन्यास के संकेत दिए
  • मीडिया से बात करते हुए भावुक होकर रो पड़े
  • कहा—नौदा की जनता से माफी मांगेंगे
  • जनता की राय के बाद MLA पद से इस्तीफा देने पर भी विचार
  • दावा—रेजीनगर उपचुनाव में BJP जीतेगी
  • मतगणना अभी 9 अक्टूबर को होनी है
  • पुलिस-प्रशासन पर चुनाव निष्पक्ष न होने का आरोप
  • कहा—शुभेंदु अधिकारी CM रहे तो विधानसभा नहीं जाएंगे
  • 6 अक्टूबर को मतदान के दौरान पुलिस से टकराव हुआ था
  • करीब 12 घंटे बाद रिहा किए गए
  • रेजीनगर से उनके बेटे गुलाम नबी आजाद AJUP उम्मीदवार हैं
  • हुमायूं 2026 विधानसभा चुनाव में नौदा और रेजीनगर दोनों सीटों से जीते थे
  • उन्होंने रेजीनगर सीट छोड़ी थी, इसलिए उपचुनाव हुआ
  • इससे पहले Babri Masjid मॉडल पर मस्जिद निर्माण की घोषणा को लेकर भी चर्चा में रहे
  • राजनीति छोड़ना अभी अंतिम, औपचारिक इस्तीफा नहीं है

कल पुलिस से भिड़े, आज कैमरे के सामने रो पड़े

कोलकाता/मुर्शिदाबाद: पश्चिम बंगाल के रेजीनगर उपचुनाव में मतदान के दौरान गिरफ्तारी के एक दिन बाद AJUP प्रमुख और नौदा विधायक हुमायूं कबीर बिल्कुल अलग अंदाज में सामने आए।
मंगलवार को पुलिस के साथ उनकी तीखी बहस और गिरफ्तारी चर्चा में रही थी। बुधवार को मीडिया से बात करते हुए वह भावुक हो गए और चुनावी राजनीति से समय से पहले संन्यास लेने के संकेत दिए।
उन्होंने दावा किया कि मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था और उनके साथ हुए व्यवहार से उनका मोहभंग हो गया है।

राजनीति छोड़ने पर क्या कहा?

हुमायूं कबीर ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद वह नौदा में लोगों की बैठक बुलाएंगे और अपनी आगे की राजनीतिक भूमिका पर उनसे राय लेंगे।
उन्होंने संकेत दिया कि वह अपने 64वें वर्ष में सक्रिय चुनावी राजनीति छोड़ सकते हैं। साथ ही यह भी कहा कि अगर बैठक में बड़ी संख्या में लोग उन्हें विधायक पद छोड़ने की अनुमति देते हैं तो वह नौदा विधानसभा सीट से इस्तीफा देने पर भी विचार करेंगे।
यानी अभी उन्होंने विधायक पद से औपचारिक इस्तीफा नहीं दिया है।

MLA पद भी छोड़ देंगे?

कबीर ने अपने बयान में विधायक पद को लेकर एक शर्त रखी।
उनके मुताबिक वह नौदा के लोगों को बुलाकर बैठक करेंगे। अगर वहां मौजूद लोगों में बहुमत उनसे कहता है कि वह अब पद छोड़ सकते हैं, तो वह इस्तीफा देने को तैयार होंगे। AajTak
इसलिए अभी यह लिखना गलत होगा कि “हुमायूं कबीर ने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया।”
फिलहाल उन्होंने सिर्फ ऐसा करने की संभावना जताई है।

शुभेंदु अधिकारी को लेकर क्या कहा?

हुमायूं कबीर ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का नाम लेकर भी बड़ा बयान दिया।
उन्होंने कहा कि जब तक शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री रहेंगे, वह विधानसभा नहीं जाएंगे और अपने इस फैसले के लिए नौदा के मतदाताओं से माफी मांगेंगे। 
यह उनका राजनीतिक बयान है। विधायक के रूप में उनकी संवैधानिक स्थिति तब तक बनी रहती है, जब तक वह औपचारिक रूप से इस्तीफा न दें या कानून के तहत कोई दूसरी स्थिति न बने।

नतीजों से पहले BJP की जीत का दावा

इस पूरे बयान में सबसे चौंकाने वाला हिस्सा रेजीनगर उपचुनाव को लेकर उनका दावा है।
कबीर ने मतगणना से पहले ही कहा कि रेजीनगर में BJP जीतेगी।
उन्होंने इस संभावित नतीजे के लिए मतदान के दौरान प्रशासन और पुलिस की कथित भूमिका को जिम्मेदार ठहराया। The New Indian Express
यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह हुमायूं कबीर का दावा है, चुनाव परिणाम नहीं।
मतगणना 9 अक्टूबर को होनी है।

अपने ही बेटे के चुनाव में BJP जीत का दावा क्यों बड़ा?

रेजीनगर में AJUP की ओर से हुमायूं कबीर के बेटे गुलाम नबी आजाद उम्मीदवार हैं।
इसलिए मतदान के एक दिन बाद पिता का यह कहना कि BJP जीतने वाली है, राजनीतिक रूप से असामान्य बयान माना जा रहा है। AajTak
कबीर का कहना है कि उनका दावा चुनावी माहौल और प्रशासन की भूमिका को देखकर है।
लेकिन अंतिम फैसला EVM/मतपत्र की गिनती के बाद निर्वाचन परिणाम से ही होगा।

रेजीनगर उपचुनाव हुआ क्यों?

2026 पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हुमायूं कबीर ने नौदा और रेजीनगर दोनों सीटों से चुनाव जीता था।
नियमों के तहत एक विधायक एक साथ दो विधानसभा सीटें नहीं रख सकता। उन्होंने नौदा सीट अपने पास रखी और रेजीनगर सीट छोड़ दी।
इसी वजह से रेजीनगर में उपचुनाव कराया गया।
इस उपचुनाव में AJUP ने उनके बेटे गुलाम नबी आजाद को उम्मीदवार बनाया।

कल आखिर क्या हुआ था?

6 अक्टूबर को मतदान के दौरान हुमायूं कबीर और पुलिस के बीच विवाद हुआ।
कबीर ने आरोप लगाया कि पुलिस मतदान केंद्रों पर हस्तक्षेप कर रही है और उनके समर्थकों तथा मतदाताओं को परेशान किया जा रहा है।
पुलिस के साथ बहस बढ़ने के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया। कुछ रिपोर्टों में इसे गिरफ्तारी बताया गया है। करीब 12 घंटे बाद वह रिहा हुए।

पुलिस ने हुमायूं पर क्या आरोप लगाए?

पुलिस की ओर से कबीर पर मतदान के दिन अभद्र भाषा इस्तेमाल करने, मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश और भड़काऊ टिप्पणी करने जैसे आरोप लगाए गए। AajTak
ये अभी आरोप हैं। उपलब्ध जानकारी में किसी अदालत द्वारा इन आरोपों पर अंतिम दोषसिद्धि की बात सामने नहीं आई है।

विपक्ष ने भी चुनाव पर उठाए सवाल

सिर्फ हुमायूं कबीर ही नहीं, पश्चिम बंगाल के उपचुनाव के बाद दूसरे विपक्षी दलों ने भी रेजीनगर और नंदीग्राम में मतदान प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
कुछ उम्मीदवारों और दलों ने booth agents को हटाए जाने, मतदाताओं को डराने और पुलिस की कथित भूमिका के आरोप लगाए तथा दोबारा मतदान की मांग की।
दूसरी ओर BJP ने इन आरोपों को खारिज करते हुए मतदान को शांतिपूर्ण बताया है।

रेजीनगर में कितना मतदान हुआ?

रेजीनगर में मतदान प्रतिशत काफी ऊंचा रहा।
अंतिम रिपोर्टों में यहां मतदान करीब 80 प्रतिशत के आसपास दर्ज किया गया, जबकि नंदीग्राम में भी मतदान करीब 80 प्रतिशत रहा। The Indian Express
उच्च मतदान के बावजूद नतीजों से पहले किसी उम्मीदवार की जीत घोषित नहीं की जा सकती।

हुमायूं राजनीति से इतने निराश क्यों दिखे?

अपने भावुक बयान में कबीर ने कहा कि चुनावी राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था से उनका भरोसा कम हुआ है।
उन्होंने खास तौर पर मतदान के दिन अपने साथ हुए व्यवहार और पुलिस की कार्रवाई को अपने फैसले की वजह बताया। The Print
लेकिन उनकी यह नाराजगी व्यक्तिगत राजनीतिक अनुभव और आरोपों पर आधारित है। पुलिस तथा राज्य प्रशासन का पक्ष अलग है।

क्या उनका संन्यास final है?

अभी नहीं।
यह इस खबर का सबसे जरूरी fact-check है।
कबीर ने राजनीति छोड़ने के संकेत दिए हैं, लेकिन उन्होंने अभी किसी पार्टी पद या विधायक पद से औपचारिक इस्तीफा नहीं सौंपा।
उनका कहना है कि चुनाव प्रक्रिया समाप्त होने के बाद वह नौदा में समर्थकों और मतदाताओं की बैठक बुलाकर अंतिम फैसला करेंगे। 
इसलिए headline में “हुमायूं ने राजनीति से संन्यास ले लिया” की जगह “संन्यास के संकेत” लिखना ज्यादा सही है।

Babri Masjid मॉडल वाले प्रोजेक्ट से भी आए थे चर्चा में

हुमायूं कबीर इससे पहले मुर्शिदाबाद में अयोध्या की बाबरी मस्जिद के मॉडल पर नई मस्जिद बनाने की घोषणा को लेकर राष्ट्रीय चर्चा में आए थे।
दिसंबर 2025 में उन्होंने इसके निर्माण की नींव रखी थी। बाद में TMC से अलग होने के बाद उन्होंने अपनी पार्टी Aam Janata Unnayan Party बनाई। AajTak
उन्होंने इस प्रोजेक्ट में मस्जिद के साथ अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और अन्य सुविधाएं विकसित करने की भी बात कही थी।
यह पृष्ठभूमि उनके राजनीतिक प्रोफाइल का हिस्सा है, लेकिन मौजूदा खबर का केंद्र उनका संन्यास संकेत और रेजीनगर उपचुनाव है।

TMC से अलग होकर बनाई अपनी पार्टी

हुमायूं कबीर लंबे समय तक पश्चिम बंगाल की अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों से जुड़े रहे।
TMC से अलग होने के बाद उन्होंने AJUP बनाई और 2026 विधानसभा चुनाव में अपनी नई पार्टी के साथ मैदान में उतरे।
नौदा और रेजीनगर दोनों सीटों से उनकी जीत ने उन्हें मुर्शिदाबाद की राजनीति में प्रमुख क्षेत्रीय चेहरा बना दिया। PRS Legislative Research
इसीलिए चुनाव जीतने के कुछ महीनों बाद ही राजनीति छोड़ने का संकेत देना बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है।

अब 9 अक्टूबर पर नजर

हुमायूं कबीर ने भले BJP की जीत का दावा कर दिया हो, लेकिन रेजीनगर उपचुनाव का आधिकारिक परिणाम अभी बाकी है।
9 अक्टूबर को मतगणना होगी।
उस दिन यह पता चलेगा कि उनके बेटे गुलाम नबी आजाद, BJP उम्मीदवार या कोई दूसरा प्रत्याशी सीट जीतता है। Navbharat Times
नतीजा आने के बाद हुमायूं का अगला कदम और महत्वपूर्ण हो जाएगा।

अगर बेटा हारता है तो क्या राजनीति छोड़ देंगे?

कबीर ने अपने बयान को सीधे बेटे की जीत या हार की शर्त से नहीं जोड़ा।
उन्होंने अपने संन्यास संकेत की वजह व्यापक राजनीतिक व्यवस्था, पुलिस-प्रशासन के प्रति नाराजगी और निजी मोहभंग को बताया। The Print
इसलिए अभी यह कहना सही नहीं होगा कि बेटे की हार होने पर ही वह राजनीति छोड़ेंगे।

अब आगे तीन बड़े सवाल

इस घटनाक्रम के बाद तीन चीजों पर नजर रहेगी:
पहला—9 अक्टूबर को रेजीनगर में कौन जीतता है?
दूसरा—क्या हुमायूं वास्तव में नौदा में बैठक बुलाकर राजनीति छोड़ने का फैसला करते हैं?
तीसरा—क्या वह विधायक पद से औपचारिक इस्तीफा देते हैं या विधानसभा से दूरी तक सीमित रहते हैं?
इनका जवाब आने वाले कुछ दिनों में मिलेगा।
रेजीनगर उपचुनाव में मतदान के दिन पुलिस से टकराव और गिरफ्तारी के बाद हुमायूं कबीर का अगले ही दिन रोते हुए राजनीति से संन्यास का संकेत देना बंगाल की राजनीति में बड़ा मोड़ है। और भी चौंकाने वाली बात यह है कि उनका अपना बेटा मैदान में है, फिर भी उन्होंने नतीजों से पहले BJP की जीत का दावा किया है। फिलहाल उनका संन्यास या विधायक पद से इस्तीफा अंतिम नहीं है। असली नजर अब 9 अक्टूबर के नतीजे और उसके बाद नौदा में होने वाली उनकी प्रस्तावित बैठक पर होगी।

About The Author

Advertisement

LatestNews

‘कितनी भी कोशिश कर लो, ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देंगे’: अभिजीत दीपके को रामदास आठवले की सीधी चुनौती
जंतर-मंतर से पहले राहुल फिर हिरासत में, सड़क पर लेटीं प्रियंका; दूसरे दिन भी पुलिस से टकराव
‘10 हजार में वोट मत बेचिए’: PK का बड़ा बयान, बोले—सम्राट चौधरी को हटाना है तो बदलाव के लिए वोट करें
लंच के बाद फिर सड़क पर विपक्ष: राहुल-खड़गे जंतर-मंतर पहुंचे, बोले—‘हर FIR मेरे लिए मेडल’
‘देश में Civil War चाहते हैं?’ CJP नेता सौरव दास का बड़ा आरोप—10 अक्टूबर के प्रदर्शन में हमले की साजिश
गिरफ्तारी के अगले दिन रो पड़े हुमायूं कबीर: राजनीति छोड़ने के संकेत, बोले—रेजीनगर में BJP जीतेगी
योगी के ‘80-20’ पर अखिलेश का पलटवार: बोले—108 मनकों पर ‘PDA’ लिखकर जाप करें; 5 सेकंड का वीडियो शेयर