यूपी चुनाव में कांग्रेस की 150 सीटों की मांग पर सपा नेता आईपी सिंह ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने कांग्रेस को सभी 403 सीटों पर अकेले लड़ने की चुनौती देते हुए गांधी परिवार को लेकर बड़ा बयान दिया।
UP Election 2027 से पहले सीटों के बंटवारे पर आमने-सामने आए सहयोगी दल, IP सिंह के बयान ने बढ़ाई सपा-कांग्रेस गठबंधन की मुश्किल
कांग्रेस की 150 सीटों की मांग पर सपा नेता आईपी सिंह ने राहुल गांधी और गांधी परिवार को लेकर बड़ा बयान दिया।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | उत्तर प्रदेश डेस्क | 29 सितंबर 2026
खबर में खास
कांग्रेस ने मांगीं कम से कम 150 विधानसभा सीटें
सपा नेता ने दी सभी 403 सीटों पर लड़ने की चुनौती
गांधी परिवार और राहुल गांधी पर बोला तीखा हमला
गठबंधन की राजनीति को बताया बैसाखी
अखिलेश यादव पहले दे चुके हैं बयानबाजी से बचने की हिदायत
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर टकराव खुलकर सामने आने लगा है। कांग्रेस की ओर से कम से कम 150 सीटों पर चुनाव लड़ने की मांग किए जाने के बाद सपा नेता आईपी सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
आईपी सिंह ने कांग्रेस को उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़कर अपनी ताकत साबित करने की चुनौती दी। उन्होंने गांधी परिवार और राहुल गांधी पर भी सीधा हमला बोलते हुए दावा किया कि अगली पांच पुश्तों तक गांधी परिवार का कोई सदस्य प्रधानमंत्री नहीं बन सकेगा।
कांग्रेस की 150 सीटों वाली मांग पर भड़के IP सिंह
कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कहा था कि पार्टी गठबंधन में 150 से कम सीटों पर चुनाव नहीं लड़ेगी। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के पास राज्य की सभी 403 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार मौजूद हैं और सीटों के बंटवारे का फैसला अक्टूबर में हो सकता है।
इस बयान के बाद सपा नेता आईपी सिंह ने सोशल मीडिया पर कांग्रेस नेतृत्व को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस का उत्तर प्रदेश में इतना मजबूत जनाधार है तो उसे गठबंधन पर निर्भर रहने के बजाय सभी सीटों पर अकेले चुनाव लड़ना चाहिए।
‘अगली पांच पुश्तों तक कोई गांधी PM नहीं बनेगा’
आईपी सिंह ने कहा कि वर्ष 1989 के बाद गांधी परिवार का कोई सदस्य प्रधानमंत्री नहीं बन सका है। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि आने वाले कई दशकों तक भी गांधी परिवार को प्रधानमंत्री की कुर्सी नहीं मिलेगी।
सपा नेता ने कांग्रेस के नेताओं पर दिल्ली में बैठकर बड़े राजनीतिक सपने देखने का आरोप लगाया। उन्होंने राहुल गांधी के लंबे राजनीतिक सफर पर सवाल उठाते हुए पूछा कि इतने वर्षों में कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में अपना संगठन कितना मजबूत किया और कार्यकर्ताओं को जमीन पर कितनी ताकत मिली।
यह आईपी सिंह का राजनीतिक बयान और दावा है। कांग्रेस की ओर से उनके बयान पर तत्काल कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
कांग्रेस को 403 सीटों पर लड़ने की चुनौती
आईपी सिंह ने कहा कि राजनीतिक जनाधार केवल कैमरे, मंच और बड़े बयानों से तैयार नहीं होता। इसके लिए सड़क पर संघर्ष, बूथ स्तर पर मजबूत संगठन और जनता के बीच लगातार मौजूदगी जरूरी होती है।
उन्होंने कांग्रेस से अपनी राजनीतिक दिशा स्पष्ट करने के लिए भी कहा। साथ ही दावा किया कि समाजवादी पार्टी मध्य प्रदेश के अगले विधानसभा चुनाव में 120 सीटों पर प्रत्याशी उतारने की तैयारी कर रही है और उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
2024 में साथ लड़े थे अखिलेश और राहुल
समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने 2024 का लोकसभा चुनाव गठबंधन के तहत लड़ा था। उत्तर प्रदेश में दोनों दलों के गठबंधन को चुनावी सफलता भी मिली थी। इसके बाद माना जा रहा था कि 2027 का विधानसभा चुनाव भी दोनों पार्टियां मिलकर लड़ेंगी।
लेकिन विधानसभा की 403 सीटों के बंटवारे को लेकर दोनों दलों के बीच मतभेद बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। कांग्रेस अपने संगठन और सभी सीटों पर तैयारी का हवाला देते हुए ज्यादा हिस्सेदारी मांग रही है, जबकि सपा उत्तर प्रदेश में खुद को गठबंधन का बड़ा दल मानती है।
अखिलेश यादव दे चुके हैं नेताओं को हिदायत
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव अपनी पार्टी के नेताओं को कांग्रेस के खिलाफ सार्वजनिक बयानबाजी से बचने की हिदायत दे चुके हैं। इसके बावजूद आईपी सिंह का यह बयान सामने आने के बाद विपक्षी गठबंधन के भीतर नया विवाद खड़ा हो सकता है।
अब सबकी नजर कांग्रेस नेतृत्व और समाजवादी पार्टी के आधिकारिक रुख पर रहेगी। यह भी देखना महत्वपूर्ण होगा कि आईपी सिंह का बयान व्यक्तिगत राय माना जाता है या सीट बंटवारे को लेकर सपा के भीतर बढ़ती नाराजगी का संकेत है।
कांग्रेस की 150 सीटों वाली मांग पर IP सिंह का सीधा हमला बता रहा है कि UP Election 2027 से पहले गठबंधन की राह आसान नहीं है। अखिलेश यादव और राहुल गांधी की जोड़ी चुनाव मैदान में उतरने से पहले यदि सीटों का सम्मानजनक समझौता नहीं कर पाती, तो विपक्ष की एकजुटता को सबसे बड़ा नुकसान अपने ही नेताओं की बयानबाजी से हो सकता है