‘देश में Civil War चाहते हैं?’ CJP नेता सौरव दास का बड़ा आरोप—10 अक्टूबर के प्रदर्शन में हमले की साजिश

दिल्ली में छात्र संगठनों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में सौरव दास ने दावा किया कि कुछ दक्षिणपंथी समूहों को CJP प्रदर्शन के विरोध में जुटाया जा रहा है; बंगाल से लोगों को दिल्ली भेजने की ‘सूचना’ मिलने की बात भी कही

10 अक्टूबर के जंतर-मंतर प्रदर्शन से पहले CJP नेता सौरव दास ने BJP और केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि कुछ दक्षिणपंथी समूहों को दिल्ली बुलाकर प्रदर्शनकारियों पर हमला कराने की कोशिश हो सकती है। उन्होंने बंगाल से भी लोगों को भेजे जाने की ‘सूचना’ मिलने की बात कही और सवाल किया—क्या आप देश में Civil War चाहते हैं? इन आरोपों के समर्थन में अभी कोई स्वतंत्र सार्वजनिक प्रमाण सामने नहीं आया है।

10 अक्टूबर से पहले CJP ने जताई हमले की आशंका

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सौरव दास ने 10 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले संभावित हिंसा की आशंका जताई।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | राष्ट्रीय डेस्क | 7 अक्टूबर 2026

खबर में खास

  • CJP का 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर बड़ा प्रदर्शन प्रस्तावित
  • मुख्य मुद्दा—CEC ज्ञानेश कुमार और SIR
  • सौरव दास ने BJP और सरकार पर गंभीर आरोप लगाए
  • दावा—कुछ दक्षिणपंथी समूहों को counter-mobilisation के लिए बुलाया जा रहा
  • बंगाल से लोगों को ट्रेन से दिल्ली भेजने का “इनपुट” मिलने की बात
  • प्रदर्शन में पत्थरबाजी, अंडे फेंकने और लाठी चलाने की आशंका जताई
  • सौरव ने पूछा—“क्या आप देश में Civil War चाहते हैं?”
  • CJP ने अपने समर्थकों को सतर्क रहने को कहा
  • संगठन का कहना—उसका आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा
  • CJP और कई छात्र संगठनों ने संयुक्त mobilisation का ऐलान किया
  • आंदोलन सिर्फ ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर खत्म न करने की बात
  • SIR रोकने, voter list restoration और independent inquiry जैसी मांगें भी रखीं
  • दिल्ली पुलिस 10 अक्टूबर के प्रदर्शन की अनुमति से इनकार कर चुकी है
  • इसके बावजूद CJP ने कार्यक्रम जारी रखने की बात कही है
  • हिंसा या organised attack की CJP की आशंका की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है

10 अक्टूबर से पहले CJP का नया और गंभीर आरोप

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR के खिलाफ 10 अक्टूबर को प्रस्तावित जंतर-मंतर प्रदर्शन से पहले राजनीतिक तनाव और बढ़ गया है।

CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने बुधवार को दिल्ली में छात्र संगठनों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आरोप लगाया कि उनके प्रस्तावित शांतिपूर्ण प्रदर्शन को बिगाड़ने के लिए कुछ दक्षिणपंथी समूहों को mobilise किया जा रहा है। Live Hindustan

उन्होंने BJP और केंद्र सरकार पर भी आरोप लगाए और दावा किया कि संगठन को संभावित हमले से जुड़ी सूचनाएं मिली हैं।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये CJP के आरोप हैं और इनके समर्थन में अभी किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी ने सार्वजनिक रूप से कोई पुष्टि नहीं की है।

‘क्या आप देश में Civil War चाहते हैं?’

सौरव दास ने अपने बयान में सबसे तीखा सवाल केंद्र सरकार और BJP से किया।
उन्होंने पूछा कि क्या देश में ऐसी स्थिति पैदा की जा रही है जहां एक समूह को दूसरे समूह के खिलाफ खड़ा कर दिया जाए।
इसी संदर्भ में उन्होंने सवाल उठाया—“क्या आप देश में सिविल वॉर चाहते हो?” Live Hindustan
यही बयान अब 10 अक्टूबर के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले इस राजनीतिक विवाद का सबसे चर्चित हिस्सा बन गया है।

CJP को किस तरह के हमले की आशंका?

सौरव दास ने दावा किया कि संगठन के पास ऐसी सूचनाएं हैं जिनमें 10 अक्टूबर को प्रदर्शन स्थल के आसपास CJP विरोधी लोगों के जुटने की बात कही जा रही है।
उन्होंने संभावित:
पत्थरबाजी
लाठियों से हमले
अंडे फेंकने
जैसी घटनाओं की आशंका जताई।
हम इन अपीलों या कथित हिंसक तरीकों को यहां सिर्फ सुरक्षा संबंधी आरोप के संदर्भ में बता रहे हैं।

बंगाल से लोगों को भेजने का भी दावा

सौरव दास ने एक और गंभीर दावा किया।
उनका कहना था कि संगठन को सूचना मिली है कि बंगाल से कुछ लोगों को ट्रेन के जरिए दिल्ली भेजा जा सकता है।
उन्होंने इसे संभावित counter-mobilisation से जोड़ा। Live Hindustan
लेकिन इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है।
इसलिए इसे तथ्य की तरह नहीं, बल्कि CJP द्वारा जताई गई आशंका के रूप में ही प्रकाशित करना चाहिए।

यह नया आरोप अचानक क्यों आया?

पिछले कुछ दिनों में सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो सामने आए हैं जिनमें CJP के 10 अक्टूबर के प्रदर्शन का विरोध करने के लिए लोगों से जंतर-मंतर पहुंचने की अपील की गई।
कुछ वीडियो में aggressive भाषा और विरोधियों को जबरन हटाने जैसी बातें भी कही गईं। इसी पृष्ठभूमि में CJP ने सुरक्षा को लेकर अपनी चिंता बढ़ाई है।
इससे पहले भी CJP समर्थकों और right-wing influencers के बीच टकराव और पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामले सामने आ चुके हैं।

CJP ने अपने समर्थकों से क्या कहा?

सौरव दास ने प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों को सतर्क रहने को कहा।
उन्होंने कहा कि अगर कोई समूह प्रदर्शन को derail करने की कोशिश करे तो कार्यकर्ताओं को चौकन्ना रहना चाहिए।
साथ ही CJP ने दोहराया कि उसका घोषित कार्यक्रम शांतिपूर्ण protest है और वह कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग की बात कर रही है।

सरकार से बातचीत की भी मांग

सौरव दास ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी लंबे समय से जवाब मांग रहे हैं लेकिन उनकी बात नहीं सुनी जा रही।
उन्होंने सरकार से युवाओं के सवालों और electoral reforms पर बातचीत करने की मांग की।
उनका कहना था कि पिछली बार बातचीत न करना गलती थी और सरकार को इस बार ऐसा नहीं करना चाहिए। 

10 अक्टूबर का protest सिर्फ CJP का नहीं?

CJP इस आंदोलन को अब सिर्फ अपनी पार्टी के कार्यक्रम के रूप में पेश नहीं कर रही।
संगठन ने इसे व्यापक youth mobilisation बनाने की कोशिश शुरू कर दी है।
बुधवार की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में CJP के साथ कई छात्र संगठनों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे और उन्होंने देशभर से लोगों को दिल्ली पहुंचने की अपील की। 

कौन-कौन से छात्र संगठन साथ?

संयुक्त mobilisation में अलग-अलग छात्र संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
इनमें AISA, AISF, SFI और AAP से जुड़े छात्र संगठन के प्रतिनिधियों के शामिल होने की जानकारी है। 
इन संगठनों ने चुनाव आयोग और SIR से जुड़े मुद्दों पर साझा आंदोलन की बात कही है।

प्रदर्शन ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर खत्म नहीं होगा?

यह भी आज का बड़ा नया अपडेट है।
CJP ने कहा है कि अगर CEC ज्ञानेश कुमार इस्तीफा भी दे देते हैं, तब भी आंदोलन वहीं खत्म नहीं होगा।
सौरव दास के मुताबिक संगठन electoral system में व्यापक बदलाव चाहता है और इसके लिए लंबा आंदोलन चल सकता है।

CJP की नई मांगें क्या हैं?

संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिर्फ इस्तीफे की मांग नहीं रखी गई।
CJP की मांगों में शामिल हैं:
  • CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा
  • उनके खिलाफ criminal proceedings की मांग
  • SIR प्रक्रिया पर रोक
  • January 2025 voter list restore करने की मांग
  • स्वतंत्र जांच
  • Election Commissioners की नियुक्ति से जुड़े 2023 कानून को बदलने की मांग
  • EC appointments के लिए independent selection process The New Indian Express
ये CJP और सहयोगी संगठनों की मांगें हैं; इनमें से किसी पर अभी सरकार या अदालत की अंतिम स्वीकृति नहीं है।

Delhi Police ने permission देने से किया इनकार

10 अक्टूबर के कार्यक्रम को लेकर दूसरी बड़ी बाधा पुलिस की मंजूरी है।
CJP ने Parliament Street Police Station में formal intimation और undertaking जमा की है।
लेकिन दिल्ली पुलिस ने प्रस्तावित जंतर-मंतर प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार किया है। The Times of India
इसके बाद भी CJP ने कार्यक्रम आगे बढ़ाने की बात कही है।

‘Permission कौन देता है?’ पर भी विवाद

सौरव दास का कहना है कि जंतर-मंतर एक निर्धारित protest site है और पुलिस का काम सुरक्षा तथा traffic management करना होना चाहिए।

उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार के लिए पुलिस से अनुमति क्यों ली जाए।

लेकिन दिल्ली पुलिस का रुख अलग है।
नई दिल्ली में लागू प्रतिबंधात्मक आदेशों और हाल के प्रदर्शनों को देखते हुए प्रशासन बिना अनुमति बड़े जमावड़े पर कार्रवाई कर सकता है।

क्या 10 अक्टूबर को टकराव तय है?

नहीं।
यह इस खबर में सबसे जरूरी तथ्य है।
CJP ने संभावित हिंसा की आशंका जताई है और सोशल मीडिया पर counter-mobilisation की अपीलें सामने आई हैं।
लेकिन अभी यह साबित नहीं हुआ है कि:
किसी organised group को हिंसा के लिए आधिकारिक तौर पर भेजा जा रहा है,
या
10 अक्टूबर को हिंसा जरूर होगी।
इसलिए headline में “Civil War शुरू होगा” या “BJP हमला करवाएगी” जैसी भाषा इस्तेमाल करना गलत होगा।

BJP पर आरोप, जवाब अभी नहीं

सौरव दास ने अपने बयान में BJP और केंद्र सरकार को सीधे निशाने पर लिया।
लेकिन उनके आज के खास आरोप—कि कथित दक्षिणपंथी संगठनों को हिंसा के लिए mobilise किया जा रहा है—पर BJP की ओर से तत्काल कोई विस्तृत जवाब सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया था।
इसलिए कहानी में आरोप को साफ attribution के साथ रखना जरूरी है।

पिछली घटनाओं के कारण CJP क्यों चिंतित?

CJP समर्थकों पर पहले भी विरोध और हमले के आरोप लग चुके हैं।
सितंबर में एक right-wing influencer को उस मामले में हिरासत में लिया गया था जिसमें एक CJP समर्थक के पिता पर हमले का आरोप था। The Tribune
CJP इसी तरह की पिछली घटनाओं का हवाला देकर कह रही है कि 10 अक्टूबर को सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होनी चाहिए।

दिल्ली पुलिस की चुनौती अब दोगुनी

10 अक्टूबर को पुलिस के सामने अब दो संभावित चुनौतियां हैं।
एक तरफ CJP और छात्र संगठनों की बड़ी mobilisation की योजना।
दूसरी ओर सोशल मीडिया पर उसके विरोध में लोगों से जुटने की अपील।
अगर दोनों तरफ से बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं तो प्रशासन को protest rights और public order दोनों संभालने होंगे।

अब सबसे बड़ा सवाल क्या?

10 अक्टूबर से पहले तीन developments सबसे महत्वपूर्ण होंगे:
क्या CJP कार्यक्रम पर पुलिस कोई नया आदेश जारी करती है?
क्या कथित counter-mobilisation को लेकर कोई FIR या preventive action होता है?
क्या CJP के हमले संबंधी आरोपों पर सरकार या BJP औपचारिक जवाब देती है?
इनमें से कोई भी नया कदम इस कहानी को बड़ा update बना सकता है।
10 अक्टूबर के जंतर-मंतर प्रदर्शन से पहले CJP ने अब सिर्फ permission का मुद्दा नहीं उठाया है, बल्कि संभावित हिंसा की गंभीर आशंका भी जताई है। सौरव दास ने BJP और सरकार पर आरोप लगाकर ‘Civil War’ वाला सवाल उठाया है, लेकिन इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। दूसरी तरफ पुलिस प्रदर्शन की अनुमति से इनकार कर चुकी है। ऐसे में अगला अहम सवाल यही है कि 10 अक्टूबर से पहले प्रशासन संभावित counter-mobilisation और सुरक्षा को लेकर क्या कदम उठाता है।

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