मायावती द्वारा भाजपा की ‘बी टीम’ बताए जाने और नगीना में साजिश के तहत चुनाव जिताने के आरोप पर चंद्रशेखर आजाद ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि जनता ने बता दिया है कि उसके लिए सड़क पर संघर्ष करने वाला चंद्रशेखर कौन है।
मायावती के आरोप से गरमाई दलित राजनीति, चंद्रशेखर ने सम्मान के साथ दिया सीधा जवाब
मायावती के आरोपों पर नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने दिया जवाब।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | उत्तर प्रदेश डेस्क | 29 सितंबर 2026
खबर में खास
मायावती ने चंद्रशेखर की नगीना जीत पर उठाए सवाल
भाजपा की मदद से चुनाव जीतने का लगाया आरोप
चंद्रशेखर बोले—जनता ने मेरी पहचान बता दी
मायावती के प्रति सम्मान होने की बात दोहराई
अपनी पार्टी का सही नाम भी याद दिलाया
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले दलित राजनीति के दो बड़े चेहरों के बीच जुबानी मुकाबला तेज हो गया है। बसपा प्रमुख मायावती के गंभीर आरोपों के बाद नगीना सांसद और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने पलटवार किया है।
चंद्रशेखर ने कहा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि जो लोग कभी पूछते थे—“कौन चंद्रशेखर?”, उन्हें अब देश की जनता ने बता दिया है कि उसके लिए लड़ने और सड़क पर संघर्ष करने वाला चंद्रशेखर कौन है।
मायावती ने नगीना की जीत पर उठाए थे सवाल
मायावती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया था कि 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने एक साजिश के तहत चंद्रशेखर को नगीना सीट से जिताने में मदद की। उन्होंने चंद्रशेखर पर भाजपा के इशारे पर काम करने और दलित वोटों को बांटकर बसपा को कमजोर करने का आरोप भी लगाया।
मायावती ने चुनाव प्रक्रिया और EVM पर सवाल उठाते हुए भविष्य में बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की। हालांकि, उनके आरोपों के समर्थन में कोई सार्वजनिक प्रमाण सामने नहीं रखा गया है।
‘नगीना की जनता ने मुझे चुना’
चंद्रशेखर ने मायावती के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी जीत नगीना की जनता के समर्थन से हुई है। उन्होंने कहा कि जनता ने उन्हें अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने और सड़क पर संघर्ष करने के कारण चुना है।
उन्होंने अपने जवाब में मायावती के खिलाफ अपमानजनक भाषा का प्रयोग नहीं किया। चंद्रशेखर ने कहा कि बहनजी के प्रति उनके मन में पहले भी सम्मान था और आज भी सम्मान है।
पार्टी का नाम गलत लिखने पर भी दिया जवाब
चंद्रशेखर ने मायावती के प्रेस नोट में उनकी पार्टी का नाम गलत लिखे जाने की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी का सही नाम आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) है, न कि आजाद समाजवादी पार्टी।
उन्होंने मायावती से आशीर्वाद मांगते हुए यह संदेश देने की कोशिश की कि राजनीतिक मतभेद के बावजूद वह उनके सम्मान को बनाए रखना चाहते हैं। हालांकि, उनके बयान में यह भी साफ दिखाई दिया कि वह अपनी राजनीतिक पहचान और नगीना की जीत पर उठाए गए सवालों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं।
2027 से पहले दलित वोटों की लड़ाई तेज
मायावती और चंद्रशेखर के बीच शुरू हुई यह बयानबाजी केवल व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है। इसे उत्तर प्रदेश के दलित वोट बैंक पर राजनीतिक पकड़ की लड़ाई के रूप में भी देखा जा रहा है।
एक तरफ बसपा अपने पुराने और मजबूत दलित आधार को दोबारा एकजुट करने की कोशिश कर रही है। दूसरी ओर चंद्रशेखर खुद को नई पीढ़ी और जमीन पर संघर्ष करने वाले दलित नेतृत्व के रूप में पेश कर रहे हैं। ऐसे में दोनों नेताओं की यह सियासी टक्कर 2027 के विधानसभा चुनाव में बड़ा असर डाल सकती है।
मायावती के गंभीर आरोप और चंद्रशेखर आजाद का सधा हुआ जवाब बताते हैं कि यूपी में दलित नेतृत्व की लड़ाई अब खुलकर सामने आ गई है। चंद्रशेखर ने सम्मान बनाए रखते हुए अपनी ताकत जनता के समर्थन को बताया है। अब 2027 का चुनाव तय करेगा कि दलित मतदाता बसपा के पुराने नेतृत्व के साथ रहता है या नए विकल्प की ओर बढ़ता है।