308 पहिए और 164 टन का वजन... छह महीने बाद भी मंजिल से दूर ‘महाबली’, आखिर इतना समय क्यों लगा?
बेल्जियम से चली 41 मीटर लंबी मशीन को लखीमपुर खीरी पहुंचाया जा रहा है। विशाल आकार के कारण रास्ते चौड़े करने और बाधाएं हटाने के बाद ही ट्रक आगे बढ़ पाता है।
बेल्जियम से 164.28 टन वजनी रिएक्टर लेकर निकला 308 पहियों वाला ट्रक छह महीने बाद भी लखीमपुर खीरी नहीं पहुंचा है। जानिए कहां से शुरू हुआ सफर और इतनी धीमी रफ्तार की असली वजह क्या है।
जहां से गुजरता है वहीं रास्ता बदलना पड़ता है, 308 पहियों वाले ‘महाबली’ का सफर देखकर लोग हैरान
164 टन वजनी मशीन लेकर लखीमपुर खीरी जा रहा 308 पहियों वाला विशाल ट्रक।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | उत्तर प्रदेश डेस्क | 29 सितंबर 2026
खबर में खास
ट्रक में लगाए गए हैं कुल 308 पहिए
164.28 मीट्रिक टन वजनी रिएक्टर लेकर जारी है सफर
बेल्जियम से अप्रैल में शुरू हुई थी मशीन की यात्रा
लखीमपुर खीरी के बायोप्लास्टिक प्लांट तक जाना है
मंजिल तक पहुंचने में अभी दो से तीन सप्ताह और लग सकते हैं
उत्तर प्रदेश की सड़कों पर इन दिनों 308 पहियों वाला विशाल ट्रक लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस ‘महाबली’ पर 164.28 मीट्रिक टन वजन और करीब 41 मीटर लंबाई वाली एक विशाल मशीन लदी है। ट्रक को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी पहुंचना है, लेकिन छह महीने से जारी सफर के बावजूद यह अब तक अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच पाया है।
ट्रक पर लदी मशीन एक रिएक्टर है, जिसे लखीमपुर खीरी के कुंभी गांव में बलरामपुर चीनी मिल द्वारा बनाए जा रहे बायोप्लास्टिक प्लांट तक पहुंचाया जा रहा है। मशीन के विशाल आकार और भारी वजन के कारण इस यात्रा की रफ्तार बेहद धीमी है।
बेल्जियम से अप्रैल में शुरू हुआ था सफर
इस विशाल मशीन की यात्रा अप्रैल 2026 में बेल्जियम से शुरू हुई थी। इसे समुद्री रास्ते से भारत भेजा गया और लगभग एक महीने बाद यह ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पहुंची।
पारादीप बंदरगाह पर मशीन को 308 पहियों वाले विशेष वाहन पर लादा गया। इसके बाद यह काफिला सड़क मार्ग से झारखंड और बिहार होते हुए उत्तर प्रदेश पहुंचा। अब इसे लखीमपुर खीरी तक ले जाया जा रहा है।
चंदौली में क्यों रोकना पड़ा ट्रक?
यह ट्रक 25 सितंबर को उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले की सीमा में पहुंचा था। पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर के पास नेशनल हाईवे-19 पर रिंग रोड के नजदीक इसे रोकना पड़ा, क्योंकि आगे का रास्ता मशीन की ऊंचाई और चौड़ाई के हिसाब से पर्याप्त नहीं था।
इसके बाद संबंधित विभागों से अनुमति लेकर जेसीबी और दूसरी मशीनों की मदद से वैकल्पिक रास्ता तैयार किया गया। रास्ता बनने के बाद ट्रक को वाराणसी की ओर रवाना किया गया।
जहां पहुंचता है, वहां उमड़ पड़ती है भीड़
308 पहियों वाला यह वाहन जिस इलाके से गुजरता है, वहां इसे देखने के लिए लोगों की भीड़ जमा हो जाती है। चंदौली में ट्रक के रुकने की खबर मिलते ही आसपास के गांवों के साथ दूर-दराज के लोग भी मौके पर पहुंच गए।
लोगों ने विशाल ट्रक और मशीन के साथ तस्वीरें लीं, जबकि कई कंटेंट क्रिएटर्स ने इसके वीडियो बनाए। लोगों के लिए इसके 308 पहिए, लंबाई और भारी वजन सबसे अधिक हैरानी का कारण बने हुए हैं।
आगे किस रास्ते से जाएगा ‘महाबली’?
लॉजिस्टिक्स टीम के अनुसार, ट्रक को गाजीपुर, गोरखपुर और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के रास्ते लखीमपुर खीरी ले जाने की योजना है। रास्ते में आने वाली बाधाओं को संबंधित विभागों की अनुमति के बाद हटाया जा रहा है।
इतने भारी वाहन को सामान्य ट्रक की तरह नहीं चलाया जा सकता। रास्ते की चौड़ाई, पुलों की क्षमता, बिजली के तार और दूसरी बाधाओं की पहले जांच करनी पड़ती है। यात्रा योजना के अनुसार चली तो ट्रक को मंजिल तक पहुंचने में अभी लगभग दो से तीन सप्ताह और लग सकते हैं।
308 पहियों वाला यह ‘महाबली’ केवल एक ट्रक नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग और मुश्किल योजना का चलता-फिरता उदाहरण है। बेल्जियम से शुरू हुआ सफर समुद्र, कई राज्यों और बदले गए रास्तों को पार कर चुका है। अब लोगों की निगाह इस पर है कि 164 टन की मशीन लेकर यह विशाल वाहन लखीमपुर खीरी कब पहुंचता है।